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    Home»झारखंड»BREAKING : डॉ राजकुमार का इस्तीफा मंजूर, डॉ दीपेंद्र सिन्हा बने रिम्स के प्रभारी निदेशक
    झारखंड

    BREAKING : डॉ राजकुमार का इस्तीफा मंजूर, डॉ दीपेंद्र सिन्हा बने रिम्स के प्रभारी निदेशक

    joharlive NetworkBy joharlive NetworkJune 25, 2026Updated:June 25, 2026No Comments4 Mins Read8
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    Ranchi : झारखंड के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रिम्स के निदेशक डॉ. राजकुमार ने गुरुवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। सीआईडी की टीम ने बीते बुधवार को रिम्स के कई महत्वपूर्ण विभागों में छापेमारी की थी। पूरे दिन चली सीआईडी की कार्रवाई चली जिसके बाद अस्पताल प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और सरकार के गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया था, जिसके बाद आज डॉ राजकुमार ने रिजाइन कर दिया। डॉ. राजकुमार का इस्तीफा ऐसे वक्त आया है जब रिम्स पहले से ही दो बड़े विवादों को लेकर जांच एजेंसियों के रडार पर है। इनमें फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर मेडिकल एडमिशन और सफाई टेंडर में कथित अनियमितता के मामले शामिल हैं। रिम्स के नए प्रभारी निदेशक डॉ. दीपेंद्र कुमार सिन्हा को बनाया गया है। इससे संबंधित अधिसूचना जारी कर दिया गया है। इससे पूर्व डॉ. राजकुमार की ओर से इस्तीफा दिया गया था। जिसे स्वीकार करने के बाद नई जिम्मेवारी डॉ. दीपेंद्र कुमार सिन्हा को सौंपा गया है।

    मालूम हो कि सीआईडी की दो अलग-अलग टीमों ने एक साथ रिम्स के डेटा सेंटर, डीन कार्यालय और प्रशासनिक विभाग में पहुंचकर दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच की। अधिकारियों ने कई फाइलें और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य अपने कब्जे में लिए। इस दौरान निदेशक, डीन और चिकित्सा अधीक्षक समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों से भी लंबी पूछताछ की गई।

    फर्जी प्रमाण पत्र पर मेडिकल में दाखिले का मामला

    सीआईडी की जांच का सबसे बड़ा केंद्र वर्ष 2025 के एमबीबीएस और बीडीएस एडमिशन हैं। शिकायत मिली थी कि चार छात्रों ने कथित तौर पर फर्जी जाति और विकलांगता प्रमाण पत्र के आधार पर मेडिकल कॉलेज में दाखिला लिया। जिन छात्रों के नाम जांच में सामने आए हैं उनमें काजल कुमारी, आशीष कुमार और ओली विश्वकर्मा के जाति प्रमाण पत्र तथा पप्पू कुमार के विकलांगता प्रमाण पत्र पर सवाल उठाए गए हैं। सबसे हैरानी की बात यह है कि छात्रों का दाखिला हुए करीब एक साल बीत गया, लेकिन दस्तावेजों का भौतिक सत्यापन नहीं कराया गया। जबकि नियम के मुताबिक प्रवेश के बाद संबंधित जिला प्रशासन या प्रमाण पत्र जारी करने वाली एजेंसी से सत्यापन कराना अनिवार्य होता है। अब सीआईडी यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह केवल लापरवाही थी या फिर जानबूझकर नियमों को नजरअंदाज किया गया।

    सफाई टेंडर पर भी उठ रहे सवाल

    सीआईडी की दूसरी जांच अस्पताल की सफाई व्यवस्था के लिए जारी टेंडर से जुड़ी है। आरोप है कि टेंडर प्रक्रिया में नियमों का पालन नहीं किया गया और कुछ कंपनियों को फायदा पहुंचाने की कोशिश की गई। जांच के दौरान टेंडर से जुड़ी फाइलों, नोटशीट और डिजिटल रिकॉर्ड की भी पड़ताल की गई। अधिकारियों का मानना है कि इन दस्तावेजों से कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं। रिम्स जैसे बड़े अस्पताल में हर साल सफाई व्यवस्था पर करोड़ों रुपये खर्च होते हैं। ऐसे में टेंडर प्रक्रिया में किसी भी तरह की गड़बड़ी को गंभीर मामला माना जा रहा है।

    सरकार और रिम्स के बीच पहले से थी खींचतान

    पिछले कुछ महीनों से स्वास्थ्य विभाग और रिम्स प्रशासन के बीच कई मुद्दों को लेकर तनाव की स्थिति बनी हुई थी। स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी सार्वजनिक रूप से कई बार रिम्स की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा चुके थे। फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर एडमिशन की शिकायत सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने जांच के आदेश दिए थे। जांच रिपोर्ट और शिकायतों के आधार पर मामला बाद में सीआईडी तक पहुंच गया। बुधवार की कार्रवाई को इसी जांच का हिस्सा माना जा रहा है। हालांकि सीआईडी की ओर से अभी तक आधिकारिक तौर पर जांच के निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।

    देश के जाने-माने न्यूरोसर्जन हैं डॉ. राजकुमार

    डॉ. राजकुमार चिकित्सा जगत का बड़ा नाम माने जाते हैं। वे देश के प्रतिष्ठित न्यूरोसर्जनों में शामिल हैं। उनके पास बीएससी, एमबीबीएस, एमएस, एम.च., पीएचडी, एफआरसीएस और डीएससी जैसी कई उच्च डिग्रियां हैं। रिम्स आने से पहले वे एम्स ऋषिकेश के निदेशक रह चुके हैं। इसके अलावा लखनऊ के एसजीपीजीआई में न्यूरोसर्जरी विभाग का नेतृत्व कर चुके हैं और उत्तर प्रदेश यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज के कुलपति भी रह चुके हैं।

    रिम्स में निदेशकों का विवादों से पुराना रिश्ता

    रिम्स में निदेशकों का विवादों में घिरना पहली बार नहीं हुआ है। इससे पहले वर्ष 2020 में तत्कालीन निदेशक डॉ. डीके सिंह भी सरकार के साथ टकराव और प्रशासनिक विवादों के कारण चर्चा में आ गए थे। उस समय स्वास्थ्य विभाग और रिम्स प्रशासन के बीच खींचतान इतनी बढ़ गई थी कि आखिरकार उन्हें पद से हटा दिया गया था। अब छह साल बाद एक बार फिर रिम्स का निदेशक विवादों के केंद्र में है। फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार मामला सीआईडी जांच तक पहुंच गया है।

    BREAKING: Dr. Rajkumar's resignation accepted; Dr. Deependra Sinha to be the new Director of RIMS.
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