आनंद दत्त/किसलय शानू
जेबीएम का पूरा नाम जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश है. यह बांग्लादेश में सक्रिय एक कट्टरपंथी इस्लामी आतंकी संगठन है. भारत सरकार ने इसे 23 मई 2019 को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA के तहत प्रतिबंधित आतंकी संगठनों की सूची में शामिल किया था. भारत में इसके दूसरे नामों के रूप में जमात-उल-मुजाहिदीन इंडिया और जमात-उल-मुजाहिदीन हिन्दुस्तान को भी प्रतिबंध के दायरे में रखा गया है.
जोहार लाइव की पड़ताल में इस संगठन के तीन संदिग्ध या आरोपी झारखंड से है. जिसमें दो पाकुड़ जिले से और एक साहिबगंज जिले से है.
पाकुड़
लाल मोहम्मद को साल 2015 में ही पाकुड़ पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था.
मो. दिलावर हसन को पाकुड़िया से एसटीएफ ने गिरफ्तार कर लिया था और कोलकाता ले गई थी.
साहिबगंज
तारिकुल इस्लाम उर्फ सुमोन उर्फ सादिक उर्फ रेहान को 29 सितंबर 2015 को एनआईए और रामगढ़ पुलिस ने मिलकर गिरफ्तार किया था. इसके ऊपर आर्म्स एक्ट सहित यूएपीए के तहत कई मुकदमें दर्ज हैं.
बता दें, JMB की स्थापना वर्ष 1998 में बांग्लादेश में हुई थी. इसके संस्थापक के रूप में शेख अब्दुर रहमान का नाम सामने आता है. इस संगठन का घोषित उद्देश्य हिंसक तरीकों से बांग्लादेश में इस्लामी शासन स्थापित करना था. इसकी विचारधारा लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता और मौजूदा संवैधानिक व्यवस्था का विरोध करने वाली मानी जाती है.
20 जनवरी 2018 को बिहार के बोधगया स्थित महाबोधि मंदिर परिसर में बम विस्फोट की घटना हुई थी. ऑस्ट्रेलियाई सरकार की आतंकी संगठनों से संबंधित आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस मामले में JMB के सदस्यों पर आरोप लगाए गए थे. जांच में मंदिर परिसर के आसपास विस्फोटक उपकरण रखने और एक विस्फोट होने की बात सामने आई थी.
भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने 23 मई 2019 को अधिसूचना जारी कर JMB और उसके विभिन्न स्वरूपों को UAPA की पहली अनुसूची में शामिल किया. भारत और बांग्लादेश के बीच लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा है. सुरक्षा एजेंसियों की चिंता का एक प्रमुख कारण सीमा पार नेटवर्क, संदिग्ध वित्तीय गतिविधियां, कट्टरपंथी विचारधारा का प्रसार और युवाओं की कथित भर्ती है.
भारत में झारखंड के अलावा इस संगठन के लोग पश्चिम बंगाल, असम और त्रिपुरा में भी हैं.


