Ranchi : झारखंड में वोटर लिस्ट को एकदम सही और अपडेटेड बनाने के लिए SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण का काम शुरू हो गया है. इसके तहत बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) घर-घर जाकर फॉर्म बांट रहे हैं और लोगों की जानकारी की जांच कर रहे हैं. इसी कड़ी में सीएम हेमंत सोरेन ने भी रांची के कांके रोड स्थित अपने सरकारी आवास पर खुद एन्यूमरेशन (गणना) फॉर्म भरा और इसे जमा किया. सीएम के साथ उनकी पत्नी और विधायक कल्पना सोरेन ने भी अपना फॉर्म भरा.

लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए सीएम की अपील
फॉर्म भरने के बाद सीएम ने राज्य के सभी वोटरों से अपील की कि वे तय समय के अंदर अपना SIR फॉर्म जरूर भरें. उन्होंने कहा कि वोट देने का अधिकार बचाए रखना हर नागरिक की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है. मुख्यमंत्री ने साफ किया कि एक साफ-सुथरी और सही वोटर लिस्ट ही निष्पक्ष चुनाव की बुनियाद होती है. इसलिए सभी लोग खुद भी फॉर्म भरें और अपने परिवार, पड़ोसियों और समाज के बाकी लोगों को भी इसके लिए बढ़ावा दें. यह पूरी प्रक्रिया निर्वाचन अधिकारियों की मौजूदगी में हुई. 64-हटिया विधानसभा क्षेत्र के बूथ नंबर-290 की बीएलओ ने मुख्यमंत्री और उनकी पत्नी से फॉर्म भरवाने का काम पूरा किया. इस मौके पर रांची के डीसी मंजूनाथ भजंत्री, सदर एसडीएम कुमार रजत, ईआरओ-सह-एडीएम धनंजय, उप निर्वाचन पदाधिकारी विवेक कुमार सुमन और बीएलओ वेरोनिका देवी समेत कई अधिकारी मौजूद रहे.
झारखंड में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान शुरू
सीएम हेमंत सोरेन और विधायक कल्पना सोरेन ने खुद अपना एन्यूमरेशन प्रपत्र भरकर लोकतांत्रिक प्रक्रिया में अपनी सहभागिता दर्ज कराई। मुख्यमंत्री ने सभी पात्र मतदाताओं से समय पर अपना SIR प्रपत्र भरने और मतदाता सूची को शुद्ध… pic.twitter.com/r0Y1XUNp6W— Johar Live (@joharliveonweb) July 2, 2026
क्या है SIR की पूरी प्रक्रिया
वोटर लिस्ट में गड़बड़ियों को दूर करने के लिए निर्वाचन आयोग खास प्रक्रिया SIR (Special Intensive Revision) को अपनाता है. इसके तहत बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) हर घर तक पहुंचते हैं और परिवार के सदस्यों की जानकारी वाला एक एन्यूमरेशन (गणना) प्रपत्र देते हैं. बीएलओ मौके पर ही परिवार के सदस्यों के नाम, उम्र और पते का मिलान करते हैं. इस दौरान जो युवा 18 साल के हो चुके हैं, उनके नाम जोड़े जाते हैं. वहीं, जो लोग उस जगह से कहीं और शिफ्ट हो चुके हैं या जिनकी मौत हो चुकी है, उनके नाम वोटर लिस्ट से हटाए जाते हैं. अगर किसी के नाम की स्पेलिंग, फोटो या पते में कोई गलती है, तो उसे इस प्रक्रिया के जरिए दुरुस्त किया जाता है.
किन संगठनों ने किया विरोध और क्या हैं उनके तर्क
इस अभियान को लेकर राज्य में पूरी तरह सहमति नहीं है. झारखंड के कुछ प्रमुख आदिवासी संगठनों और स्थानीय नागरिक मंचों ने इस SIR प्रक्रिया का विरोध किया है. विरोध करने वाले मुख्य संगठनों में आदिवासी छात्र संघ (ACS), झारखंड जन अधिकार महासभा, यूनाइटेड मिली फोरम, साझा कदम और कुछ संगठन शामिल हैं. इन संगठनों का इल्जाम है कि SIR की आड़ में उन लोगों के नाम भी वोटर लिस्ट में आसानी से जोड़े जा रहे हैं, जो राज्य के मूल निवासी या खतियानी नहीं हैं. संगठनों का तर्क है कि अगर बिना कड़े सत्यापन के बड़े पैमाने पर नए नाम जोड़े गए, तो इससे झारखंड की मूल आबादी और राजनीतिक संतुलन पर असर पड़ेगा. वहीं, कुछ संगठनों ने मांग की है कि नाम जोड़ने से पहले ग्राम सभाओं की इजाजत को अनिवार्य बनाया जाए, ताकि प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रहे.
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