भुवनेश्वर : जिस दिन देशभर में शिक्षक दिवस पर गुरुजनों के सम्मान में कार्यक्रम हो रहे हैं, उसी दिन भुवनेश्वर की सड़क पर शिक्षक अपने हक की आवाज बुलंद कर रहे हैं. गांधी मार्ग पर शिक्षकों और शिक्षा कर्मचारियों का अनिश्चितकालीन प्रदर्शन 21वें दिन भी जारी है. प्रदर्शनकारी शिक्षक सरकार से अपनी वर्षों पुरानी मांगों को पूरा करने की मांग कर रहे हैं.
शिक्षकों की प्रमुख मांगों में असिस्टेड संस्थानों को Grant-in-Aid (GIA), पेंशन और रिटायरमेंट बेनिफिट, खाली पदों पर नियुक्ति, सेवानिवृत्ति की उम्र 60 से बढ़ाकर 62 वर्ष करना और 7वें वेतन आयोग का लाभ शामिल है.
‘सरकार से उम्मीद थी, लेकिन सुनवाई नहीं हुई’
प्रदर्शन में शामिल एक शिक्षक ने कहा कि BJP सरकार के सत्ता में आने के बाद उन्हें उम्मीद थी कि उनकी मांगों पर फैसला होगा. लेकिन अब तक सरकार की ओर से उनकी मांगों पर कोई ठोस पहल नहीं हुई है. शिक्षक ने कहा कि 194 स्कूलों को Grant-in-Aid दिया जाना चाहिए और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार सेवानिवृत्त शिक्षकों को पेंशन का लाभ मिलना चाहिए.
उन्होंने खाली पदों को भरने की भी मांग की. उनका कहना है कि शिक्षकों की कमी के कारण संस्थानों के संचालन में परेशानी हो रही है और इसका सीधा असर छात्रों की पढ़ाई पर पड़ रहा है.
‘सालों से पढ़ा रहे, फिर भी लाभ से बाहर’
OSCTECC प्रतिनिधि सुबाश चंद्र दास ने कहा कि शिक्षक वर्षों से छात्रों की शैक्षणिक जरूरतें पूरी कर रहे हैं, लेकिन उन्हें पहले के Grant-in-Aid आदेशों और नीतियों के दायरे से बाहर रखा गया. उनकी मांग है कि ऐसे शिक्षकों को GIA और पेंशन जैसी सुविधाएं दी जाएं. उन्होंने कहा कि खाली पदों पर नियुक्तियां की जाएं और रिटायरमेंट की उम्र 60 से बढ़ाकर 62 साल की जाए.
‘Teachers में भी भेदभाव खत्म हो’
एक अन्य शिक्षक ने कहा कि Teachers Day शिक्षण समुदाय के लिए बेहद महत्वपूर्ण दिन है. सरकार जब ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ और ‘वन नेशन, वन आइडेंटिटी’ की बात करती है, तो शिक्षकों के बीच भी भेदभाव नहीं होना चाहिए. शिक्षकों की मांग है कि 194 हाई स्कूलों को Grant-in-Aid सिस्टम में शामिल किया जाए या फिर एडेड स्कूलों की तर्ज पर उन्हें वित्तीय सहायता दी जाए. साथ ही सेवानिवृत्त शिक्षकों को पेंशन देने की मांग भी दोहराई गई.
महिला शिक्षक बोलीं- सरकार नहीं सुनेगी तो कौन सुनेगा?
प्रदर्शन में शामिल महिला शिक्षक सुरमा पटेल ने सरकार से उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करने की अपील की. उन्होंने कहा कि शिक्षक अपनी मांगों को लेकर लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं. सरकार को उनकी परेशानी समझनी चाहिए और समाधान की दिशा में कदम उठाना चाहिए.
