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    Home»जोहार ब्रेकिंग»आदिवासी जमीन पर कब्जे का आरोप, बिल्डर जितेंद्र सिंह के खिलाफ खुला मोर्चा
    जोहार ब्रेकिंग

    आदिवासी जमीन पर कब्जे का आरोप, बिल्डर जितेंद्र सिंह के खिलाफ खुला मोर्चा

    joharlive NetworkBy joharlive NetworkJanuary 19, 2026No Comments3 Mins Read1
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    जमीन
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    Ranchi : रांची में आदिवासी जमीन विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार निशाने पर हैं शहर के बड़े बिल्डर जितेंद्र सिंह, जिन पर आदिवासी जमीन को फर्जी तरीके से हड़पने, दस्तावेजों में हेराफेरी करने और प्रशासनिक संरक्षण में अवैध निर्माण कराने के गंभीर आरोप लगे हैं। आदिवासी जन परिषद सहित कई संगठनों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सीधे तौर पर जितेंद्र सिंह को जमीन माफिया बताते हुए उनकी तत्काल गिरफ्तारी की मांग की है। संगठनों का आरोप है कि रातू थाना क्षेत्र में खाता नंबर 152 और प्लॉट नंबर 96 से जुड़ी लगभग साढ़े चार एकड़ आदिवासी जमीन पर जितेंद्र सिंह के इशारे पर अवैध गतिविधियां चल रही हैं। इस जमीन का न तो वैध दाखिल-खारिज हुआ है और न ही कानून के अनुसार रसीद निर्गत की गई है। इसके बावजूद जमीन को सामान्य श्रेणी में दिखाकर उस पर कॉलेज, अपार्टमेंट और अन्य व्यावसायिक निर्माण खड़ा कर दिया गया। आदिवासी नेताओं का कहना है कि जितेंद्र सिंह ने फर्जी रसीद और कागजात तैयार कर जमीन को वैध साबित करने की कोशिश की। जबकि वास्तविक रिकॉर्ड आज भी आदिवासी रैयतों के नाम पर मौजूद है। संगठनों का दावा है कि उनके पास इस संबंध में ठोस दस्तावेजी सबूत हैं, जिन्हें आयोग और प्रशासन के समक्ष सौंपा गया है।

    प्रेस वार्ता में यह भी आरोप लगाया गया कि जितेंद्र सिंह को राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर संरक्षण हासिल है। कई बार लिखित शिकायत देने के बावजूद स्थानीय थाना में प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई। जब मामला दिल्ली स्तर तक पहुंचा और आयोग के हस्तक्षेप के बाद आदेश आया, तब जाकर केस दर्ज हुआ। अब भी आशंका जताई जा रही है कि जांच को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है।

    संगठनों ने रांची जिला निबंधन कार्यालय पर भी गंभीर सवाल उठाए। उनका कहना है कि मोटी रकम लेकर आदिवासी और खतियानी जमीन का निबंधन कर दिया जाता है, जबकि कानून में इस पर स्पष्ट रोक है। अंचल अधिकारी, कर्मचारी और कुछ पुलिसकर्मियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में बताई गई है।

    आदिवासी संगठनों का कहना है कि जमीन के मामलों में हमेशा आदिवासियों को ही परेशान किया जाता है। मामूली विवाद में उनकी गिरफ्तारी हो जाती है, जबकि जितेंद्र सिंह जैसे प्रभावशाली बिल्डरों पर कार्रवाई नहीं होती। इसी असमान रवैये के कारण जमीन विवाद हिंसक रूप ले रहा है और गोलीबारी, अपहरण व हत्या जैसी घटनाएं बढ़ रही हैं।

    संगठनों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि जितेंद्र सिंह और पूरे भूमि घोटाले में शामिल लोगों की गिरफ्तारी नहीं हुई, तो वे सड़क पर उतरकर व्यापक आंदोलन करेंगे। साथ ही अवैध कब्जे वाली सभी आदिवासी जमीन को मुक्त कराने, फर्जी निबंधन रद्द करने और दोषियों की संपत्ति की जांच की मांग दोहराई गई। आदिवासी जन परिषद ने कहा कि यह सिर्फ एक जमीन का मामला नहीं, बल्कि कानून के राज और आदिवासी अधिकारों की लड़ाई है। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को राज्यव्यापी रूप दिया जाएगा।

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    इधर, मामले में जितेंद्र सिंह का कहना है कि जमीन पूरे कानून-कायदे से उन्होंने लिया है। साल 2016 में जमीन के रजिस्ट्री कराई गयी है। शरह में झूठे केस कर कारोबारियों से मोटी रकम वसूलने का खेल जोरों पर चल रहा है। उसी तरह यह खेल भी उनके साथ मोटी रकम वसूलने के लिए खेला जा रहा है।

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    Allegations of encroachment on tribal land; a campaign launched against builder Jitendra Singh आदिवासी जमीन पर कब्जे का आरोप बिल्डर जितेंद्र सिंह के खिलाफ खुला मोर्चा
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