रांची. झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की लॉ ऑफिसर नियुक्ति नियमावली-2026 को सही ठहराया है. मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने नियमावली को चुनौती देने वाली याचिका पर फैसला सुनाया. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार के बोर्ड और निगम चाहें तो अपने वकील रख सकते हैं.
यह मामला अधिवक्ता लाल ज्ञान रंजन नाथ शाहदेव की ओर से दायर याचिका से जुड़ा है. याचिका में झारखंड लॉ ऑफिसर नियुक्ति नियमावली-2026 और इसके तहत लॉ ऑफिसर के पदों पर नियुक्ति के लिए आवेदन आमंत्रित करने की प्रक्रिया को चुनौती दी गई थी. याचिकाकर्ता का कहना था कि नियमावली के कुछ प्रावधान कानून के अनुरूप नहीं हैं.
मामले में दोनों पक्षों को सुनने के बाद खंडपीठ ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. मंगलवार को फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने नियमावली को सही ठहराया. साथ ही बोर्ड और निगमों के अपने वकील रखने के अधिकार को लेकर स्थिति स्पष्ट की.
25 जून को अधिसूचित हुई थी नियमावली
राज्य सरकार के विधि विभाग ने 25 जून 2026 को झारखंड लॉ ऑफिसर (एंगेजमेंट) रूल्स-2026 अधिसूचित किए थे. इसके तहत झारखंड हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट और अन्य अदालतों में सरकार का पक्ष रखने वाले विधि पदाधिकारियों की नियुक्ति, उनकी जिम्मेदारी, मानदेय और सेवा शर्तों को तय करने की व्यवस्था की गई है.
नियमावली में विभिन्न श्रेणियों के लॉ ऑफिसर की नियुक्ति के लिए सर्च कमेटी और सेलेक्शन कमेटी का प्रावधान भी किया गया है. सरकार ने नियुक्ति प्रक्रिया को व्यवस्थित करने और विधि पदाधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने के उद्देश्य से यह नियमावली लागू की थी.
नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर उठा था विवाद
नियमावली लागू होने के बाद इसकी वैधता और इसके आधार पर नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने को लेकर हाईकोर्ट में चुनौती दी गई. मामले की सुनवाई के दौरान नियुक्ति प्रक्रिया पर रोक का मुद्दा भी उठा था. अदालत ने पहले राज्य सरकार से जवाब मांगा था और मामले की सुनवाई पूरी होने तक नियुक्ति प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाने का निर्देश दिया था.
इसके बाद दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद खंडपीठ ने फैसला सुरक्षित रखा था. अब नियमावली को सही ठहराए जाने के बाद इसके तहत नियुक्ति प्रक्रिया आगे बढ़ने का रास्ता साफ हो सकता है.
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