Palamu : लैंगिक अपराध से जुड़े मामलों में अब पुलिस सख्ती के मूड में है। पलामू रेंज के डीआईजी किशोर कौशल खुद इन केसों की समीक्षा कर रहे हैं। पलामू, गढ़वा और लातेहार के अलग-अलग पुलिस अनुमंडल में जाकर केसों की स्थिति देखी जा रही है।
60 दिन में चार्जशीट जरूरी, फिर भी हो रही देरी
दुष्कर्म और पॉक्सो जैसे गंभीर मामलों में नियम है कि 60 दिनों के अंदर चार्जशीट दाखिल हो जाए। लेकिन कई केसों में जांच धीमी पड़ी है और समय पर चार्जशीट नहीं दाखिल हो पा रही है। इसी वजह से अब इस पर खास ध्यान दिया जा रहा है।
गढ़वा-लातेहार आगे, पलामू पीछे
आंकड़ों पर नजर डालें तो गढ़वा और लातेहार में करीब 70 प्रतिशत मामलों में समय पर चार्जशीट दाखिल हो रही है, जबकि पलामू में यह आंकड़ा करीब 60 प्रतिशत है। इसे सुधारने के लिए अब लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है।
90 प्रतिशत का रखा गया लक्ष्य
डीआईजी किशोर कौशल ने साफ कर दिया है कि अब लक्ष्य 90 प्रतिशत से ज्यादा केसों में समय पर चार्जशीट दाखिल करने का है। पूरे झारखंड में अभी यह औसत करीब 60 प्रतिशत है, जिसे बेहतर करना जरूरी माना जा रहा है।
लापरवाही पर कार्रवाई तय
डीआईजी ने साफ कहा है कि जिन अधिकारियों ने जांच में लापरवाही बरती है, उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। हर पुलिस अनुमंडल में केसों की समीक्षा की जाएगी और सुधार के निर्देश दिए जाएंगे।
5 अधिकारियों को शोकॉज नोटिस
समीक्षा की शुरुआत मेदिनीनगर पुलिस अनुमंडल से की गई, जहां जांच में लापरवाही सामने आई। टाउन थाना प्रभारी, चैनपुर थाना प्रभारी समेत कुल 5 पुलिसकर्मियों को शोकॉज नोटिस जारी किया गया है। उनसे जवाब मांगा गया है कि समय पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
अन्य राज्यों से तुलना, सुधार की कोशिश
बताया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में ऐसे मामलों में चार्जशीट दाखिल करने का औसत 90 प्रतिशत के करीब है। इसी को ध्यान में रखते हुए पलामू रेंज में भी सुधार की कोशिश तेज कर दी गई है।
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