Patna : बिहार राज्य स्वास्थ्य समिति परिसर में बुधवार को सैकड़ों HIV संक्रमित मरीजों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शन कर रहे मरीजों ने HIV संक्रमितों के साथ हो रहे भेदभाव को खत्म करने, वर्षों से रुकी पेंशन को बहाल करने और स्वास्थ्य केंद्रों पर डॉक्टरों व जरूरी दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की।
इस प्रदर्शन में बेगूसराय, खगड़िया, सहरसा, मधेपुरा और सुपौल सहित कई जिलों से आए HIV संक्रमित मरीज शामिल हुए। मरीजों ने राज्य स्वास्थ्य समिति कार्यालय पहुंचकर अपनी समस्याएं अधिकारियों के सामने रखीं। उनका आरोप है कि सरकारी योजनाएं केवल कागजों तक सीमित रह गई हैं, जबकि जमीनी स्तर पर न तो समय पर पेंशन मिल रही है और न ही उचित इलाज की सुविधा उपलब्ध है।
चार साल से बंद है पेंशन
प्रदर्शन कर रहे मरीजों ने बताया कि उनकी पेंशन पिछले चार वर्षों से बंद है। वर्ष 2015 में पेंशन योजना दोबारा शुरू की गई थी, लेकिन उस समय भी केवल एक महीने की राशि ही दी गई। इसके बाद फिर से पेंशन बंद हो गई। मरीजों का कहना है कि 2025 में भी पिछले छह महीनों से उन्हें पेंशन नहीं मिली है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो गई है।
इलाज और डॉक्टरों की कमी का आरोप
HIV मरीजों ने यह भी आरोप लगाया कि कई जिलों में उनके इलाज के लिए डॉक्टर उपलब्ध नहीं हैं। कई स्वास्थ्य केंद्रों पर जरूरी एंटी रेट्रो वायरल दवाएं भी समय पर नहीं मिल पातीं, जिससे मरीजों को इलाज के लिए भटकना पड़ता है। नियमित दवाएं न मिलने से उनकी सेहत पर गंभीर असर पड़ रहा है।
सरकार से पेंशन बहाली और भेदभाव खत्म करने की मांग
मरीजों ने कहा कि समाज में पहले से ही उन्हें भेदभाव का सामना करना पड़ता है, वहीं सरकारी व्यवस्था की उदासीनता उनकी मुश्किलें और बढ़ा रही है। उन्होंने मांग की कि पेंशन को जल्द बहाल किया जाए, उसकी राशि बढ़ाई जाए और लंबित भुगतान तुरंत किया जाए।
मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन तेज करने की चेतावनी
प्रदर्शन के दौरान HIV संक्रमित मरीजों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उनका कहना है कि यह लड़ाई सिर्फ पेंशन की नहीं, बल्कि सम्मान, इलाज और जीवन के अधिकार की है।
सरकार ने दिया आश्वासन
बिहार राज्य एड्स नियंत्रण समिति के परियोजना निदेशक सुमित कुमार ने कहा कि राज्य सरकार HIV संक्रमित मरीजों के इलाज को लेकर गंभीर है। उन्होंने बताया कि जिन जिलों के एंटी रेट्रो वायरल ट्रीटमेंट सेंटर (ARTC) में डॉक्टरों की कमी है, वहां सिविल सर्जनों के माध्यम से डॉक्टरों की प्रतिनियुक्ति सुनिश्चित की जाएगी।
पेंशन के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि यह सरकार की नीति से जुड़ा विषय है और इस संबंध में प्रस्ताव भेजने की अनुशंसा की जाएगी। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि HIV मरीजों के साथ किसी भी तरह का भेदभाव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि भेदभाव की शिकायत मिलती है तो दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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