रांची के बड़गाईं की 8.86 एकड़ जमीन से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की ओर से दाखिल याचिका पर मंगलवार, 29 सितंबर को झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई होगी. चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस मनोज प्रसाद की खंडपीठ पहले यह देखेगी कि सोरेन की ओर से दाखिल क्रिमिनल रिट याचिका इस स्तर पर सुनवाई योग्य है या नहीं.
हेमंत सोरेन ने विशेष पीएमएलए अदालत के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें जांच पूरी होने तक उनके खिलाफ आरोप गठन की प्रक्रिया टालने की मांग खारिज कर दी गई थी. सोरेन की दलील है कि मनी लॉन्ड्रिंग का मामला जिस मूल अपराध से जुड़ा है, उसकी जांच और कार्यवाही का असर इस मामले पर भी पड़ता है. ऐसे में जांच पूरी होने तक आरोप गठन की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़नी चाहिए.
हालांकि, हाईकोर्ट आज सीधे मामले के आरोपों की मेरिट पर सुनवाई नहीं करेगा. सबसे पहले यह तय होना है कि निचली अदालत के आदेश के खिलाफ दाखिल यह क्रिमिनल रिट याचिका इस रूप में सुनवाई योग्य है या नहीं.
30 सितंबर को PMLA कोर्ट में आरोप गठन पर सुनवाई
इस मामले में विशेष पीएमएलए अदालत ने आरोप गठन के लिए 30 सितंबर की तारीख तय कर रखी है. 24 सितंबर को हेमंत सोरेन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेश हुए थे. उन्होंने केस से जुड़े दस्तावेजों को देखने के लिए समय मांगा था. इसके बाद अदालत ने उन्हें छह दिन का समय देते हुए अगली सुनवाई 30 सितंबर तय की थी.
मामले में 16 अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए जा चुके हैं. हेमंत सोरेन के खिलाफ आरोप गठन की प्रक्रिया अभी बाकी है. अब 30 सितंबर को अदालत इस मामले में आगे की कार्यवाही करेगी.
यह मामला रांची के बड़गाईं अंचल की करीब 8.86 एकड़ जमीन से जुड़ा है. ईडी के मुताबिक, इस जमीन से जुड़े रिकॉर्ड में हेरफेर, फर्जी दस्तावेज और जमीन पर कथित अवैध कब्जे से जुड़े आरोपों की जांच की गई है. इसी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी ने हेमंत सोरेन समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है.
इस मामले में 18 सितंबर को भी हाईकोर्ट में सुनवाई हुई थी. तब अदालत ने PMLA कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगाने की मांग को खारिज कर दिया था. यानी 29 सितंबर की सुनवाई का सीधा सवाल यह है कि सोरेन की नई क्रिमिनल रिट याचिका सुनवाई योग्य है या नहीं.

