बांग्लादेश के 22 वर्षीय प्रवासी मजदूर नज्रुल इस्लाम को सऊदी अरब के मक्का में फांसी दे दी गई. करीब तीन साल से अधिक समय तक हिरासत में रहने के बाद 14 अक्टूबर को उसे एक महिला के साथ मृत्युदंड दिया गया. सऊदी अरब के गृह मंत्रालय के मुताबिक, दोनों को मक्का की एक मस्जिद के भीतर ‘अनुचित कृत्य’ करने के मामले में दोषी ठहराया गया था. हालांकि, मंत्रालय ने यह स्पष्ट नहीं किया कि आखिर वह कृत्य क्या था.
बांग्लादेशी अधिकारियों के अनुसार, सऊदी अरब से मिले रिकॉर्ड में नज्रुल और महिला को अगस्त 2023 में अलग-अलग आरोपों के तहत हिरासत में लिए जाने की जानकारी थी,
कौन था नज्रुल इस्लाम बासिर?
नज्रुल इस्लाम बांग्लादेश के ब्राह्मणबाड़िया जिले के सदर उपजिला अंतर्गत सुल्तानपुर यूनियन के बीरामपुर गांव का रहने वाला था. बांग्लादेशी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, वह अपने चार भाई-बहनों में सबसे बड़ा था.

परिवार की आर्थिक स्थिति बेहतर बनाने और रोजगार की तलाश में नज्रुल 10 नवंबर 2022 को सऊदी अरब गया था. वहां वह सफाईकर्मी के रूप में काम करता था. परिवार को उम्मीद थी कि विदेश में काम करके वह घर की आर्थिक स्थिति सुधार सकेगा और अपने भविष्य को बेहतर बना पाएगा.
लेकिन जिस बेहतर भविष्य की तलाश में नज्रुल विदेश गया था, वहां उसकी जिंदगी का अंत फांसी के साथ हुआ.
नज्रुल के पिता अब्दुल बासिर ने 7 लाख टका कर्ज लेकर रोजगार के लिए सउदी भेजा था. उसके पिता को उम्मीद थी कि उसका बेटा उसका कर्ज चुकाने में मदद करेगा.
किन आरोपों में हुई थी गिरफ्तारी?
द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, नज्रुल इस्लाम और स्वीटी अख्तर नाम की एक युवती को मक्का की एक मस्जिद में कथित रूप से ‘अनैतिक कृत्य’ करने के आरोप में सऊदी पुलिस ने गिरफ्तार किया था.
नज्रुल के परिवार के अनुसार, वह करीब तीन साल और तीन महीने तक हिरासत में रहा. इस दौरान वह हर रविवार को फोन पर अपने परिवार से बात करता था. उसकी मां रहीमा ने बताया कि जेल में रहने के दौरान नज्रुल नियमित रूप से परिवार के संपर्क में रहता था.
एक गोपनीय वाणिज्य दूतावास ज्ञापन और कैदी से जुड़े रिकॉर्ड में नज्रुल तथा स्वीटी को अगस्त 2023 में अलग-अलग आरोपों के तहत हिरासत में लिए जाने की जानकारी थी. इनमें एक मामले में साइबर अपराध और दूसरे में व्यभिचार का आरोप दर्ज होने की बात कही गई.
रिपोर्ट के अनुसार, इन रिकॉर्ड में मौत की सजा का उल्लेख नहीं था. वहीं, सऊदी अरब के गृह मंत्रालय ने बाद में बताया कि दोनों को मक्का की एक मस्जिद के भीतर अनुचित कृत्य करने के मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद फांसी दी गई.
सऊदी अरब में किस कानून के तहत दी गई फांसी?
सऊदी अरब के गृह मंत्रालय ने अपने बयान में बताया कि दोनों को ‘ताज़ीर’ के तहत मौत की सजा दी गई थी. इस्लामी न्यायशास्त्र में ताज़ीर ऐसी सजा को कहा जाता है, जिसमें अपराध और लागू होने वाली सजा का निर्धारण न्यायाधीश के विवेक पर निर्भर करता है. यह उन मामलों से अलग है, जिनमें सजा का प्रकार पारंपरिक इस्लामी कानून में स्पष्ट रूप से निर्धारित होता है.
द इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, नज्रुल के परिवार का कहना है कि उन्हें उसकी फांसी से पहले कोई जानकारी नहीं दी गई थी.
उसकी मां रहीमा ने बताया कि नज्रुल जेल में रहने के दौरान हर रविवार को परिवार से फोन पर बात करता था. लेकिन परिवार को इस बात का अंदाजा नहीं था कि उसे मौत की सजा दी जा सकती है.
परिजनों ने आरोप लगाया कि सऊदी अधिकारियों ने न तो उन्हें पहले से सूचना दी और न ही नज्रुल को अपना पक्ष रखने का अवसर दिए जाने के बारे में उन्हें कोई जानकारी मिली. नज्रुल के परिवार ने बांग्लादेश सरकार से मामले की जांच कराने और उसके शव को सरकारी खर्च पर स्वदेश लाने की मांग की है.
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