Ranchi : झारखंड हाईकोर्ट ने दो अहम मामलों की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार, पुलिस विभाग और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की कार्यप्रणाली पर कड़ा रुख अपनाया। कोर्ट ने एसीपी लाभ से जुड़े मामले में डीजीपी को स्पष्ट चेतावनी दी है, वहीं सहायक आचार्य नियुक्ति मामले में आयोग को फटकार लगाते हुए जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
एसीपी लाभ मामले में डीजीपी को सख्त निर्देश
झारखंड पुलिस के एसीपी लाभ से जुड़े अवमानना मामले की सुनवाई जस्टिस दीपक रोशन की अदालत में हुई। इस दौरान अदालत ने राज्य सरकार और पुलिस महानिदेशक को सख्त निर्देश दिए। कोर्ट ने कहा कि चार सप्ताह के भीतर पहले दिए गए आदेश का पालन किया जाए और पुलिसकर्मियों को एसीपी लाभ दिया जाए। साथ ही यह भी साफ कर दिया कि अगर तय समय में आदेश का पालन नहीं हुआ तो डीजीपी को खुद अदालत में उपस्थित होकर जवाब देना होगा कि आदेश का पालन क्यों नहीं किया गया। यह मामला झारखंड पुलिस मेंस एसोसिएशन की ओर से दायर याचिका से जुड़ा है, जिसमें एसीपी लाभ देने की मांग की गई है।
पहले के आदेश का पालन नहीं होने पर नाराजगी
बताया गया कि इससे पहले एकल पीठ ने राज्य सरकार को पुलिसकर्मियों को एसीपी लाभ देने का निर्देश दिया था। लेकिन आदेश का अनुपालन नहीं होने पर मामला अवमानना याचिका तक पहुंच गया। कोर्ट ने इस देरी पर नाराजगी जताई और साफ किया कि अदालत के आदेशों को हल्के में नहीं लिया जा सकता।
सहायक आचार्य नियुक्ति मामले में JSSC को फटकार
दूसरे मामले की सुनवाई जस्टिस आनंद सेन की अदालत में हुई, जिसमें सहायक आचार्य नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर याचिका पर सुनवाई हुई। अदालत ने झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) को कड़ी फटकार लगाई और जल्द से जल्द जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। साथ ही कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि संबंधित पद पर एक सीट आरक्षित रखी जाए, ताकि मामले का अंतिम निर्णय प्रभावित न हो।
दो टीईटी प्रमाणपत्र को लेकर विवाद
मामले में याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि उनके पास दो टीईटी प्रमाणपत्र हैं। 2013 में उन्होंने 60 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल किए थे, जबकि 2016 में उनके अंक इससे कम थे। आरोप है कि आयोग ने 2016 के प्रमाणपत्र को आधार बनाकर उन्हें दस्तावेज सत्यापन के बावजूद नियुक्ति से वंचित कर दिया।
TET नियमों में बदलाव पर भी उठे सवाल
अदालत को यह भी बताया गया कि पहले टीईटी प्रमाणपत्र की वैधता पांच साल थी, जिसे 2022 में आजीवन मान्य कर दिया गया। याचिकाकर्ता का कहना है कि अधिक अंक होने के बावजूद उन्हें चयन सूची से बाहर कर दिया गया, जो नियमों के विपरीत है।
अदालत ने मांगा स्पष्ट जवाब
कोर्ट ने JSSC से इस पूरे मामले में स्पष्ट जवाब दाखिल करने को कहा है। साथ ही संकेत दिया है कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और नियमों का पालन हर हाल में जरूरी है।
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