Jamtara (Rajiv Jha) : जामताड़ा रेलवे स्टेशन परिसर में स्थित करीब सौ वर्ष से भी अधिक पुराने फुट ओवरब्रिज को रविवार को रेलवे प्रशासन ने पूरी तरह हटाकर जमींदोज कर दिया। लंबे समय से जर्जर घोषित इस पुल से पहले ही लोगों की आवाजाही बंद कर दी गई थी। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए रेलवे ने विशेष तकनीकी व्यवस्था के बीच इस कार्रवाई को अंजाम दिया। यह फुट ओवरब्रिज कभी जामताड़ा शहर की “लाइफ लाइन” माना जाता था। वर्षों तक इस पुल के जरिए हजारों लोग रोजाना स्टेशन के एक हिस्से से दूसरे हिस्से तक आसानी से पहुंचते थे। जामताड़ा महाविद्यालय, थाना, न्यायालय और थाना रोड इलाके के लोगों के लिए यह बाजार तक जाने का सबसे छोटा और सुविधाजनक रास्ता था। शहर की कई पीढ़ियों की यादें इस पुल से जुड़ी हुई थीं।
रेलवे सूत्रों के अनुसार, आसनसोल रेल मंडल के अंतर्गत आने वाले जामताड़ा स्टेशन के इस पुराने और जर्जर पुल को सिग्नल डीआरआई ब्रिज विभाग की निगरानी में हटाया गया। पूरे अभियान के दौरान सुरक्षा मानकों का विशेष ध्यान रखा गया। पुल हटाने के लिए दो भारी डीजल क्रेन की मदद ली गई। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, महज दस मिनट के भीतर पूरे लोहे के ढांचे को सुरक्षित तरीके से जमीन पर उतार लिया गया। वहीं हाई टेंशन बिजली तारों को हटाने के लिए चार टावर वैगन का इस्तेमाल किया गया।
कार्रवाई शुरू करने से पहले रेलवे प्रशासन ने पूरे स्टेशन परिसर को खाली करा लिया था ताकि किसी प्रकार की दुर्घटना न हो। पूरी प्रक्रिया तकनीकी निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था के बीच संपन्न हुई। इस दौरान स्टेशन प्रबंधक एस.के. पासवान, आरपीएफ के जवान, रेलवे कर्मी और संबंधित विभाग के अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। रेलवे प्रशासन की ओर से लगातार निगरानी रखी गई ताकि काम सुरक्षित तरीके से पूरा हो सके।
पुराने फुट ओवरब्रिज के हटने के साथ ही शहरवासियों के बीच भावुक माहौल भी देखने को मिला। कई लोगों ने कहा कि यह पुल केवल एक रास्ता नहीं था, बल्कि जामताड़ा शहर के इतिहास और पुरानी यादों का हिस्सा था। अब आधुनिक विकास की रफ्तार में यह ऐतिहासिक पुल बीते समय की याद बनकर रह गया है।
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