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    Home»झारखंड»रांची विवि के लॉ इंस्टीट्यूट में नए दाखिलों पर रोक, हाई कोर्ट ने मांगी रिपोर्ट
    झारखंड

    रांची विवि के लॉ इंस्टीट्यूट में नए दाखिलों पर रोक, हाई कोर्ट ने मांगी रिपोर्ट

    Team JoharBy Team JoharMarch 21, 2026Updated:March 21, 2026No Comments3 Mins Read6
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    हाईकोर्ट
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    Ranchi : रांची विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ लीगल स्टडी (ILS) में नए शैक्षणिक सत्र के दाखिलों पर झारखंड हाई कोर्ट ने रोक लगा दी है। यह आदेश हाई कोर्ट के जस्टिस आनंद सेन की अदालत में शुक्रवार को हुई सुनवाई के बाद दिया गया। मामले की अगली सुनवाई 1 अप्रैल को होगी।

    याचिका पर हुई सुनवाई

    यह मामला प्रार्थी अंबेश कुमार चौबे और अन्य की ओर से दाखिल याचिका से जुड़ा है। सुनवाई के दौरान अदालत को संस्थान की मान्यता और व्यवस्था से जुड़ी कई गंभीर कमियों की जानकारी दी गई।

    हाई कोर्ट का सख्त निर्देश

    अदालत ने रांची विश्वविद्यालय को आदेश दिया है कि वह कॉलेज की सभी व्यवस्थाओं को दुरुस्त कर विस्तृत रिपोर्ट कोर्ट में पेश करे। कोर्ट ने साफ कहा कि मौजूदा स्थिति में नए दाखिलों की अनुमति नहीं दी जा सकती।

    बार काउंसिल के निर्देशों की अनदेखी

    अधिवक्ता अनूप अग्रवाल ने अदालत को बताया कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया की ओर से कई बार संस्थान को जरूरी सुधार करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन अब तक उनका पालन नहीं हुआ है।

    मान्यता पर मंडराया संकट

    बताया गया कि बार काउंसिल ने कॉलेज को छह महीने का समय दिया है कि सभी खामियां दूर की जाएं, वरना मान्यता रद्द हो सकती है। इससे छात्रों के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई है।

    शिक्षकों और सुविधाओं की कमी

    कोर्ट में यह भी बताया गया कि संस्थान में जरूरी स्थायी शिक्षकों की भारी कमी है। नियम के अनुसार कम से कम 10 स्थायी प्रोफेसर होने चाहिए, लेकिन यहां अंशकालिक शिक्षकों के सहारे पढ़ाई चल रही है। इसके अलावा लाइब्रेरी, खेल मैदान और अन्य बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव बताया गया।

    प्रिंसिपल पद पर भी सवाल

    मामले में यह भी कहा गया कि कॉलेज में प्रिंसिपल के पद पर समाजशास्त्र विभाग के प्रोफेसर कार्यरत हैं, जबकि नियम के अनुसार यह पद लॉ विषय के योग्य प्रोफेसर के पास होना चाहिए।

    विश्वविद्यालय की सफाई

    विश्वविद्यालय की ओर से कहा गया कि शिक्षकों की नियुक्ति के लिए प्रस्ताव भेजा गया था, लेकिन फिलहाल पद स्वीकृत नहीं हो सके हैं। साथ ही यह भी बताया गया कि कॉलेज एक स्व-वित्तपोषित संस्थान है।

    छात्रों की संख्या और व्यवस्था

    इस समय संस्थान में करीब 418 छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। प्रबंधन ने यह भी कहा कि छोटानागपुर लॉ कॉलेज के साथ एमओयू के तहत कुछ शैक्षणिक सुविधाएं दी जा रही हैं।

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