जोहार लाइव ब्यूरो
रांची : झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने पारसनाथ स्थित दिशोम मांझीथान में पूजा-अर्चना के बाद दर्ज प्राथमिकी के मामले में स्थानीय आदिवासियों को कथित तौर पर प्रताड़ित किए जाने का आरोप लगाया है. उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर मामले की निष्पक्ष जांच कराने, पांच आदिवासियों के खिलाफ कथित पुलिस प्रताड़ना रोकने और पूजा के दौरान आठ बकरे गायब होने के आरोपों की जांच कर दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई करने की मांग की है.
मरांडी ने 2 नवंबर 2026 को लिखे पत्र में कहा है कि गिरिडीह जिले के मधुबन थाना में दर्ज कांड संख्या 13/24 की आड़ में मरांग बुरु सांवता सुसार बैसी के पांच सदस्यों को परेशान किया जा रहा है. इनमें साहेबराम मुर्मू, फागु मरांडी, बुधन हेम्ब्रम, अर्जुन हेम्ब्रम और सिकन्दर हेम्ब्रम शामिल हैं. पत्र के मुताबिक, इन लोगों ने संयुक्त रूप से अपनी शिकायत संगठन की जिला समिति के माध्यम से नेता प्रतिपक्ष तक पहुंचाई है.
मुख्यमंत्री और कल्पना सोरेन की मौजूदगी में हुई थी पूजा
दो साल पहले 19 जुलाई 2024 को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपनी पत्नी और गांडेय की विधायक कल्पना मुर्मू सोरेन के साथ गिरिडीह जिले के मधुबन थाना क्षेत्र स्थित मरांग बुरु के दिशोम मांझीथान पहुंचे थे. यह कार्यक्रम वर्ष 2024 के गांडेय विधानसभा उपचुनाव में जीत और मुख्यमंत्री की जेल से रिहाई के बाद मन्नत पूरी होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था.
मरांडी ने दावा किया है कि इस दौरान जिला प्रशासन के अधिकारी और पुलिस बल भी मौजूद थे. आदिवासी परंपरा के अनुसार पूजा-अर्चना के दौरान नौ बकरे समर्पित किए गए थे. पत्र में आरोप लगाया गया है कि इनमें से एक बकरे की बलि नायके बाबा ने दी, जबकि शेष आठ बकरे पूजा स्थल से गायब कर दिए गए. नेता प्रतिपक्ष ने इस संबंध में प्रखंड विकास पदाधिकारी, पीरटांड़ और उनके सहयोगियों की भूमिका की जांच कराने की मांग की है.
वायरल तस्वीर के बाद दर्ज हुई थी प्राथमिकी
पत्र के मुताबिक, पूजा के दौरान बकरे की बलि से संबंधित तस्वीर वायरल होने के बाद 24 जुलाई 2024 को मधुबन थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई थी. यह मामला प्रतिनियुक्त दंडाधिकारी सह प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारी, पीरटांड़ दिनेश्वर महतो के लिखित आवेदन पर दर्ज हुआ था.
प्राथमिकी संख्या 13/24 में भारतीय न्याय संहिता की धारा 196, 299, 298, 223 और 3(5) का उल्लेख किया गया है. मरांडी के पत्र में कहा गया है कि प्राथमिकी में पारसनाथ के सम्मेद शिखरजी पर्वत क्षेत्र में मांस-मदिरा निषेध से संबंधित भारत सरकार के कार्यालय ज्ञापन का हवाला देते हुए धार्मिक भावनाएं आहत होने और सामाजिक सद्भाव बिगड़ने की आशंका का उल्लेख किया गया था.
मरांडी ने सवाल उठाया है कि यदि पूजा के दौरान मुख्यमंत्री, उनकी पत्नी और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद थे, तो बाद में इस मामले में स्थानीय आदिवासियों को आरोपी बनाने या उन्हें प्रताड़ित करने का आधार क्या है. उन्होंने दावा किया है कि पांच नामजद लोगों में से दो घटना के समय मौके पर मौजूद भी नहीं थे.
आदिवासी परंपरा और प्रशासनिक कार्रवाई पर उठाए सवाल
बाबूलाल मरांडी ने अपने पत्र में पारसनाथ को लेकर राज्य सरकार की नीति पर भी सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि एक ओर प्रशासन धार्मिक भावनाओं और निषेध संबंधी प्रावधानों का हवाला देकर प्राथमिकी दर्ज करता है, वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के दौरान प्रशासन की मौजूदगी में पूजा और बलि की घटना होने का आरोप है.
उन्होंने इसे प्रशासनिक कार्रवाई में दोहरे मापदंड का मामला बताते हुए कहा है कि घटना की वास्तविक परिस्थितियों की जांच किए बिना स्थानीय आदिवासियों को दोषी ठहराना उचित नहीं है.
नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री से दो प्रमुख मांगें की हैं. पहली, मधुबन थाना कांड संख्या 13/24 के संबंध में पांचों आदिवासियों के खिलाफ कथित पुलिस प्रताड़ना पर तत्काल रोक लगाई जाए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए. दूसरी, 19 जुलाई 2024 को दिशोम मांझीथान में आयोजित पूजा की वास्तविक परिस्थितियों, आठ बकरे गायब किए जाने के आरोप और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए. इसके अलावा मरांडी ने जांच में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की भी मांग की है.
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