रांची। झारखंड पुलिस में दारोगा से इंस्पेक्टर पद पर प्रोन्नति को लेकर चल रहा वरीयता विवाद अब सीधी नियुक्ति वाले दारोगाओं के पक्ष में सुलझ गया है. झारखंड हाई कोर्ट ने वर्ष 2018 में सीधी बहाली के जरिए दारोगा बने अधिकारियों को वरीयता देने का फैसला सुनाया है. जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने उत्तम तिवारी एवं अन्य की याचिका स्वीकार कर ली. इस फैसले से इंस्पेक्टर पद पर लंबे समय से लंबित प्रोन्नति प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद है.
विवाद की शुरुआत पुलिस विभाग की ओर से 9 सितंबर 2024 को जारी दारोगाओं की वरीयता सूची से हुई थी. इस सूची में सीमित विभागीय प्रतियोगिता परीक्षा (एलडीसीई) के माध्यम से सिपाही से दारोगा बने पुलिसकर्मियों को वर्ष 2018 में सीधी नियुक्ति से बहाल दारोगाओं से ऊपर रखा गया था. सीधी नियुक्ति वाले दारोगाओं ने विभाग के इस फैसले को नियमों के खिलाफ बताते हुए हाई कोर्ट में चुनौती दी थी.
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता मनोज टंडन ने अदालत में पक्ष रखते हुए दलील दी कि सेवा में वरीयता के नियमानुसार सीधी नियुक्ति से बहाल दारोगा, एलडीसीई के माध्यम से नियुक्त दारोगाओं से वरिष्ठ हैं. इसलिए विभाग की ओर से जारी वरीयता सूची में उन्हें नीचे रखना उचित नहीं है. याचिकाकर्ताओं ने विवादित सूची निरस्त करने की मांग की थी.
प्रोन्नति प्रक्रिया पर लगी थी रोक
मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने विवादित वरीयता सूची के आधार पर दारोगाओं की प्रोन्नति पर रोक लगा दी थी. शुक्रवार को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने सीधी नियुक्ति वाले दारोगाओं के पक्ष में फैसला सुनाया और उनकी याचिका स्वीकार कर ली.
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