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    Home»जोहार ब्रेकिंग»झारखंडः जयराम के बाद इरफान अंसारी ने किया सोनम वांगचुक का समर्थन
    जोहार ब्रेकिंग

    झारखंडः जयराम के बाद इरफान अंसारी ने किया सोनम वांगचुक का समर्थन

    Muskan ChoudharyBy Muskan ChoudharyJuly 18, 2026Updated:July 18, 2026No Comments2 Mins Read2
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    Irfan Ansari
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    बीते गुरूवार युवा नेता और विधायक जयराम महतो ने नई दिल्ली जाकर सोनम वांगचुग का समर्थन किया था. उनकी पहल को आगे बढ़ाते हुए अब राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफान अंसारी ने भी सोनम का समर्थन किया है. अपने फेसबुक पोस्ट में उन्होंने कहा, वांगचुग का अनशन राष्ट्र से जुड़ा है. देशवासियों और युवाओं के हित में उन्होंने अनशन किया है. इस तरह का अनशन गांधी जी अंग्रेजों के खिलाफ किया करते थे. यही गांधीगिरी को वांगचुग ने अपनाया है.

    उन्होंने लिखा, लोकतंत्र में असहमति अपराध नहीं होती, बल्कि लोकतंत्र की आत्मा होती है. जब कोई व्यक्ति यह कहता है कि “मैं भूखा हूँ” या अपनी मांगों को लेकर अनशन पर बैठता है, तो सबसे पहले उसे किसी दल या विचारधारा के चश्मे से नहीं, बल्कि एक इंसान के रूप में देखा जाना चाहिए. एक राष्ट्र भक्त के रूप में देखना चाहिए.

    डॉ इरफान आगे कहते हैं, वांगचुग अनशन पर हैं, तो सरकार का पहला दायित्व उनकी बात सुनना, उनके स्वास्थ्य की रक्षा करना और संवाद का रास्ता खोलना है. लोकतांत्रिक शासन की ताकत विरोध को दबाने में नहीं, बल्कि विरोध को सुनने और उसका समाधान खोजने में होती है.

    सरकार किसी दल का हो, जनता से संवाद अहम

    किसी भी सरकार, चाहे वह भाजपा की हो या किसी अन्य दल की, उसकी संवेदनशीलता का पैमाना यही है कि वह सबसे कमजोर, सबसे पीड़ित और सबसे असहाय व्यक्ति के प्रति कैसा व्यवहार करती है. यदि कोई नागरिक भूख को अपना हथियार बनाता है, तो यह केवल उसका व्यक्तिगत संघर्ष नहीं, बल्कि व्यवस्था के सामने एक नैतिक प्रश्न भी है.

    स्वास्थ्य मंत्री कहते हैं, सरकारें बदलती रहती हैं, लेकिन मानवीय मूल्य स्थायी होते हैं. राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, पर किसी अनशनकारी की पीड़ा के प्रति उदासीनता लोकतांत्रिक संस्कृति को कमजोर करती है. संवाद, सहानुभूति और संवेदनशीलता ही किसी परिपक्व लोकतंत्र की पहचान हैं.

    इसलिए अपेक्षा यही है कि सरकार राजनीतिक लाभ-हानि से ऊपर उठकर मानवीय आधार पर पहल करे, संवाद स्थापित करे और ऐसा समाधान निकाले जिससे न किसी की जान जोखिम में पड़े और न लोकतंत्र की गरिमा पर प्रश्नचिह्न लगे.

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