Ranchi : झारखंड के प्रधान मुख्य वन संरक्षक, संजीव कुमार ने आज राज्य के सभी क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक और वन प्रमंडल पदाधिकारियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए निर्देश दिए कि वन क्षेत्र में आग लगने से बचाने के लिए तुरंत और ठोस कदम उठाए जाएं। उन्होंने साफ कहा कि वनों की सुरक्षा अब सर्वोच्च प्राथमिकता है।
फरवरी से मानसून तक अग्नि का खतरा ज्यादा
श्री कुमार ने बताया कि वन क्षेत्रों में आग लगने की घटनाएं आम तौर पर फरवरी से मानसून आने तक होती हैं। इस दौरान भारत सरकार के आपदा प्रबंधन विभाग, वन विभाग और स्थानीय ग्रामीणों को मिलकर सक्रिय रहना होगा। उनका जोर इस बात पर था कि जनता का सहयोग हासिल करना बेहद जरूरी है।
जिला और रेंज स्तर पर कंट्रोल रूम होंगे सक्रिय
प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने सभी जिलों को जिला एक्शन प्लान बनाने का निर्देश दिया। इसके अलावा हर जिले और रेंज स्तर पर 24 घंटे काम करने वाले कंट्रोल रूम बनाने को कहा गया। उन्होंने टोल फ्री नंबर जारी करने की योजना भी साझा की, ताकि ग्रामीण, मुखिया, वनवासी और छात्र सीधे जुड़ सकें और अग्नि जैसी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई हो सके।
तकनीक और आधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल जरूरी
संजय कुमार ने अधिकारियों को बताया कि तकनीक का पूरा उपयोग करें। ड्रोन, सैटेलाइट अलार्म सिस्टम और अन्य उपकरणों का प्रयोग करके जंगल की निगरानी की जाए। इसके साथ ही जल भंडारण, अग्निशमन विभाग और जिला प्रशासन से लगातार संपर्क बनाए रखें। जितनी जल्दी सूचना मिलेगी, उतनी तेजी से आग पर काबू पाया जा सकेगा।
जनता को भी करें जागरूक
प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने कहा कि जनता को भी आग से बचाव के लिए जागरूक करना जरूरी है। जंगल में सिगरेट या बीड़ी जलाना, आग लगाना, ये सब नुकसानदायक हैं। इसके लिए नुक्कड़ नाटक और अन्य स्थानीय माध्यमों से लोगों को शिक्षित किया जाए।
साफ-सफाई और अलर्ट मोड
सभी वन प्रमंडल पदाधिकारियों को सूखी पत्तियों की नियमित सफाई करने, वन आग रेखा पर काम करने और अलर्ट मोड में रहने की हिदायत दी गई। इस वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग बैठक में वन संरक्षक प्रशासन श्री पी आर नायडू, वन संरक्षक वी एस दुबे और राज्य भर के अधिकारी मौजूद थे।
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