Pakur : राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री सारथी योजना को लेकर पाकुड़ से बड़ा विवाद सामने आया है। आरोप है कि योजना के तहत संचालित JRS Technology Private Limited संस्थान ने साहिबगंज और पाकुड़ के कई गरीब छात्रों से नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों रुपये की वसूली की और बाद में उन्हें परेशान किया गया। मामले ने अब तूल पकड़ लिया है और राजनीतिक रंग भी ले लिया है। दर्जनों छात्रों ने उपायुक्त को ज्ञापन सौंपकर न्याय की मांग की है।
नौकरी और विदेश भेजने के नाम पर पैसे लेने का आरोप
पीड़ित छात्रों का आरोप है कि उन्हें प्रशिक्षण के दौरान बड़े-बड़े सपने दिखाए गए। इसी दौरान कई लोगों से अलग-अलग रकम वसूली गई। छात्रों ने आरोप लगाया है कि विशाल प्रजापति नामक व्यक्ति ने खुद को सऊदी अरब के बड़े ठेकेदार का बेटा बताकर वीजा और टिकट के नाम पर पैसे लिए। वहीं, निवेक रवानी से करीब 1,05,900 रुपये वसूले गए। इसके अलावा अन्य छात्रों से प्लेसमेंट के नाम पर 1,000 रुपये से लेकर 11,000 रुपये तक की राशि ली गई।
प्रमाण पत्र मांगने पर गाली-गलौज और धमकी का आरोप
छात्र दीपक कुमार ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जब उन्होंने प्रमाण पत्र की मांग की तो प्रोजेक्ट मैनेजर मोहम्मद आसिफ इकबाल ने उनके साथ गाली-गलौज की और कथित तौर पर धमकी भी दी। छात्रों का कहना है कि ट्रेनिंग पूरी होने के बाद भी न तो सर्टिफिकेट दिया जा रहा है और न ही नौकरी का कोई अता-पता है। पीड़ित छात्रों ने पाकुड़ उपायुक्त को आवेदन देकर पूरे मामले की जांच की मांग की है। छात्रों का कहना है कि उन्होंने मेहनत से ट्रेनिंग पूरी की, लेकिन अब उन्हें सिर्फ आश्वासन और टालमटोल मिल रही है। छात्रों के अनुसार, 17 नवंबर 2025 से शुरू हुआ तीन महीने का प्रशिक्षण 22 फरवरी 2026 को खत्म हो गया था। इसके बाद से वे लगातार प्रमाण पत्र और नौकरी को लेकर भटक रहे हैं। 18 मई को जब छात्र सेंटर पहुंचे तो वहां अभद्र व्यवहार और दुर्व्यवहार का भी आरोप लगाया गया।
राजद जिलाध्यक्ष ने दिया अल्टीमेटम
मामले की गंभीरता को देखते हुए राजद के पाकुड़ जिलाध्यक्ष महावीर मड़ैया खुद सेंटर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने संस्थान प्रबंधन से बातचीत के बाद कहा कि दो महीने के भीतर सभी लंबित परीक्षाएं पूरी कर छात्रों को राहत दी जाए। उन्होंने यह भी कहा कि अगर जांच में वसूली और धमकी के आरोप सही पाए गए तो प्रशासन और विभागीय मंत्री को पत्र लिखकर सख्त कार्रवाई की मांग की जाएगी। वहीं, JRS Technology के प्रोजेक्ट मैनेजर मोहम्मद आसिफ इकबाल खान ने सभी आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि तकनीकी कारणों से परीक्षा और प्रमाण पत्र में देरी हुई है और जल्द प्रक्रिया पूरी कर दी जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि संस्थान की छवि खराब करने के लिए गलत आरोप लगाए जा रहे हैं।
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