किशलय शानू, रांची
राजधानी रांची में बीते दो महीना आम लोगों को दर्दनाक नॉस्टेल्जिया में लेकर गया. साल 2016 में जब अचानक पीएम मोदी ने कहा कि 2000 रुपए के नोट वैलिड नहीं रहेंगे. अगले ही पल लोग एटीएम की लाइन में लग गए. आलम ऐसा कि देश का शायद ही कोई कोना हो जहां लोग लाइन में नहीं खड़े थे. साल बीता, समय बदला. लेकिन आम लोगों को ऐसे ही लाइन में लगने का झटका फिर मिला. ईरान-इजराइल-अमेरिका युद्ध की वजह से भारत के आमलोगों के जीवन पर भी बुरा असर पड़ा. हर दिन की जरूरत गैस की किल्लतों का सामना करना पड़ा. आनन-फानन में सरकार ने इसे अति आवश्यक वस्तुओं की सूची में डाला. साथ ही गैस एजेंसियों के लिए निर्देश जारी किया गया कि वो ग्राहकों के द्वारा दिए गए रजिस्टर्ड पते पर ही जाकर तय समय सीमा के अंदर गैस सिलिंडर की डिलिवरी करेंगे. लेकिन इंद्रप्रस्थ गैस एजेंसी ने सरकारी आदेश को ठेंगा दिखाते हुए उसका खुलकर उल्लंघन किया. इसके लिए पुलिस ने गैस एजेंसी के संचालक रवि भट्ट को दोषी माना है.
जांच के दौरान गवाहों के बयान से भी हुई अनियमित की पुष्टि
पुलिस ने केस के अनुसंधान के दौरान दो गवाहों का बयान लिया है. इसमे एक का नाम रवि सिंह और दूसरे का नाम गंजा तिर्की. दोनों ने अपने बयान में इस बात की जानकारी दी है कि ऑनलाइन बुकिंग के बावजूद ग्राहक को गैस सिलिंडर होम डिलेवरी नहीं किया जाता था. निर्धारित समय बीत जाने के बाद गैस एजेंसी के कर्मी के द्वारा ग्राहक से संपर्क कर कहा जाता था कि आपका डीएसी नंबर एक्सपायर हो गया है. पुलिस की जांच में यह भी खुलासा हुआ कि आगे कर्मी के द्वारा ग्राहक को कहा जाता था कि आप डिस्ट्रीब्यूशन प्वाइंट में आकर अपना गैस सिलिंडर ले जाइये. इस वजह से लोगों को लंबे समय तक गैस सिलिंडर लेने के लिए कतारा में खड़ा रहना पड़ता था. पुलिस ने जांच के दौरान यह भी पाया है कि इंडियन ऑयल की ओर से ग्राहक के घर तक गैस सिलिंडर पहुंचाने के लिए नियम बनाया गया है और इस नियम से गैस एजेंसी के संचालक को कोई छूट प्रदान नहीं की गयी थी.
चुटिया थाना में दर्ज प्राथमिकी में क्या है आरोप
मामले को लेकर चुटिया थाना में 23 मई 2026 को केस दर्ज हुआ था. यह केस अरगोड़ा सर्किल इंस्पेक्टर अरविंद कुमार उपाध्याय की शिकायत पर दर्ज हुआ था. केस में अमरावती कॉलोनी निवासी लोगों से मिली सूचना के आधार पर यह आरोप था कि डीएसी नंबर आने के बावजूद 40 दिनों तक गैस की होम डिलेवरी नहीं की जाती है. इंद्रप्रस्थ गैस एजेंसी के कर्मियों के द्वारा प्वाइंट वाइस लाइन लगाकर प्रत्येक बुधवार और रविवार को गैस वितरण किया जाता है. इसलिए मामले में सरकारी आदेश और उल्लंघन और आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत केस दर्ज हुआ था. जिसके बाद से पुलिस मामले में आगे केस का अनुसंधान कर रही थी.
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