रांची: झारखंड की राजनीति और आदिवासी समाज के गलियारों में निशा भगत एक ऐसा नाम बनकर उभरीं, जिन्होंने जमीनी संघर्षों से लेकर मुख्यधारा की राजनीति और वैचारिक बहसों तक अपनी एक अलग और मुखर पहचान बनाई.
गुमला के एक आंदोलनकारी परिवार में जन्मी निशा का सफर होटल मैनेजमेंट की कॉर्पोरेट नौकरी से शुरू होकर आदिवासी अस्मिता, सरना धर्म और डीलिस्टिंग की राजनीति के केंद्र तक पहुंचा. 6 नवंबर 2026 को उनकी संदेहास्पद मौत और उससे ठीक पहले उनके फेसबुक लाइव ने इस पूरे सफर को एक बेहद गंभीर मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है.
आंदोलन और संघर्ष से बुनी गई पृष्ठभूमि
निशा भगत की वैचारिक और सामाजिक सोच की नींव उनके परिवार के संघर्षों में पड़ी थी. उनके पिता, हन्दु भगत, झारखंड आंदोलन के सक्रिय आंदोलनकारी रहे थे, जिन्हें आंदोलन के दौरान जेल जाना पड़ा था और परिवार को भारी आर्थिक-सामाजिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी थी.
निशा का जन्म 14 नवंबर 1988 को गुमला के एक गांव में हुआ था. गुमला के उर्सलाइन कॉन्वेंट से स्कूली शिक्षा और कार्तिक उरांव कॉलेज से विज्ञान की पढ़ाई के बाद, निशा ने दुर्गापुर के डीएसएमएस संस्थान से होटल मैनेजमेंट किया. इसके बाद उन्होंने बेंगलुरु में आईटीसी के साथ कॉर्पोरेट नौकरी भी की, लेकिन जल्द ही झारखंड लौट आईं. उन्होंने नालांदाओपन यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद उन्होंने ठेकेदारी के क्षेत्र में कदम रखा और माओवादी प्रभावित इलाकों में भी निर्माण कार्य किए.
कांग्रेस से जेएलकेएम और फिर सरना धर्म की मुखर पैरोकार
निशा का राजनीतिक सफर कांग्रेस पार्टी से शुरू हुआ. दिसंबर 2023 में वह कांग्रेस के ‘शक्ति सुपर शी’ अभियान की झारखंड स्टेट कोऑर्डिनेटर और प्रदेश युवा कांग्रेस की उपाध्यक्ष रहीं. इसके बाद वह झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) से जुड़ीं और साल 2024 का विधानसभा चुनाव गुमला सीट से लड़ा.
साल 2025 में कुड़मी-महतो समुदाय को एसटी सूची में शामिल करने की मांग का विरोध करने पर JLKM ने उन्हें छह साल के लिए निष्कासित कर दिया. इसके बाद उनकी राजनीति ने पूरी तरह से आदिवासी धार्मिक पहचान, सरना धर्म और ‘डीलिस्टिंग’ (धर्मांतरित आदिवासियों को एसटी सूची से हटाने) के मुद्दे पर फोकस किया. दिसंबर 2025 में उन्होंने डीलिस्टिंग के समर्थन में अपना सिर तक मुंडवा लिया था. सितंबर 2025 में वह ‘केंद्रीय सरना समिति’ की केंद्रीय महिला अध्यक्ष भी चुनी गईं.
मौत से पहले फेसबुक लाइव और पिता के गंभीर आरोप
6 नवंबर 2026 को उनके निधन की खबर सामने आई, जिसने पूरे झारखंड को झकझोर कर रख दिया. अपनी मौत से ठीक पहले निशा ने फेसबुक लाइव कर पिठोरिया थाना प्रभारी सतीश पांडेय, अजय तिर्की और कुछ अन्य लोगों पर गंभीर आरोप लगाए थे. उन्होंने पुलिस कार्रवाई और जमीन विवाद के चलते प्रताड़ना का शिकार होने की बात कही थी.
घटना के बाद उनके पिता हन्दु भगत ने पिठोरिया थाना में लिखित आवेदन देकर इसे आत्महत्या नहीं बल्कि एक सुनियोजित साजिश के तहत की गई हत्या बताया है. पिता ने पुलिस अधिकारियों, अजय तिर्की, ज्योत्सना केरकेट्टा और चर्च व जमीन से जुड़े कुछ लोगों पर मानसिक प्रताड़ना और चरित्र हनन का आरोप लगाते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की है.


