विजय उरांव, रांची
प्राकृतिक खूबसूरती, समृद्ध आदिवासी संस्कृति और पारंपरिक जीवनशैली के लिए पहचानी जाती है. असम के करबी आंगलोंग और दीमा हसाओ जिलों में ट्राइबल टूरिज्म को बड़े स्तर पर विकसित करने की अपार संभावनाएं हैं. इन इलाकों में आदिवासी संस्कृति, लोक परंपराओं, हस्तशिल्प, खान-पान और प्राकृतिक पर्यटन को बढ़ावा दिया जा सकता है. जिससे स्थानीय समुदायों के लिए रोजगार और आजीविका के नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं.
इसको लेकर असम के दिफू से लोकसभा सांसद अमर टिस्सो ने सरकार से सवाल (Q.N. 215) किया था कि क्या क्या करबी आंगलोंग और दीमा हसाओ जिलों को कवर करते हुए एक समर्पित Tribal Tourism Circuit विकसित करने की योजना है और क्या इस संबंध में असम सरकार या संबंधित Autonomous Councils की ओर से कोई प्रस्ताव केंद्र को भेजा गया है.
जिस पर पर्यटन मंत्रालय ने 3 अगस्त को लोकसभा में सांसद अमरसिंग टिस्सो के सवाल के जवाब में कहा कि केंद्र सरकार के पास इन दोनों जिलों को जोड़कर कोई Dedicated Tribal Tourism Circuit विकसित करने का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है.
कई योजनाओं के द्वारा पर्यटन के लिए वित्तीय सहायता
पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि पर्यटन स्थलों की पहचान, विकास और प्रचार मुख्य रूप से संबंधित राज्य सरकार या केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन की जिम्मेदारी है. उन्होने कहा कि केंद्र सरकार हालांकि स्वदेश दर्शन, स्वदेश दर्शन 2.0, चैलेज बेस्ड डेस्टिनेशन डेवेलपमंट (CBDD) और PRASHAD जैसी योजनाओं के जरिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पर्यटन बुनियादी ढांचे के विकास के लिए वित्तीय सहायता देती है.
मंत्रालय ने साफ किया कि करबी आंगलोंग और दीमा हसाओ जिलों से जुड़ा कोई विशेष प्रस्ताव फिलहाल पर्यटन मंत्रालय के पास विचाराधीन नहीं है. हालांकि, राज्य सरकार या ऑटोनोमस काउंसिल के माध्यम से प्रस्ताव भेजने की प्रक्रिया लगातार जारी रहती है. किसी परियोजना को मंजूरी योजना के दिशा-निर्देशों, Detailed Project Report (DPR), फंड की उपलब्धता और सरकार की प्राथमिकताओं के आधार पर दी जाती है.
Ropeway और Eco-Resort के लिए अलग केंद्रीय योजना नहीं
केंद्र ने यह भी स्पष्ट किया कि Ropeway, Eco-Resort, Adventure Tourism और Interpretation Centres के लिए पर्यटन मंत्रालय की कोई अलग समर्पित केंद्रीय योजना नहीं है. हालांकि, ऐसे घटकों को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए मंजूर की जाने वाली पर्यटन परियोजनाओं में शामिल किया जा सकता है. मंत्रालय ने बताया कि Eco-Tourism और Adventure Tourism को बढ़ावा देने के लिए अलग-अलग National Strategies तैयार की गई हैं.
आदिवासी क्षेत्रों में Homestay को बढ़ावा
केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 में धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत आदिवासी क्षेत्रों में Homestays के विकास की पहल शुरू की है. यह पहल स्वदेश दर्शन 2.0 का हिस्सा है. इसका उद्देश्य Community-Based Tourism को बढ़ावा देने के साथ आदिवासी क्षेत्रों में स्थानीय लोगों के लिए टिकाऊ आजीविका के अवसर पैदा करना है. इसके तहत पांच राज्यों में कुल ₹17.52 करोड़ की पांच परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है.
असम में पहले से कई पर्यटन परियोजनाएं मंजूर
पर्यटन मंत्रालय के अनुसार, असम में स्वदेश दर्शन योजना के तहत मानस प्रोबितोरा नामेरी काजिरंगा डिब्रू सैखोवा वाइल्ड लाइफ सर्किट (Manas–Probitora–Nameri–Kaziranga–Dibru–Saikhowa Wildlife Circuit) के विकास के लिए ₹94.68 करोड़ और तेजपुर मजूली सिबसागर हेरिटेज सर्किट (Tezpur–Majuli–Sibsagar Heritage Circuit) के लिए ₹90.98 करोड़ मंजूर किए गए हैं.
वहीं, स्वदेश दर्शन 2.0 के तहत कोकराझार वेटलैंड एक्सपेरिएंस (Kokrajhar Wetland Experience) के लिए ₹26.68 करोड़ और जोरहाट के सिन्नेमारा टी प्रोटेस्ट (Cinnamara Tea Estate) के विकास के लिए ₹23.88 करोड़ की परियोजनाएं स्वीकृत हैं.
इसके अलावा, चैलेंज बेस्ड डेस्टिनेशन डेवलपमेंट के तहत सिवासागर के Panidhing Bird Sanctuary के लिए ₹9.99 करोड़ और PRASHAD योजना के तहत कामाख्या मंदिर और आसपास के तीर्थ क्षेत्र के विकास के लिए ₹29.80 करोड़ मंजूर किए गए हैं.
Also Read : संसद में आदिवासी: क्या खत्म होने के कगार पर पहुंच चुकी है लद्दाख की चांगपाओं?

