Johar Live Desk : अहमदनगर के रालेगणसिद्धी में सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने महाराष्ट्र सरकार के खिलाफ फिर एक बड़े आंदोलन का ऐलान कर दिया है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार लोकायुक्त कानून को तुरंत लागू नहीं करती, तो वे 30 जनवरी से आमरण अनशन पर बैठेंगे। हजारे ने इसे अपना “अंतिम आंदोलन” बताया और कहा कि अब उनकी उम्र और स्वास्थ्य लंबा संघर्ष करने की अनुमति नहीं देते, लेकिन जनता के हित में वे पीछे नहीं हटेंगे।
अन्ना हजारे ने बताया कि 2022 में भी उन्होंने इसी मांग को लेकर अनशन किया था। उस समय सरकार ने वादा किया था कि लोकायुक्त कानून जल्द लागू किया जाएगा। ड्राफ्ट तैयार हुआ, विधानसभा और विधान परिषद दोनों सदनों से कानून पास हुआ और फाइल राष्ट्रपति तक भेजी गई। इसके बावजूद लगभग तीन साल बाद भी यह कानून लागू नहीं हुआ। हजारे ने इसे सरकार की नीयत पर सवाल बताते हुए कहा कि अगर यह कानून ईमानदार शासन लाता है, तो सरकार इससे बच क्यों रही है?
उन्होंने यह भी बताया कि वे इस मुद्दे पर उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को सात पत्र भेज चुके हैं, लेकिन किसी एक पत्र का भी जवाब नहीं मिला। हजारे का कहना है कि जब सरकार जनता की बात सुनना ही नहीं चाहती, तो आंदोलन के अलावा कोई रास्ता नहीं बचता।
रालेगणसिद्धी में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान हजारे ने सरकार पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि लोकायुक्त कानून भ्रष्टाचार रोकने का एक बेहद असरदार हथियार है, जो सरकार और अधिकारियों को जवाबदेह बनाता है। यदि सरकार इस कानून को लागू करने में देरी कर रही है, तो इसका मतलब है कि वह पारदर्शिता से बच रही है।
हजारे ने साफ कहा कि यह उनका अंतिम आंदोलन होगा। 87 वर्ष की उम्र में वे जानते हैं कि आमरण अनशन उनके स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है, लेकिन जनता के हित में वे किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि जब तक लोकायुक्त कानून लागू नहीं होगा, वे पीछे नहीं हटेंगे।
अन्ना हजारे के इस ऐलान के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल बढ़ गई है। सरकार पर पहले ही भ्रष्टाचार को लेकर सवाल उठ रहे हैं और अब अन्ना का अनशन सरकार के लिए नई परेशानी बन सकता है। अब नजरें 30 जनवरी पर हैं, जब हजारे अनशन पर बैठेंगे और यह देखना होगा कि क्या सरकार उनकी मांग मानती है या राज्य फिर से एक बड़े जनआंदोलन का सामना करेगा।

