जीएसटी के तहत माल ढुलाई करने वालों के लिए बड़ा अपडेट है. एक जनवरी 2027 से ई-वे बिल (E-Way Bill) का नंबरिंग सिस्टम बदलने जा रहा है. अब तक 12 अंकों में जारी होने वाला ई-वे बिल नए साल से 14 अंकों का होगा. वहीं, कंसोलिडेटेड ई-वे बिल का नंबर भी 10 से बढ़ाकर 11 अंकों का किया जाएगा.
दरअसल, देश में ई-वे बिल की संख्या लगातार बढ़ रही है. ऐसे में मौजूदा नंबरिंग सिस्टम की क्षमता भविष्य में कम पड़ सकती है. इसी को देखते हुए जीएसटी ने नंबरिंग का नया फॉर्मेट तैयार किया है. इसका मकसद बढ़ती जरूरतों के हिसाब से सिस्टम को अपडेट करना और ई-वे बिल जारी करने की प्रक्रिया को बिना रुकावट जारी रखना है.
सिर्फ नंबर नहीं, सॉफ्टवेयर भी करना होगा अपडेट
इस बदलाव का असर कारोबारियों से लेकर जीएसटी से जुड़े टेक्निकल प्लेटफॉर्म तक पड़ेगा. करदाताओं, GST सुविधा प्रदाताओं (GSP), ERP सॉफ्टवेयर कंपनियों और API इंटीग्रेटर्स को अपने सिस्टम में जरूरी बदलाव करने होंगे.
इसके लिए एप्लिकेशन, API, डेटाबेस और नंबरों की वैलिडेशन व्यवस्था को नए फॉर्मेट के अनुसार अपडेट करना होगा. अगर समय रहते सिस्टम अपडेट नहीं किया गया, तो नई व्यवस्था लागू होने के बाद ई-वे बिल जनरेट करने और उससे जुड़े कामकाज में तकनीकी दिक्कतें आ सकती हैं.
नए सिस्टम की टेस्टिंग का भी मिलेगा मौका
जीएसटी की ओर से नए नंबरिंग फॉर्मेट को लागू करने से पहले टेस्टिंग की सुविधा भी दी जाएगी. इसके लिए ई-वे बिल पोर्टल के सैंडबॉक्स एनवायरनमेंट में बदलाव जारी किए जाएंगे. साथ ही तकनीकी गाइडलाइन भी उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि कंपनियां और कारोबारी पहले से अपने सिस्टम की जांच कर सकें.
सभी संबंधित पक्षों को 1 जनवरी 2027 से पहले जरूरी बदलाव और टेस्टिंग पूरी करने की सलाह दी गई है. यानी कारोबारियों और टेक्नोलॉजी कंपनियों के पास नए सिस्टम के लिए तैयारी करने का समय है. नए साल से ई-वे बिल की पहचान 14 अंकों से होगी, इसलिए पुराने नंबरिंग फॉर्मेट पर निर्भर सिस्टम को अपडेट करना जरूरी होगा.


