किसलय शानू
रांची : झारखंड में नक्सलियों के खिलाफ गठित झारखंड जगुआर का अब पुर्नगठन होगा. झारखंड जगुआर की टीम दूसरे राज्यों की तरह अब एसटीएफ (स्पेशल टास्क फोर्स) की तर्ज पर काम करेगी. एसटीएफ का काम राज्य में सक्रिय विभिन्न अपराधियों और साइबर अपराधियों के खिलाफ छापेमारी की कार्रवाई करेगी. पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार झारखंड में नक्सिलयों के सफाये के बाद अब डीजीपी तदाशा मिश्र के द्वारा झारखंड जगुआर के पुनर्गठन को लेकर एक खाका तैयार किया गया है. इसे लेकर डीजपी के द्वारा बैठक भी बुलाई गई थी. लेकिन, फिलहाल बैठक को कुछ कारणों से टाल दिया गया है. जल्द ही इसे लेकर डीजीपी के अध्यक्षता में बैठक होगी और झारखंड जगुआर के पुनर्गठन पर अंतिम निर्णय लिया जायेगा. पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों के अनुसार झारखंड जगुआर के पुनर्गठन को लेकर प्रस्ताव तैयार करने की दिशा में तैयारी शुरु कर दी गई है. प्रस्ताव तैयार होने पर मामले में आगे की कार्रवाई के लिए इसे डीजीपी के समक्ष प्रस्तुत किया जायेगा.
क्यों किया जा रहा है झारखंड जगुआर का पुनर्गठन
पुलिस अधिकारियों के अनुसार झारखंड में अब कोई भी जिला नक्सलियों के प्रभाव में नहीं है. जबकि, झारखंड जगुआर का गठन नक्सलियों से लड़ाई के लिए किया गया था. वर्तमान में झारखंड जगुआर के अफसरों और जवानों से नक्सलियों के खिलाफ अभियान से संबंधित काम नहीं के बराबर लिया जा रहा है. झारखंड जगुआर एक स्पेशल फोर्स है. यह विशेष रुप से प्रशिक्षित भी है. इसलिए इसकी उपयोगिता को अब एसटीएफ की तर्ज पर विकसित करने पर विचार किया गया है.

झारखंड जगुआर में है 2500 अफसर व जवान
झारखंड जगुआर में करीब 2500 अफसरों व जवानों की तैनाती हुई है. यह अफसर और जवान विभिन्न पदों पर पदस्थापित है. इसका मुख्यालय रांची स्थित रिंग रोड के किनारे टेंडर ग्राम में है. इस बल में एसॉल्ट ग्रुप को नक्सलियों से लड़ाई के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित किया गया था. जबकि, बम स्कॉवयड् की टीम भी नक्सल इलाकों में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुकी है.
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