रांची : झारखंड के सभी 24 जिलों में यौन अपराधों से प्रभावित बच्चों और उनके परिवारों को सहायता उपलब्ध कराने के लिए सहायक व्यक्तियों (Support Persons) का पैनल तैयार किया जा रहा है. इस पहल के तहत पहले बैच का दो दिवसीय प्रशिक्षण 14 और 15 अक्टूबर को रांची स्थित SIRD में आयोजित किया गया.
झारखंड राज्य बाल संरक्षण समिति (JSCPS) ने UNICEF झारखंड के सहयोग और NUSRL रांची के सेंटर फॉर चाइल्ड राइट्स की साझेदारी में यह प्रशिक्षण आयोजित किया. इसका उद्देश्य POCSO अधिनियम, 2012 और POCSO नियम, 2020 के प्रावधानों के साथ सहायक व्यक्तियों की भूमिका और जिम्मेदारियों के बारे में प्रतिभागियों की समझ विकसित करना था.
बच्चों को जरूरी सेवाओं से जोड़ेंगे सहायक व्यक्ति
प्रशिक्षण में बाल यौन शोषण के मनोवैज्ञानिक प्रभाव, पुलिस जांच, चिकित्सकीय सहायता और न्यायिक प्रक्रिया के दौरान बच्चों को सहयोग देने जैसे विषयों पर चर्चा की गई. बच्चों की गोपनीयता बनाए रखने, उनसे संवेदनशील तरीके से बातचीत करने और उनके परिवारों को उपलब्ध सहायता सेवाओं की जानकारी देने पर भी जोर दिया गया.

सहायक व्यक्तियों को बाल कल्याण समिति (CWC), पुलिस, स्वास्थ्य एवं मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित करने की प्रक्रिया की जानकारी दी गई, ताकि जरूरतमंद बच्चों को समय पर उचित सहायता मिल सके.
बाल संरक्षण समिति की उपसचिव वंदना शेजवलकर ने कहा कि सहायक व्यक्ति की भूमिका बच्चे को भावनात्मक सहयोग देने तक सीमित नहीं है. वह बच्चे और उसके परिवार को जरूरी सेवाओं से जोड़ने में भी महत्वपूर्ण कड़ी है.
उन्होंने कहा कि विभिन्न विभागों के बीच समन्वय, समय पर रेफरल और पूरी प्रक्रिया के दौरान बच्चों को सम्मानजनक एवं बाल-अनुकूल सहयोग उपलब्ध कराना सहायक व्यक्तियों की प्रमुख जिम्मेदारियां हैं. यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि कोई भी बच्चा जानकारी या सेवाओं के अभाव में अपने अधिकारों से वंचित न रहे.
केस स्टडी के जरिए समझाई गई जिम्मेदारियां
प्रशिक्षण में इनफॉल्ड ट्रस्ट (Enfold Trust) की खुशी कुशलप्पा, UNICEF झारखंड की बाल संरक्षण विशेषज्ञ प्रीति श्रीवास्तव, NUSRL के सेंटर फॉर चाइल्ड राइट्स की प्रो. (डॉ.) के. श्यामला, UNICEF के बाल संरक्षण अधिकारी गौरव, डॉ. तबरेज और नरेंद्र शर्मा ने संसाधन व्यक्तियों के रूप में योगदान दिया.
केस स्टडी, समूह अभ्यास और संवाद आधारित गतिविधियों के जरिए प्रतिभागियों को सहायक व्यक्तियों की नियुक्ति, दस्तावेजीकरण, अनुवर्ती कार्रवाई और विभिन्न हितधारकों के साथ समन्वय की जानकारी दी गई.
समापन सत्र में प्रीति श्रीवास्तव ने एक वास्तविक मामले का उदाहरण देते हुए प्रभावित बच्चों और उनके परिवारों को समय पर सहायता, उचित मार्गदर्शन और समन्वित सेवाएं उपलब्ध कराने की जरूरत बताई. उन्होंने समय पर हस्तक्षेप और संवेदनशील सहयोग को प्रभावी बाल संरक्षण व्यवस्था के लिए आवश्यक बताया.
बाल संरक्षण व्यवस्था होगी मजबूत
सभी 24 जिलों में सहायक व्यक्तियों का पैनल तैयार होने से POCSO अधिनियम के तहत प्रभावित बच्चों और उनके परिवारों को आवश्यक सहायता एवं सेवाओं से जोड़ने में मदद मिलने की उम्मीद है. यह पहल राज्य में बाल संरक्षण व्यवस्था को अधिक संवेदनशील, समन्वित और प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है.


