आनंद दत्त/किसलय शानू
साल 2008 में 26 जुलाई को गुजरात के अहमदाबाद में एक साथ 22 बम धमाके हुए. घटना में 56 लोगों की मौत और करीब 200 लोग घायल हुए थे. इस हमले की जिम्मेदारी इंडियन मुजाहिदीन ने ली थी. जांच के दौरान स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया यानी सिमी के सदस्यों की भूमिका भी सामने आई थी.
इस मामले में सिमी के पूर्व नेता सफदर नागोरी सहित 49 लोगों को फरवरी 2022 में दोषी ठहराया गया था. अदालत के अनुसार, सिमी के सक्रिय सदस्यों ने हमले की साजिश, बम बनाने और विस्फोटक लगाने में मदद की थी.
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जोहार लाइव इंवेस्टिगेशन की सातवीं कड़ी में हम सिमी के झारखंड कनेक्शन और उसकी उपस्थिति की पड़ताल कर रहे हैं. मिली जानकारी के मुताबिक झारखंड में परोक्ष और अपरोक्ष तौर पर 5 संदिग्ध इस वक्त सुरक्षा एजेंसियों के नजर में हैं.
रांची
तबरेज आलम वर्तमान में एक कंस्ट्रक्शन कंपनी में काम करता है. रांची में ही अपने परिवार के साथ रहता है.
इबरार अहमद वर्तमान मे रांची के एक कॉलेज में कंप्यूटर साइंस के प्रोफेसर हैं तथा घर में कोचिंग क्लास भी चलाते हैं.
जमशेदपुर
मो. इकरार शेख उर्फ शेख साहब उर्फ इब्रहिम उर्फ अहमद उर्फ कलाम अहमद उर्फ विजय के ऊपर आर्म्स एक्ट सहित कई अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज है. फिलहाल यह जमशेदपुर के अपने स्थाई निवास से कई सालों से बाहर है. कहां रह रहा है, इसके बारे में सुरक्षा एजेंसियों और उसके आस-पड़ोस रहनेवालों को पता नहीं है.
हजारीबाग
मो. सैफुद्दीन का संपर्क रांची के डॉ इश्तियाक जो अल कायदा इन इंडियन सब-कॉन्टिनेंस से संबंध रखता है, से रहा है. वर्तमान में यह चतरा जिले में एक अस्पताल में लेप्रोसी डिपार्टमेंट में काम करता है.
अफजल हुसैन उर्फ अजमल फिलहाल एक प्राइवेट स्कूल चलाता है. साल 2010 में ये जेल गया और फिर साल 2012 में बाहर आया. इसके ऊपर धारा 147 और अन्य धाराओं में केस दर्ज है.
बता दें, स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) भारत में सक्रिय रहा एक कट्टरपंथी इस्लामी संगठन है. इसकी स्थापना 25 अप्रैल 1977 को उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में हुई थी. संगठन की स्थापना मोहम्मद अहमदुल्लाह सिद्दीकी ने की थी.
शुरुआत में इसका उद्देश्य मुस्लिम युवाओं और छात्रों के बीच इस्लामी विचारधारा का प्रचार-प्रसार करना था हालांकि, बाद के वर्षों में संगठन पर कट्टरपंथी विचारधारा अपनाने और भारत की धर्मनिरपेक्ष व्यवस्था तथा लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ गतिविधियों में शामिल होने के आरोप लगे.
सिमी पर आरोप रहा है कि वह भारत में इस्लामी शासन स्थापित करने की विचारधारा का समर्थन करता था. सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, संगठन के कुछ सदस्यों के पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठनों, विशेषकर लश्कर-ए-तैयबा और हिज्बुल मुजाहिदीन से संपर्क थे.
जांच एजेंसियों ने सिमी के कई पूर्व सदस्यों को विभिन्न आतंकी गतिविधियों और बम धमाकों के मामलों में गिरफ्तार किया. इनमें कुछ लोगों के कथित तौर पर इंडियन मुजाहिदीन से भी संबंध सामने आए. हालांकि, सिमी और इंडियन मुजाहिदीन को अलग-अलग संगठन के रूप में देखा जाता है.
केंद्र सरकार ने पहली बार 27 सितंबर 2001 को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत सिमी पर प्रतिबंध लगाया था. इसके बाद समय-समय पर प्रतिबंध की अवधि बढ़ाई जाती रही. 29 जनवरी 2024 को केंद्र सरकार ने संगठन पर प्रतिबंध को पांच साल के लिए और बढ़ा दिया. इस फैसले की पुष्टि 24 जुलाई 2024 को UAPA ट्रिब्यूनल ने भी की.
गृह मंत्रालय के अनुसार, सिमी की गतिविधियां देश की संप्रभुता, सुरक्षा और अखंडता के लिए खतरा हैं. संगठन पर प्रतिबंध फिलहाल 30 जनवरी 2029 तक प्रभावी है.


