किसलय शानू
रांची : झारखंड के 24 जिलों में पर्यावरण संरक्षण के दृष्टिकोण से वायु और ध्वनि प्रदूषण रोकने के लिए झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद के सदस्य सचिव राजीव लोचन बक्शी ने बड़ा फैसला लिया है. राज्य में आगामी पर्व और त्योहार दीपावली, छठ, क्रिसमस और नव वर्ष जैसे त्योहारों के दौरान वायु एवं ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए सदस्य सचिव ने आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं.
परिषद के आदेश के अनुसार, राज्य के सभी जिलों के शहरी क्षेत्रों में पटाखे फोड़ने के लिए निर्धारित समय-सीमा का पालन करना अनिवार्य होगा. आदेश का उद्देश्य त्योहारों के दौरान बढ़ने वाले वायु और ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करना तथा आम लोगों को प्रदूषण के दुष्प्रभावों से बचाना है. आदेश का उल्लंघन करने वाले को कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है.
क्या है सदस्य सचिव की रिपोर्ट में
रिपोर्ट के अनुसार सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी के आदेशों के अनुपालन में यह निर्देश जारी किया गया है.सर्वोच्च न्यायालय, नई दिल्ली के वाद संख्या W.P. (Civil) No. 128/2015, अर्जुन गोपाल एवं अन्य बनाम भारत संघ एवं अन्य तथा राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के मूल आवेदन संख्या O.A. No. 249/2020 का उल्लेख किया गया है.
रिपोर्ट के अनुसार एक दिसंबर 2020 को हुई सुनवाई के बाद पारित आदेश के अनुपालन में वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1981 की धारा 31(ए) के तहत निर्देश जारी किए गए हैं. इनका पालन राज्य के सभी संबंधित जिलों में सुनिश्चित कराया जाना है.
दीपावली पर रात 8 से 10 बजे तक ही पटाखे चलाने की अनुमति
प्रदूषण नियंत्रण परिषद के आदेश में पटाखे चलाने के लिए अलग-अलग त्योहारों के अनुसार समय निर्धारित किया गया है.
दीपावली और गुरु पर्व के अवसर पर रात आठ बजे से रात दस बजे तक ही पटाखे चलाए जा सकेंगे. निर्धारित समय के अतिरिक्त पटाखे चलाने की अनुमति नहीं होगी.
छठ पर्व के दौरान सुबह छह बजे से सुबह आठ बजे तक पटाखे चलाने की अनुमति दी गई है.
वहीं, क्रिसमस और नववर्ष के अवसर पर रात 11 बजकर 55 मिनट से मध्यरात्रि 12 बजकर 30 मिनट तक ही पटाखे चलाए जा सकेंगे.इन निर्देशों के माध्यम से त्योहारों के दौरान पटाखों के अनियंत्रित इस्तेमाल को सीमित करने का प्रयास किया गया है.
कम प्रदूषण वाले पटाखों के इस्तेमाल पर जोर
आदेश के अनुसार, झारखंड के सभी जिलों के शहरी क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता स्तर की श्रेणी ‘अच्छी या संतोषप्रद’ (Good or Satisfactory-1-50 and 51-100) वाले क्षेत्रों में केवल निर्धारित मानकों के अनुरूप पटाखे चलाए जा सकेंगे.आदेश में ऐसे पटाखों के इस्तेमाल का निर्देश दिया गया है, जिनकी ध्वनि सीमा 125 डेसिबल (A) से कम हो.इस प्रावधान का उद्देश्य पटाखों से होने वाले ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करना है.त्योहारों के दौरान तेज आवाज वाले पटाखों से बच्चों, बुजुर्गों और अन्य लोगों को होने वाली परेशानी को कम करने के लिए निर्धारित मानकों का पालन महत्वपूर्ण होगा.
नियम तोड़ने वालों पर होगी कानूनी कार्रवाई
झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित निर्देशों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की जा सकती है.आदेश में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1981 की धारा 37 तथा पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 और अन्य संगत कानूनों के तहत विधिसम्मत कार्रवाई का उल्लेख किया गया है.कार्रवाई संबंधित सक्षम पदाधिकारियों की ओर से की जाएगी. इस संबंध में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा गया है.


