Johar Live Desk : भारतीय सिनेमा के शौमैन राज कपूर की रविवार को 101वीं जयंती है। राज कपूर ने मात्र 24 साल की उम्र में अपनी प्रोडक्शन कंपनी ‘आरके फिल्म्स’ की स्थापना की और अपने अभिनय और निर्देशन से भारतीय सिनेमा को नई पहचान दी। राज कपूर को भारत का चार्ली चैपलिन कहा जाता था। उन्होंने अपने किरदारों में आम आदमी की भावनाओं को पर्दे पर जीवंत किया। राज कपूर बचपन में चैपलिन की फिल्मों को देखकर रोते थे। उन्होंने अपनी फिल्मों जैसे ‘श्री 420’ और ‘मेरा नाम जोकर’ में चैपलिन की ट्रैजिक-कॉमिक शैली को अपनाया।
सादगी और लोकप्रियता
उनके बेटे रणधीर कपूर ने बताया कि राज कपूर हमेशा लोगों के करीब रहना पसंद करते थे। एक बार उन्होंने रणधीर को समझाया, “मैं अगर बस में भी जाऊंगा, तो लोग कहेंगे – ‘राज कपूर बस में बैठा है।’” उनकी लोकप्रियता सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि सोवियत संघ, चीन, तुर्की, मध्य-पूर्व और अफ्रीका में भी रही। उनकी फिल्म ‘आवारा’ रूस में तीसरी सबसे ज्यादा देखी जाने वाली विदेशी फिल्म बनी।
नरगिस के साथ प्रेम कहानी
राज कपूर और नरगिस की जोड़ी बॉलीवुड की सबसे मशहूर जोड़ी थी। उन्होंने 16 फिल्मों में साथ काम किया, जिसमें ‘आवारा’, ‘श्री 420’ और ‘बरसात’ शामिल हैं। पर्दे पर उनकी केमिस्ट्री के पीछे गहरी दोस्ती और प्रेम था, लेकिन राज कपूर की शादीशुदा जिंदगी के कारण यह रिश्ता आगे नहीं बढ़ सका। बॉलीवुड अभिनेता रणबीर कपूर का नाम उनके दादा राज कपूर के पूरे नाम रणबीर राज कपूर पर रखा गया।
सिनेमा के प्रति समर्पण
कुकू कोहली, जो राज कपूर के असिस्टेंट डायरेक्टर थे, ने बताया कि राज कपूर हमेशा पैशन के लिए फिल्म बनाते थे। उनकी फिल्मों में सबसे ज्यादा खर्च सेट पर खाने-पीने और क्रू की देखभाल में होता था। वे रियल लोकेशन पर शूट करना पसंद करते थे और कलाकारों की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखते थे। फिल्म ‘बॉबी’ के कुछ सीन इसके उदाहरण हैं, जहां खतरनाक लोकेशन पर भी कलाकारों की सुरक्षा सुनिश्चित की गई।
अनकहे किस्से
एक बार फिल्म ‘संगम’ की रिलीज पार्टी में मशहूर लेखक इंदर राज आनंद ने गुस्से में राज कपूर को थप्पड़ मार दिया। इसके बाद इंदर राज आनंद को इंडस्ट्री में भारी बहिष्कार का सामना करना पड़ा।
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