Close Menu
Johar LIVE
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Johar LIVEJohar LIVE
    • होम
    • JPSC / JSSC
    • क्राइम
    • राजनीति
    • बिजनेस
    • झारखंड
    • आदिवासी
    • बिहार
    • स्वास्थ्य
    • पर्यावरण
    • स्पेशल स्टोरी
    • खेल-सिनेमा
    • होम
    • JPSC / JSSC
    • क्राइम
    • राजनीति
    • बिजनेस
    • झारखंड
    • आदिवासी
    • बिहार
    • स्वास्थ्य
    • पर्यावरण
    • स्पेशल स्टोरी
    • खेल-सिनेमा
    Johar LIVE
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Home»जोहार ब्रेकिंग»गद्दारी से विष पीने तकः इंडिया गठबंधन में समीक्षा की धमकी की उम्र क्या है? 
    जोहार ब्रेकिंग

    गद्दारी से विष पीने तकः इंडिया गठबंधन में समीक्षा की धमकी की उम्र क्या है? 

    Muskan ChoudharyBy Muskan ChoudharyJuly 9, 2026Updated:July 9, 2026No Comments6 Mins Read6
    Share Facebook Twitter Telegram WhatsApp Email Copy Link
    Share
    Facebook Twitter Telegram WhatsApp Email Copy Link

    किसलय शानू

    24 नवंबर 2024. झारखंड में बीते 24 सालों में हुए विधानसभा चुनावों में गिनती के बाद इस दिन किसी भी गठबंधन की अब तक की सबसे बड़ी सफलता थी. भाजपा के हैवीवेट शिवराज सिंह चौहान और हिमंता विश्व सरमा को चुनावी कमान सौंपे जाने और बाबूलाल मरांडी की भाजपा में घर वापसी के बाद हुए चुनाव में भाजपा 2009 के बाद हुए किसी भी चुनाव में सबसे कम, महज 21 सीटों पर सिमट चुकी थी.

    झारखंड में इंडिया गठबंधन ने एकजुटता के कारण 56 सीटें जीतीं. इस बड़ी जीत के बाद, लगातार दूसरी बार इंडिया गठबंधन की सरकार बनी. लेकिन उस दिन के बाद से अब तक झारखंड में झामुमो, कांग्रेस व राजद के रिश्तों में कई बार तनाव आए. अंदर की नाराजगी खुले तौर पर सामने आयी. गठबंधन की समीक्षा किए जाने और भाजपा के साथ झामुमो की नजदीकियों की आहट अक्सर राजनीतिक हल्कों में चर्चा में रही.

    इंडिया गठबंधन के दल समान्य मौकों पर एक साथ जरूर नजर आते हैं, लेकिन राजनीति में जब बड़े मौके आते हैं, गठबंधन में दरार जग जाहिर हो जाती है. जाहिर है, झारखंड में इंडिया गठबंधन में सबकुछ समान्य तो नहीं ही है.

    बिहार में 2025 के विधानसभा चुनाव के दौरान झामुमो ने 20 से अधिक सीटों पर दावेदारी की. लेकिन कांग्रेस व राजद, अपने सहयोगी झामुमो को एक भी सीट देने के लिए तैयार नहीं हुई. झामुमो ने गीयर बदला और छह सीटों पर उम्मीदवार देने का फैसला किया. लेकिन निर्णय को फोर्थ गीयर से सीधे बैक गीयर में डाल दिया गया. अक्टूबर 20 को नामांकन के आखिरी दिन झामुमो बिहार में किसी भी सीट पर प्रत्याशी नहीं दे पायी.

    बजाय प्रत्याशी न दे पाने के कारणों को बताए, जेएमएम के वरीष्ठ रणनीतिकार और मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा, “बहुत ही अफ़सोस के साथ झारखंड मुक्ति मोर्चा यह कहने को बाध्य है कि जेएमएम इस बार बिहार विधानसभा के चुनाव में भाग नहीं ले रही है. झारखंड मुक्ति मोर्चा जैसा एक बड़ा राजनीतिक संगठन बिहार के चुनाव में भागीदारी नहीं कर पा रहा है. इसके लिए हम आरजेडी को दोषी मानते हैं और साथ ही गठबंधन धर्म का पालन नहीं करने के लिए सहयोगी कांग्रेस को भी दोषी मानते हैं. ये तय है कि बिहार चुनाव के बाद गठबंधन की समीक्षा होगी.

    राजनीति में तत्काल कुछ नहीं होता है. हालांकि यहां तत्काल क्या, बाद में भी कुछ नहीं हुआ. लड़ाई बस मनोवैज्ञानिक लाभ लेने तक सिमित रहा. जेएमएम यह लाभ लेकर बीति ताहि बिसार दे, आगे की सुधि ले का मूलमंत्र अपनाते हुए, आगे बढ़ गई.

