झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी नेता बाबूलाल मरांडी ने जयराम महतो के समर्थन में सामने आते हुए बोकारो के चास थाना प्रभारी सुषमा कुमारी से जुड़ा कथित वायरल ऑडियो शेयर किया है. ऑडियो को लेकर पुलिस एसोसिएशन और जनप्रतिनिधियों के बीच भाषा और मर्यादा को लेकर चल रही बहस पर मरांडी ने कई सवाल खड़े किए हैं.
मरांडी ने कहा कि विधानसभा सदस्य जयराम महतो और थाना प्रभारी रवि कुमार के बीच कथित हॉट-टॉक के बाद पुलिस एसोसिएशन की ओर से लेकर अलग-अलग तरह के बयान सामने आ रहे हैं. उन्होंने कहा कि भाषा, शिष्टाचार और मर्यादा हर स्थिति में बनी रहनी चाहिए, लेकिन सवाल यह है कि यह मर्यादा सिर्फ जनप्रतिनिधियों के लिए ही क्यों लागू हो?
आम जनता से पुलिस के व्यवहार पर सवाल
बाबूलाल मरांडी ने पुलिस के रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्या पुलिस एसोसिएशन ने कभी किसी ऐसे पुलिसकर्मी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की, जिसने आम आदमी से गाली-गलौज या अभद्र भाषा में बात की हो?
उन्होंने कहा कि थानों में आम लोगों के साथ कथित दुर्व्यवहार, फोन पर गाली-गलौज और अभद्र भाषा के इस्तेमाल की शिकायतें अक्सर सामने आती हैं. ऐसे में अगर जनप्रतिनिधि और पुलिस के बीच भी इस तरह की स्थिति पैदा हो रही है, तो इसके लिए सरकार की नीति और पुलिस अधिकारियों को मिल रहा कथित संरक्षण भी जिम्मेदार है.
ऑडियो रिकॉर्डिंग को लेकर भी उठाया सवाल
मरांडी ने बातचीत रिकॉर्ड कर उसे वायरल किए जाने को लेकर भी सवाल खड़े किए. उन्होंने पूछा कि क्या बिना सहमति किसी की बातचीत रिकॉर्ड कर उसे सार्वजनिक करना निजता के अधिकार का उल्लंघन नहीं है? अगर निजता के हनन को लेकर कानून है, तो क्या वह सिर्फ आम लोगों पर लागू होता है या पुलिस और दूसरे सरकारी अधिकारियों पर भी? उन्होंने कहा कि इन सवालों का जवाब देना जरूरी है.
पुराने वायरल ऑडियो का भी किया जिक्र
बाबूलाल मरांडी ने दावा किया कि कुछ महीने पहले भी बोकारो जिले के चास थाना प्रभारी का कथित गाली-गलौज वाला ऑडियो वायरल हुआ था. उन्होंने कहा कि उस समय उनकी ओर से सरकार से मामले में प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई की मांग की गई थी.
मरांडी का आरोप है कि कार्रवाई करने के बजाय सरकार ने ऐसे पुलिस अधिकारियों को संरक्षण दिया. उन्होंने कहा कि अगर आम जनता द्वारा किसी को गाली देना गलत और अपराध है, तो पुलिस को जनता के साथ अपशब्द कहने का विशेषाधिकार आखिर किसने दिया?
पुलिस को जनता से बात करने का तरीका सीखना होगा
मरांडी ने कहा कि पुलिस को सबसे पहले आम जनता से बात करने का तरीका और शिष्टाचार सीखना होगा. उन्होंने सरकार से मांग की कि ऐसे मामलों को केवल निलंबन तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई और प्राथमिकी दर्ज कराना भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि पुलिस और जनता के बीच भरोसा तभी मजबूत होगा, जब कानून सबके लिए एक समान तरीके से लागू होगा और थानों में आम लोगों के साथ सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित किया जाएगा.
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