झारखंड में नक्सली संगठन भाकपा (माओवादी) के तीन सप्ताह के अलग-अलग अभियानों को देखते हुए पुलिस मुख्यालय ने राज्यभर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करने का निर्देश जारी किया है. 8 नवंबर से 30 नवंबर 2026 के बीच माओवादी संगठन खूनी क्रांति सप्ताह, दमन विरोधी सप्ताह और शहीद सप्ताह मनाने जा रहा है. इस दौरान नक्सलियों की ओर से हिंसक घटनाओं को अंजाम देने, सरकारी प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने और रेलवे सहित महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों को नुकसान पहुंचाने की आशंका जताई गई है. इसे देखते हुए पुलिस मुख्यालय ने सभी जिलों के एसपी को अलर्ट रहने और संवेदनशील इलाकों में विशेष निगरानी रखने का निर्देश दिया है.
आईजी (अभियान) नरेंद्र कुमार सिंह के आदेश पर राज्यभर के एसएसपी/एसपी को पत्राचार किया गया है. जिले के अलावा झारखंड जगुआर और रेल पुलिस समेत संबंधित पुलिस इकाइयों को भी भेजा गया है. पत्र में स्पष्ट कहा गया है कि माओवादी संगठन के लगातार कमजोर होने और कई नक्सलियों के आत्मसमर्पण तथा गिरफ्तारी के बावजूद इन सप्ताहों के दौरान किसी भी अप्रिय घटना की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है. नक्सलियों के तीन सप्ताह अलग-अलग अभियानों को देखते हुए विशेष सतर्कता बरती जाएं.
तीन चरणों में मनाएंगे नक्सली सप्ताह
पुलिस मुख्यालय के पत्र के अनुसार माओवादी संगठन नवंबर में तीन अलग-अलग चरणों में कार्यक्रम आयोजित करेगा.
- 8 से 15 नवंबर: खूनी क्रांति सप्ताह
- 16 से 22 नवंबर: दमन विरोधी सप्ताह
- 24 से 30 नवंबर: शहीद सप्ताह
पुलिस को आशंका है कि इन कार्यक्रमों के दौरान नक्सली संगठन अपनी मौजूदगी दर्ज कराने के लिए हिंसक गतिविधियों को अंजाम दे सकता है. विशेष रूप से रेलवे क्षेत्र, सरकारी प्रतिष्ठानों और सुरक्षा बलों से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया जा सकता है.
पुलिस मुख्यालय ने रेलवे से जुड़े बुनियादी ढांचे की सुरक्षा को लेकर विशेष सतर्कता बरतने का निर्देश दिया है. इसके तहत रेल खंडों, रेलवे संस्थानों, रेलवे स्टेशनों, पुल-पुलियों, रेल ट्रैक, रेलगाड़ियों, मार्गरक्षण दल और शस्त्रागार पर विशेष निगरानी रखी जाएगी. इसके अलावा नक्सल प्रभावित इलाकों में रेलवे की आवाजाही और महत्वपूर्ण रेल लाइनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा गया है. किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी मिलने पर तत्काल कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है.
सरकारी कार्यालय, बैंक और खनन क्षेत्र भी निशाने पर
पुलिस मुख्यालय की ओर से जारी पत्र में उन सरकारी और गैर सरकारी प्रतिष्ठानों की सूची भी दी गई है, जिन्हें नक्सली निशाना बना सकते हैं. इनमें सुरक्षा बलों के कैंप, थाना, पिकेट और सीआरपीएफ कैंप शामिल हैं.
इसके अलावा निम्नलिखित स्थानों पर भी विशेष निगरानी रखने को कहा गया है.
1. सरकारी कार्यालय: ब्लॉक, अंचल कार्यालय, अनुमंडल और जिला स्तर के विभिन्न कार्यालय.
2. वित्तीय संस्थान: बैंक और अन्य वित्तीय संस्थान.
3. वन विभाग: वन विभाग के कार्यालय और गौतम जैसे अन्य महत्वपूर्ण प्रतिष्ठान.
4. संचार व्यवस्था: दूरदराज के क्षेत्रों में लगे मोबाइल टावर, बीटीएस टावर और अन्य संचार केंद्र.
5. खनन क्षेत्र: कोल साइडिंग, कोल डंप और माइंस यानी खनन स्थल.
6. सड़क और परिवहन: राज्य मार्ग, राष्ट्रीय राजमार्ग और महत्वपूर्ण सड़कों पर चलने वाले वाहन.
7. अन्य संवेदनशील स्थान: पुल-पुलिया, हाट-बाजार तथा सुरक्षा बलों और पुलिस के समर्थक माने जाने वाले लोग.
पुलिस की छोटी चूक भी पड़ सकती है भारी
आईजी अभियान की ओर से जारी पत्र में पिछली घटनाओं का उल्लेख करते हुए सुरक्षा व्यवस्था में लापरवाही नहीं बरतने की हिदायत दी है. पत्र के मुताबिक, नक्सलियों ने पहले छोटी-मोटी घटनाओं को अंजाम देकर पुलिस बल को संबंधित स्थान पर आने के लिए आमंत्रित किया और फिर वहां पहुंचने वाले जवानों पर घात लगाकर हमला किया.
ऐसे हमलों में सुरक्षा बलों को नुकसान उठाना पड़ा है. इसी अनुभव को देखते हुए पुलिस को निर्देश दिया गया है कि किसी भी घटना की सूचना मिलने पर पहले उसकी गहनता से सत्यापन किया जाए. इसके बाद जरूरत के अनुसार कार्रवाई की जाए.
नक्सलियों द्वारा घटना को अंजाम दिए जाने वाले किसी भी स्थल पर जाने के लिए एक ही रास्ते का इस्तेमाल नहीं करने की सलाह भी दी गई है, ताकि जवान किसी संभावित घात का शिकार न हो सकें.
ब्रीफिंग के बाद ही ऑपरेशन पर निकलेंगे जवान
आईजी (अभियान) नरेंद्र कुमार सिंह ने निर्देश दिया है कि तीनों सप्ताह के दौरान सुरक्षा बलों की ब्रीफिंग सुनिश्चित की जाए और एसओपी (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) का पूरी तरह पालन कराया जाए.
नक्सलियों के प्रभाव वाले क्षेत्रों में किसी भी अप्रिय घटना की आशंका को देखते हुए सभी आवश्यक सुरक्षा और एहतियाती कदम उठाने को कहा गया है. इसके अलावा आईजी ने कहा है कि इन तीनों सप्ताहों के दौरान सभी जिलों में कड़ी निगरानी रखी जाए, ताकि विधि-व्यवस्था की कोई समस्या उत्पन्न न हो.
आत्मसमर्पण और गिरफ्तारी से नक्सली संगठन कमजोर जरूर हुआ है, लेकिन पुलिस किसी भी तरह की ढ़िलाई बरतने के मूड में नहीं है.
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