Ranchi : रांची में लुप्त होती मिथिला की पौराणिक लिपि और मैथिली भाषा को बचाने के लिए मिथिलाक्षर जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत राजधानी के हरमू स्थित विद्यापति दलान में मैथिल पुनर्जागरण प्रकाश के पांचवें वर्षगांठ का समारोह आयोजित किया गया। दीप प्रज्वलन और महाकवि विद्यापति के चित्र पर माल्यार्पण के बाद ‘जय-जय भैरवि असुर भयाउनी’ भगवती वंदना के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ।
समारोह में पटना, दरभंगा, मधुबनी, नासिक समेत कई जगहों से आए अभियानियों और झारखंड मैथिली मंच के पदाधिकारियों ने आपसी परिचय लिया। नासिक से आए पंडित अजय नाथ झा शास्त्री ने उद्घाटन संबोधन में मिथिलाक्षर साक्षरता अभियान और मैथिल पुनर्जागरण प्रकाश के प्रकाशन की संघर्षपूर्ण यात्रा का विवरण प्रस्तुत किया।
इस अवसर पर मैथिली पत्र-पत्रिका की वर्तमान चुनौतियों पर भी चर्चा हुई। पूर्व पार्षद अरुण कुमार झा ने चार साल से नियमित प्रकाशन कर रहे दैनिक अखबार और फोरम की सराहना की। राजकुमार मिश्रा ने आशा जताई कि मैथिल पुनर्जागरण प्रकाश का भविष्य उज्जवल रहेगा। झारखंड मैथिली मंच के महासचिव जयंत झा ने आर्थिक कठिनाइयों को रेखांकित करते हुए सभी से सहयोग की अपील की।
समारोह में मैथिल पुनर्जागरण प्रकाश और फोरम में योगदान के लिए कई लोगों को सम्मानित किया गया। सुमित सौरभ को सर्वश्रेष्ठ समाचार एंकर का सम्मान मिला। इसके अलावा कृष्णकांत झा, कुमार प्रमोद चंद्र, दीपक आनंद मलिक, वीणा झा, पूनम मिश्रा, अशोक लाल और डॉ. विनय कर्ण सहित अन्य गणमान्य लोगों को भी सम्मानित किया गया। समारोह का संचालन समीर कुमार मिश्रा ने किया और धन्यवाद ज्ञापन वीणा झा ने दिया।
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