बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की भगवान श्रीकृष्ण पर की गई टिप्पणी को लेकर राजनीतिक और धार्मिक विवाद बढ़ गया है. समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव, राजद नेता तेजस्वी यादव, सांसद पप्पू यादव और कांग्रेस नेताओं ने उनके बयान की कड़ी आलोचना की है. पप्पू यादव ने इस मामले में दिल्ली के संसद मार्ग थाने में शिकायत देकर FIR दर्ज करने की मांग की है. वहीं, मथुरा और ब्रज क्षेत्र के संतों तथा कृष्ण भक्तों ने भी नाराजगी जताई है.
अखिलेश यादव (सपा नेता) : एक बाबा अपमानित कर रहे हैं. पहले भगवान कृष्ण को अपमानित किया और अब सुनने में आ रहा है कि प्रभू श्रीराम के बारें में क्या कह रहे हैंय. आखिरकार सनातनी लोगों के बुलडोजर कहां चले गए हैं. बगल के मुख्यमंत्री वो तो मोहन भी हैं और यादव भी हैं. सरकार क्या कर रही है, सनातनियों को चाहिए की वो बाबा के सभी कार्यक्रमों को रद्द करें.
पप्पु यादव : इनका आचरण शुरू से ही संदिग्ध रहा है. संदिग्ध आचरण वाले लोगों को भाजपा और RSS ने बढ़ावा दिया है. मैंने पहले भी कहा था कि बाबाओं को कथा कहने का जो अधिकार दिया जाता है, उसके लिए एक सख्त कानून होना चाहिए. किसी भी भगवान, धर्म, मूर्ति, रंग, भाषा या जाति पर अमर्यादित टिप्पणी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने का पुलिस को सीधा अधिकार होना चाहिए. पहले ये धर्म बांटते थे और अब धर्म के भीतर भी अलग-अलग धर्म बनाने की कोशिश हो रही है. यह न तो कोई शास्त्री है और न ही कोई बाबा. इसका नाम धीरेंद्र है, जिसे किसी पार्टी द्वारा प्रायोजित किया गया है. धर्म पर बोलने के लिए भी एक मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट होना चाहिए.
पप्पु यादव ने FIR भी कराई है.
तेजस्वी यादव (राजद नेता) :
लोकनायक और हमारे कुलदेवता भगवान श्रीकृष्ण पर की गई यह टिप्पणी अशोभनीय, अक्षम्य एवं अमर्यादित है. उन्होंने तंज कसा कि नफरती लोग पहले इंसानों को बांटते थे, अब भगवान को भी बांटने लगे हैं.
रोहिणी आचार्य (राजद नेता): खुद को धर्म का स्वयंभू ठेकेदार समझने वाले व्यक्ति द्वारा भगवान के स्वरूप और भक्तों के बीच भेद पैदा करना निंदनीय है.
सुप्रिया श्रीनेत (राष्ट्रीय प्रवक्ता, कांग्रेस) :
इंसानों को बांटने के बाद अब ये लोग आराध्यों को भी बांटने लगे हैं. श्रीराम और श्रीकृष्ण दोनों ही सत्य और न्याय के पर्याय हैं और ठाकुर जी को ‘टेढ़ा-मेढ़ा’ कहना एक पाप है.
दिग्विजय सिंह (पूर्व मुख्यमंत्री, मध्य प्रदेश): कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने धीरेंद्र शास्त्री पर तीखा हमला बोला और उन्हें ‘मूर्ख’ बताते हुए सवाल उठाया कि ये कब से बाबा बन गए.
भूपेश बघेल (पूर्व मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़):
इस तरह की बातें करने में “कोई तो केमिकल लोचा है” और इनके मानसिक स्वास्थ्य की जांच करवाई जानी चाहिए.
मिर्ची बाबा (संत समाज): इन्होंने धीरेंद्र शास्त्री के बयान की कड़ी निंदा की और कहा कि उनका अंत नजदीक है और उनकी वाणी ही उन्हें ले डूबेगी.
मथुरा और अन्य क्षेत्रों के संत/कृष्ण भक्त: इन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि भगवान राम और कृष्ण दोनों पूजनीय हैं, एक की प्रशंसा के लिए दूसरे का मजाक उड़ाना उचित नहीं है; ब्रजवासियों ने इस बयान का कड़ा विरोध किया और कहा कि वे इसे माफ नहीं करेंगे.
29 अक्टूबर को रामकथा के दौरान दिया था बयान
दरअसल, धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने 29 अक्टूबर 2026 को मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के करैरा में आयोजित रामकथा के दौरान भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण की तुलना करते हुए टिप्पणी की थी. उनका वीडियो 1 नवंबर को सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विवाद शुरू हुआ.
उन्होंने भगवान कृष्ण की त्रिभंग मुद्रा का जिक्र करते हुए कहा था कि उनकी तस्वीरों में वे तीन जगह से टेढ़े दिखाई देते हैं. उनके पैर एक-दूसरे के ऊपर होते हैं, कमर लचकती है और गर्दन टेढ़ी करके बांसुरी बजाते हैं. इसके विपरीत उन्होंने भगवान राम को सीधा खड़ा होने वाला बताया.
उन्होंने कहा था, “हमारे वाले भगवान खड़े भी होते हैं तो एकदम सीधे होते हैं. हमारे वाले का नाम भी सीधा, चलना भी सीधा और दिखते भी सीधे हैं.”
उन्होंने बांसुरी बजाने को खेल बताते हुए धनुष चलाने की तुलना भी की थी. इसके अलावा भगवान कृष्ण के गोवर्धन पर्वत उठाने की तुलना भगवान हनुमान द्वारा पूरा पर्वत उठाने से की थी. अयोध्या और वृंदावन की तुलना करते हुए भी उन्होंने टिप्पणी की थी.
हालांकि, विवाद बढ़ने के बाद धीरेंद्र शास्त्री ने 2 नवंबर को सोशल मीडिया पर वीडियो संदेश जारी कर सफाई दी और माफी मांगी. उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण में किसी तरह का भेद पैदा करना या किसी की भावनाओं को आहत करना नहीं था.
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