    विषैला सांप और दोस्ती

    समीक्षा का माहौल फिर बना. बिहार चुनाव के बाद झामुमो असम चुनाव के दौरान आरपार के मूड में आयी. मंत्री चमरा लिंडा के महीनों की असम यात्रा, स्थानीय संगठनों से बात, टोह, संभावनाओं को तलाशने के बाद निर्णय लिया कि वो अकेले चुनाव लड़ेगी. तीर के कमान पर चढ़ते ही कांग्रेस का प्रत्यंचा चढ़ गया.

    नजाकत से मौके को संभालने के लिए असम में कांग्रेस की तरफ से सीएम पद के उम्मीदवार गौरव गोगोई 12 मार्च 2026 को रांची आए. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात कर गठबंधन के तहत चुनाव लड़ने का ऑफर दिया. लेकिन इस बार झामुमो मुस्कुरा रही थी. परिणाम का अंदाजा होने के बावजूद हठयोग करने बैठ गई.

    परिणाम ये रहा कि पहले 21 सीटों पर प्रत्याशी देने की घोषणा की, बाद में 16 सीटों पर चुनाव लड़ी. लेकिन समीक्षा के लिए माहौल बने, इसके लिए जरूरी बयान का आना बाकि था. 30 मार्च को दोपहर बाद वो संयोग भी बना और झामुमो नेता सुप्रीयो भट्टाचार्य ने कांग्रेस को विषैला सांप कह दिया.

    बयान पर कांग्रेस ने आपत्ति जतायी. पार्टी के तरफ से कहा गया कि झारखंड में जनादेश साथ लड़ने का है. इसका सम्मान किया जाना चाहिए.

    सिलसिला यहीं नहीं रुका. असम के बाद हुए पश्चिम बंगाल चुनाव में भी झामुमो ने कांग्रेस के प्रत्याशियों के खिलाफ व टीएमसी के पक्ष में प्रचार किया. एक बार फिर झारखंड में सरकार चलाने के 2024 के जनादेश का हवाला देकर दोनों पार्टियां साथ रहीं.

    गठबंधन की समीक्षा का माहौल लगातार बना रहे, इसके लिए इंडिया अलाउंस के सभी दल भरपूर मौके बनाने में जितनी कलाबाजियां हो सकती है, दिखाने से चूकते नहीं हैं. बीते राज्यसभा चुनाव के दौरान फिर गोटियां बिछी. इंडिया गठबंधन के पास 56 विधायक थे. दो सीटों पर चुनाव होना था. गणित के हिसाब से दोनों सीटें आसानी से जीती जा सकती थी.

    लेकिन थोड़ा ठहरिये, बात फिर समीक्षा की है. समीक्षा खेल का पिच फिर सबने मिलकर तैयार किया. झामुमो ने बैजनाथ राम को उतारा, जिन्हें 30 वोट मिले और वे आसानी से जीत गए. दूसरी सीट पर कांग्रेस ने झामुमो से बिना सलाह-मशविरा किए प्रणव झा को उम्मीदवार बना दिया. जिससे झामुमो नेतृत्व अंदरूनी तौर पर नाराज हो गया. पहले झामुमो ने दोनों सीटों पर उम्मीदवार उतारने का दावा किया, लेकिन फिर कांग्रेस की तरफ से प्रणव झा को प्रत्याशी बनाए जाने पर समर्थन का फैसला लिया. समर्थन होता दिखे, इसके लिए प्रणव झा के पक्ष में सीएम आवास में विधायकों की बैठक व दो बार मॉक वोटिंग का भी आयोजन किया गया.

    लेकिन एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार और उद्योगपति परिमल नाथवानी ने 28 वोट हासिल कर जीत दर्ज की. जबकि कांग्रेस के प्रणव झा महज 20 वोटों पर सिमट कर चुनाव हार गए. इस करारी हार के बाद गठबंधन में फिर से सिरफुटौव्वल शुरू हो गई है. कांग्रेस ने सहयोगियों राजद व माले पर क्रॉस वोटिंग और भीतरघात के गंभीर आरोप लगा दिए.

    कांग्रेस प्रभारी के राजू ने खुलेआम दोनों सहयोगियों पर बिक जाने और धोखा देने का आरोप लगाया तो दूसरी तरफ राजद ने कांग्रेस को सरकार से बाहर करने और कांग्रेस विधायकों और के. राजू पर ही बिके होने का आरोप लगा दिया. लेकिन इसके बाद कांग्रेस बैकफूट पर आयी. कांग्रेस नेता राधाकृष्ण किशोर ने बयान दिया कि राज्य में इंडिया गठबंधन को बरकरार रखने के लिए कांग्रेस विष पीने को तैयार है.

