Ranchi : झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि बजट सिर्फ आय-व्यय का ब्योरा नहीं होता, बल्कि यह राज्य की दशा और दिशा तय करता है। उनके मुताबिक यह बजट सामाजिक न्याय की प्रतिबद्धता को दिखाता है। उन्होंने कहा, “किसी के पैरों पर गिरकर कामयाबी पाने से बेहतर है कि अपने पैरों पर चलकर कुछ बनने की ठान ली जाए।”
केंद्र के सहयोग के बिना लक्ष्य मुश्किल
वित्त मंत्री ने साफ कहा कि केंद्रीय सहायता के बिना राज्य अपने वांछित लक्ष्य हासिल नहीं कर सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार झारखंड को अपेक्षित सहयोग नहीं दे रही है। उनका कहना था कि अगर सहयोग मिल रहा होता तो विपक्ष राज्यपाल के अभिभाषण पर कटौती प्रस्ताव जरूर लाता। उन्होंने बताया कि जीएसटी की वजह से झारखंड को हर साल करीब 4000 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। वहीं केंद्रीय करों में राज्य की हिस्सेदारी के 5000 करोड़ रुपये अभी तक नहीं मिले हैं। अनुदान मद में भी 11 हजार करोड़ रुपये लंबित हैं और पिछले पांच वर्षों से अनुदान राशि में कटौती की जा रही है।
‘अबुआ दिशोम बजट’ की खासियत
वित्त मंत्री ने बताया कि इस बार बाल बजट तैयार करने के लिए स्कूली बच्चों और संबंधित वर्गों से सुझाव लिए गए। इस बजट को उन्होंने ‘अबुआ दिशोम बजट’ नाम दिया है। उनका कहना है कि यह बजट झारखंड की जरूरतों और जनता की आकांक्षाओं को ध्यान में रखकर बनाया गया है।
VBRG योजना से बढ़ेगा बोझ
उन्होंने कहा कि वीबीआरजी योजना की वजह से झारखंड को हर साल 5640 करोड़ रुपये का नुकसान होगा। केंद्र के कुछ फैसलों के कारण राज्य पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। इसके बावजूद राज्य सरकार अपने संसाधनों से जरूरी काम पूरे कर रही है। वित्त मंत्री ने भरोसा दिलाया कि किसी भी सरकारी कर्मचारी का एक महीने का वेतन नहीं रुका है और वर्तमान में राजकोष में 78 हजार करोड़ रुपये उपलब्ध हैं।
राजस्व बढ़ाने की तैयारी
राज्य सरकार राजस्व बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। मुख्य राजस्व संग्रहण विभागों की राजस्व संवर्द्धन समिति बनाई गई है, जो आय बढ़ाने के उपायों पर काम कर रही है। इसके अलावा सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP), कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) और अन्य बाहरी एजेंसियों के माध्यम से भी संसाधन जुटाने की योजना है।
दावोस में झारखंड की वैश्विक पहचान
वित्त मंत्री ने बताया कि राज्य ने पहली बार World Economic Forum 2026 में भाग लिया, जो Davos में आयोजित हुआ था। वहां झारखंड ने हरित औद्योगिकीकरण और समावेशी व सतत विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और वैश्विक मंच पर अपनी पहचान मजबूत की।
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