Ranchi : राजधानी रांची में ट्रैफिक व्यवस्था लगातार बिगड़ती जा रही है। शहर के लगभग हर चौक-चौराहे पर ई-रिक्शा चालकों का कब्जा देखा जा रहा है, जिससे आम लोगों को रोजाना जाम और परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ट्रैफिक पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है, लेकिन अपेक्षित सुधार नजर नहीं आ रहा। शहर में ई-रिक्शा का बढ़ता दबदबा नए पार्षदों के सामने बड़ी चुनौती बनकर उभर रहा है।
ट्रैफिक पुलिस भी कर रही है मेहनत
पुलिस के मुताबिक, स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं कि कोई भी ई-रिक्शा चौक-चौराहे से कम से कम 50 मीटर दूर ही खड़ा किया जाए। लेकिन अधिकांश चालक इन निर्देशों की परवाह नहीं करते। व्यस्त समय में-सुबह ऑफिस जाने और शाम को बाजार बंद होने के समय—स्थिति और गंभीर हो जाती है। ट्रैफिक पुलिसकर्मी सुबह से रात तक जाम हटाने में लगे रहते हैं, लेकिन ई-रिक्शा चालकों की मनमानी के कारण समस्या जस की तस बनी रहती है। प्रतिदिन करीब 25–30 ई-रिक्शा चालान कट रहे हैं, लेकिन असर नजर नहीं आ रहा।
नियमों के बावजूद मनमानी जारी
नियमों का उल्लंघन करने पर प्रति वाहन 650 रुपये का जुर्माना है, फिर भी चालक नियमों की अवहेलना कर रहे हैं। नगर निगम का चुनाव भी होने वाला है, नए पार्षदों के लिए यह ट्रैफिक सुधारने की बड़ी चुनौती होगी। समस्या सिर्फ चौक-चौराहों तक ही सीमित नहीं। कई चालक सड़क पर कहीं भी अचानक वाहन रोककर सवारी उतारते और बैठाते हैं, जिससे पीछे चल रहे वाहनों की रफ्तार ठहर जाती है और लंबी कतारें लग जाती हैं। इससे ट्रैफिक जाम बढ़ता है और दुर्घटना की संभावना भी बढ़ जाती है।
आधे से ज्यादा वाहन अनरजिस्टर्ड
डीटीओ कार्यालय के आंकड़ों के अनुसार, रांची में लगभग 6,000 ई-रिक्शा पंजीकृत हैं, जबकि 12,000 से अधिक वाहन सड़कों पर दौड़ रहे हैं। यानी आधे से ज्यादा वाहन बिना वैध पंजीकरण के चल रहे हैं। इसके अलावा नियम के तहत चालक को निर्धारित ड्रेस पहनना अनिवार्य है, लेकिन अधिकांश चालक बिना ड्रेस ही वाहन चलाते हैं। पहचान और अनुशासन की कमी व्यवस्था को और अव्यवस्थित बना रही है।
जनता कहती है: सख्ती हो, तो सुधार संभव
लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन बिना पंजीकरण वाले ई-रिक्शा पर रोक लगाए और नियमों का सख्ती से पालन कराए, तो जाम की समस्या काफी हद तक कम हो सकती है। स्थायी समाधान की जरूरत है ताकि रांची की सड़कें सुचारू रूप से चल सकें।
एक्सपर्ट का व्यू: दुर्घटनाओं का खतरा
रिटायर्ड कार्यपालक अभियंता प्रमोद कुमार जयसवाल का कहना है कि अनियंत्रित ई-रिक्शा शहर की ट्रैफिक व्यवस्था को चरमरा रहे हैं। हर दस कदम पर ई-रिक्शा रुकते और चलते दिखाई देते हैं, जिससे जाम और दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ती है। उनके मुताबिक, बिना संकेत दिए अचानक रुकना, गलत दिशा में वाहन मोड़ना और सवारी के लिए कहीं भी खड़ा होना आम बात हो गई है। यह न केवल अन्य वाहन चालकों के लिए परेशानी है, बल्कि पैदल चलने वालों की सुरक्षा के लिए भी खतरा है।
समाधान का सुझाव
प्रमोद जयसवाल ने प्रशासन से कहा कि यदि ट्रैफिक नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए और ई-रिक्शा के लिए निर्धारित स्टैंड और रूट तय किए जाएं, तो सुधार संभव है। साथ ही उन्होंने सुझाव दिया कि चालक प्रशिक्षण और जागरूकता अभियान चलाए जाएं ताकि वे सड़क सुरक्षा नियमों को समझें और उनका पालन करें। प्रशासन को ठोस नीति बनाकर उसका कड़ाई से पालन सुनिश्चित करना चाहिए, ताकि आम नागरिक सुरक्षित रहें और ट्रैफिक सुचारू रूप से चले।
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