    तथाकथित तौर पर विष पिए हुए महीना भी नहीं हुआ, वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने अपने सुरक्षाकर्मियों को राज्य सरकार को वापस कर दिया. प्रतियोगिता परीक्षाओं में अंगिका व मगही को स्थानीय भाषा के तौर पर शामिल न किए जाने को विवाद है सो अलग.

    कुल जमा बात ये है कि ‘’कौन गद्दार, कौन नीलकंठ’’ नामक प्रहसन का सफलतापूर्वक मंचन समय-समय पर किया जा रहा है. अभिनय इतनी बारीक होती है कि दर्शक एक-एक प्रहसन को सच मान मानसिक गुत्थम-गुत्थी में लगे रहते हैं.

    झामुमो ये बेहतर जानती है कि बीजेपी के साथ जाने पर तात्कालिक लाभ भले ही मिल जाए, लंबी रेस में उनका घोड़ा मात खा जाएगा. कांग्रेस जानती है कि कुछ भी हो, सत्ता में बने रहना जरूरी है. ताकि आगामी चुनावों में पार्टी की तैयारियों के हवन कुंड में झारखंड के हिस्से का भी सरर-धूमन पड़े. इधर बीजेपी जेएमएम के साथ सटने और अकेले लड़ने के लोभ के बीच पेंडुलम बनी रहती है.

     

    Also Read : सोलर हाई मास्ट लाइट से रोशन हुए बड़कागांव के गांव, अदाणी फाउंडेशन की पहल से बदली तस्वीर

    Follow on Facebook Follow on X (Twitter) Follow on Instagram Follow on YouTube Follow on WhatsApp Follow on Telegram
    Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Telegram WhatsApp Email Copy Link
    Previous Articleबोकारो वन भूमि घोटाला मामले में बड़ा एक्शन, मुख्य आरोपी शैलेश कुमार सिंह को CID ने पटना से दबोचा
    Next Article BREAKING : रांची ACB टीम की देर रात बड़ी कार्रवाई, बुढ़मू सीओ सचिदानंद समेत तीन को दबोचा !

    Related Posts

    JPSC / JSSC

    जोहार लाइव एक्सक्लूसिवः एल ख्यांगते और अजीता भट्टाचार्य ने बेच दिया झारखंड से बाहर के लोगों को सीडीपीओ का सीट

    August 26, 2026
    जोहार ब्रेकिंग

    महिला समानता दिवस : गांव की चौपाल से खेल के मैदान तक, झारखंड की बेटियों का बढ़ता कदम

    August 26, 2026
    जोहार ब्रेकिंग

    जयराम के समर्थन में उतरे बाबूलाल मरांडी, कहा- क्या मर्यादा सिर्फ जनप्रतिनिधियों के लिए है?

    August 26, 2026
    जोहार ब्रेकिंग

    विद्यालय में पढ़ाने के दौरान शिक्षिका की मौत, एकमात्र शिक्षिका होने से था काम का दबाव

    August 25, 2026
    जोहार ब्रेकिंग

    चतरा में नाबालिग से मजदूरी और मारपीट का आरोप, महिला थाना प्रभारी और पति सस्पेंड

    August 25, 2026
    जोहार ब्रेकिंग

    झारखंडः कैबिनेट के बड़े फैसले: 100 स्कूल बनेंगे सीएम स्कूल ऑफ एक्सिलेंस, 606 थानों में लगेंगे 9006 CCTV कैमरे

    August 25, 2026
    Latest Posts

    जोहार लाइव एक्सक्लूसिवः एल ख्यांगते और अजीता भट्टाचार्य ने बेच दिया झारखंड से बाहर के लोगों को सीडीपीओ का सीट

    August 26, 2026

    महिला समानता दिवस : गांव की चौपाल से खेल के मैदान तक, झारखंड की बेटियों का बढ़ता कदम

    August 26, 2026

    जयराम के समर्थन में उतरे बाबूलाल मरांडी, कहा- क्या मर्यादा सिर्फ जनप्रतिनिधियों के लिए है?

    August 26, 2026

    विद्यालय में पढ़ाने के दौरान शिक्षिका की मौत, एकमात्र शिक्षिका होने से था काम का दबाव

    August 25, 2026

    चतरा में नाबालिग से मजदूरी और मारपीट का आरोप, महिला थाना प्रभारी और पति सस्पेंड

    August 25, 2026
    Facebook X (Twitter) Instagram
    © 2026 Johar LIVE. | About Us | AdSense Policy | Privacy Policy | Terms and Conditions | Contact Us.

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.