Ranchi : आईआईएम रांची ने MBA छात्रों के लिए एक अनोखा पाठ्यक्रम शुरू किया है, जिसमें छात्रों को किताबों की बजाय फिल्मों के जरिए लीडरशिप, बिजनेस मैनेजमेंट, ग्लोबलाइजेशन, क्रॉस कल्चर मैनेजमेंट और रिस्क लेने जैसी महत्वपूर्ण स्किल्स सिखाई जाएंगी।
संस्था के प्रोफेसर डॉ. विकास के अनुसार, आज के डिजिटल युग में छात्र किताबों की तुलना में डिजिटल माध्यमों से अधिक सीखना पसंद करते हैं। उन्होंने कहा कि सिनेमा एक ऐसा प्रभावी माध्यम है, जिससे छात्र आसानी से और रुचि के साथ सीख सकते हैं।
सिनेमा से पढ़ाई: किताबों से ज्यादा रोमांचक
डॉ. विकास ने बताया कि फिल्में कठिन विषयों को आसान और रोचक बना देती हैं। उदाहरण के तौर पर फिल्म ‘गुरु’ के जरिए यह दिखाया जाता है कि कैसे एक छोटे गांव का लड़का बड़े बिजनेस साम्राज्य की नींव रखता है। इस फिल्म से छात्रों को रिस्क लेने, चुनौतियों का सामना करने और बिजनेस में खुद को स्थापित करने जैसे पहलुओं को समझने में मदद मिलती है।
एक दृश्य, कई कहानियां
इस कोर्स की खासियत यह है कि एक ही फिल्म सीन पर अलग-अलग छात्रों की अलग राय होती है। इससे छात्रों को यह समझने में मदद मिलती है कि एक ही स्थिति को लोग अलग-अलग तरीके से कैसे देखते हैं। क्लास में इस प्रक्रिया से हेल्दी डिस्कशन भी होता है।
खास फिल्मों का चयन
कोर्स में इस्तेमाल होने वाली फिल्में पहले से तय सूची के आधार पर चयनित की जाती हैं।
- ‘चक दे इंडिया’ से छात्रों को लीडरशिप की सीख दी जाती है।
- द फाउंडर से बिजनेस स्ट्रेटजी सिखाई जाती है
- द लंच बॉक्स से कल्चर डाइवर्सिटी को समझाया जाता है
- ‘लगान’ फिल्म के जरिए छात्र क्रॉस कल्चर और भाषा से जुड़ी समस्याओं को समझते हैं।
डॉ. विकास ने कहा कि फिल्में देखने में तीन-चार घंटे तो लगते हैं, लेकिन किताब पढ़ने में इतनी देर ध्यान बनाए रखना मुश्किल होता है। ऐसे में सिनेमा छात्रों में सीखने की रुचि और समझ को बढ़ाता है।
आईआईएम रांची का यह प्रयास शिक्षा में डिजिटल बदलाव और अनुभव आधारित सीखने की दिशा में एक नई पहल के रूप में देखा जा रहा है।
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