पश्चिम बंगाल में कथित ‘लव जिहाद’ से जुड़े एक मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है. कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई सबूत नहीं है, जिससे यह साबित हो कि महिला का इस्लाम में धर्मांतरण कराने की कोशिश की गई थी.
हालांकि, अदालत ने आरोपी पुलिस कांस्टेबल रफीकुल इस्लाम और उसके परिवार के सदस्यों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामला रद्द करने से इनकार कर दिया.
आरोपी ने धर्म और शादीशुदा होने की बात छिपाई
आरोपी रफीकुल इस्लाम ने अपनी पहचान, धर्म और पहले से शादीशुदा होने की बात छिपाई थी. इसके अलावा आरोपी ने खुद को हिंदू और अविवाहित बताकर महिला के साथ शारीरिक संबंध बनाए. इसके बाद दोनों ने दीघा के एक मंदिर में शादी की रस्म भी पूरी की.
महिला के अनुसार, बाद में उसे पता चला कि रफीकुल मुस्लिम है और पहले से शादीशुदा भी है. उसने आरोप लगाया कि आरोपी ने प्रेम संबंध और शादी का भरोसा देकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए.

शिकायत में महिला ने यह भी आरोप लगाया कि आरोपी उसे अपने पैतृक गांव ले गया, जहां उसके परिवार के सदस्यों ने उसके साथ मारपीट की. महिला के मुताबिक, इस घटना में उसके गर्भ में पल रहे बच्चे की मौत हो गई. उसने यौन उत्पीड़न, धमकी और जबरन रोककर रखने जैसे आरोप भी लगाए.
आरोपी पक्ष ने क्या कहा?
रफीकुल इस्लाम और अन्य आरोपियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर अपने खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही रद्द करने की मांग की थी.
आरोपी पक्ष की दलील थी कि महिला पहले से शादीशुदा थी और उसका एक बच्चा भी था. उनके मुताबिक, दोनों के बीच संबंध दो वयस्कों की सहमति से बने थे. बचाव पक्ष ने महिला की वैवाहिक स्थिति और कथित शादी की कानूनी वैधता का सवाल भी उठाया.
आरोपियों ने यह भी दलील दी कि विभागीय जांच में कुछ आरोप साबित नहीं हुए थे. इसलिए आपराधिक कार्यवाही जारी रखना उचित नहीं है. हालांकि, हाईकोर्ट ने इन दलीलों को मुकदमा खत्म करने के लिए पर्याप्त नहीं माना.
लव जिहाद पर कोर्ट ने क्या कहा
अदालत ने साफ किया कि उपलब्ध रिकॉर्ड से महिला का धर्म परिवर्तन कराने की किसी कोशिश का पता नहीं चलता. न ही किसी लव जिहाद किसी कानून में परिभाषित है. यानी इस मामले को ‘लव जिहाद’ बताने के लिए अदालत को पर्याप्त आधार नहीं मिला.
लेकिन कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि धर्मांतरण की कोशिश का सबूत नहीं मिलने से धोखाधड़ी के आरोप अपने आप खत्म नहीं हो जाते.
अगर किसी व्यक्ति ने अपनी पहचान, धर्म या वैवाहिक स्थिति के बारे में जानबूझकर गलत जानकारी देकर किसी दूसरे व्यक्ति को संबंध बनाने के लिए तैयार किया, तो यह सवाल साक्ष्यों के आधार पर जांचा जाना जरूरी है. अदालत के मुताबिक, इस मामले में यह तय करने के लिए मुकदमे के दौरान सबूतों पर विचार करना होगा कि महिला की सहमति कथित तौर पर गलत जानकारी देकर हासिल की गई थी या नहीं.
महिला ने रफीकुल इस्लाम के अलावा उसके परिवार के सदस्यों पर भी मारपीट और धमकी देने के आरोप लगाए थे. हाईकोर्ट ने कहा कि शिकायत और चोट से जुड़े रिकॉर्ड को देखते हुए इन आरोपों को इस स्तर पर पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता.
Also Read : JPSC-JSSC सुधार की मांग करने वाले छात्रों की शिकायत पर NHRC सख्त, धनबाद SSP से दो सप्ताह में मांगी रिपोर्ट


