Ranchi : राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (RIMS) में इन दिनों ब्लड बैंक में खून की भारी कमी देखने को मिल रही है। हालात ऐसे हैं कि मरीजों को सीधे रक्त उपलब्ध नहीं कराया जा रहा, बल्कि पहले उनके परिजनों से डोनर लाने को कहा जा रहा है। इसके बाद भी रक्त मिलने में छह से सात घंटे तक का समय लग रहा है।
इमरजेंसी मरीज को भी नहीं मिला तुरंत खून
रविवार को हजारीबाग से आए एक गंभीर मरीज को रिम्स के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती किया गया। डॉक्टरों ने मरीज के लिए बी पॉजिटिव ब्लड की जरूरत बताई, लेकिन ब्लड बैंक में एक भी यूनिट उपलब्ध नहीं था। मरीज के परिजन विकास सिंह ने बताया कि घंटों इधर-उधर भटकने के बावजूद खून नहीं मिल सका। उन्होंने बताया कि आखिरकार खुद डोनर की व्यवस्था करनी पड़ी। इसके बाद जांच प्रक्रिया पूरी होने में करीब सात घंटे लग गए, तब जाकर मरीज को खून चढ़ाया जा सका।
एक नहीं, कई मरीजों की यही परेशानी
यह समस्या सिर्फ एक मरीज तक सीमित नहीं है। अस्पताल के गायनी वार्ड में भर्ती एक महिला मरीज को पांच यूनिट खून की जरूरत थी। परिजनों को हर यूनिट के लिए अलग-अलग डोनर लाना पड़ा। इससे मरीज के परिवार को काफी परेशानी और तनाव का सामना करना पड़ा।
रक्तदान शिविरों की कमी बनी वजह
जानकारी के मुताबिक, पिछले कुछ समय से रक्तदान शिविरों का आयोजन कम हो गया है, जिसके कारण ब्लड बैंक में स्टॉक लगातार घटता जा रहा है। इसका सीधा असर गंभीर मरीजों पर पड़ रहा है, जिन्हें समय पर खून नहीं मिल पा रहा।
व्यवस्था पर उठने लगे सवाल
स्वास्थ्य व्यवस्था की इस स्थिति को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इमरजेंसी में मरीज को तुरंत रक्त उपलब्ध कराना प्राथमिकता होनी चाहिए, लेकिन मौजूदा व्यवस्था में मरीजों को इंतजार और परेशानी दोनों झेलनी पड़ रही है।
नियमित शिविर की जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि ब्लड बैंक को नियमित रूप से रक्तदान शिविर आयोजित करने चाहिए, ताकि पर्याप्त मात्रा में खून उपलब्ध रह सके और मरीजों को इस तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
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