हजारीबाग के केरेडारी क्षेत्र में चंद्रगुप्त कोल परियोजना को लेकर एक बार फिर विरोध तेज होने के संकेत मिले हैं. परियोजना से प्रभावित और विस्थापित रैयतों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर 7 सितंबर को परियोजना की एमडीओ कंपनी सुशी इंफ्रा के घेराव का ऐलान किया है.
बैठक में 27 अगस्त को उठे थे रोजगार और मुआवजे के मुद्दे
चट्टी बारियातू में बीते 27 अगस्त को प्रभावित रैयतों और ग्रामीणों की बैठक हुई थी. बैठक में रोजगार, मुआवजा, विस्थापन नीति और गैरमजरूआ जमीन के सत्यापन समेत कई मुद्दों पर चर्चा की गई.
ग्रामीणों और स्थानीय युवाओं की ओर से आरोप लगाया गया कि परियोजना से प्रभावित लोगों को अपेक्षा के अनुरूप रोजगार नहीं मिल रहा है. रैयतों ने स्थानीय लोगों को रोजगार देने और प्रभावित परिवारों के लिए उचित मुआवजे की मांग उठाई. इसके अलावा बैठक में खनन गतिविधियों से होने वाले प्रदूषण और ब्लास्टिंग का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा. ग्रामीणों ने ब्लास्टिंग से मकानों को नुकसान पहुंचने और पर्यावरण पर असर पड़ने की बात कही. रैयतों ने गैरमजरूआ जमीन के सत्यापन और विस्थापित परिवारों के पुनर्वास से जुड़े मुद्दों के समाधान की भी मांग की.
फरवरी में भी हो चुका है विरोध
चंद्रगुप्त कोल परियोजना को लेकर इससे पहले भी विरोध प्रदर्शन हो चुके हैं. फरवरी में रैयतों ने मोटरसाइकिल रैली निकालकर स्थानीय लोगों को रोजगार देने और मुआवजे से जुड़े मुद्दे उठाए थे. इसके बाद अप्रैल में आंदोलन के दौरान परियोजना का काम प्रभावित हुआ था. उस समय 100 रैयतों को रोजगार देने के आश्वासन के बाद आंदोलन स्थगित होने और खनन गतिविधियां शुरू होने की खबर सामने आई थी. जून में कोल ट्रांसपोर्टिंग रोड के निर्माण को लेकर भी रैयतों ने विरोध किया था और पहले मुआवजा तथा रोजगार के मुद्दे पर बातचीत की मांग की थी.
7 सितंबर को घेराव का ऐलान
हालिया बैठक में प्रभावित और विस्थापित रैयतों ने तय किया कि यदि उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन तेज किया जाएगा. बैठक में 7 सितंबर को सुशी इंफ्रा के घेराव का निर्णय लिया गया. आंदोलन में परियोजना से प्रभावित सात गांवों के रैयतों और ग्रामीणों के शामिल होने का दावा किया गया है.
चंद्रगुप्त कोल परियोजना को लेकर उठ रहा विरोध मुख्य रूप से रोजगार, उचित मुआवजा, विस्थापन नीति, जमीन के सत्यापन, प्रदूषण और ब्लास्टिंग से होने वाले कथित नुकसान जैसे मुद्दों से जुड़ा है. अब नजर इस बात पर रहेगी कि कंपनी और प्रशासन रैयतों की मांगों पर क्या रुख अपनाते हैं और 7 सितंबर के प्रस्तावित घेराव से पहले कोई समाधान निकलता है या नहीं.
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