Close Menu
Johar LIVE
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Johar LIVEJohar LIVE
    • होम
    • जेपीएससी / जेएसएससी
    • क्राइम
    • राजनीति
    • बिजनेस
    • झारखंड
    • आदिवासी
    • बिहार
    • स्वास्थ्य
    • पर्यावरण
    • स्पेशल स्टोरी
    • खेल-सिनेमा
    • होम
    • जेपीएससी / जेएसएससी
    • क्राइम
    • राजनीति
    • बिजनेस
    • झारखंड
    • आदिवासी
    • बिहार
    • स्वास्थ्य
    • पर्यावरण
    • स्पेशल स्टोरी
    • खेल-सिनेमा
    Johar LIVE
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Home»जोहार ब्रेकिंग»जोहार शक्ति श्रृंखला भाग 5: मर्दों ने कहा नहीं बनायेंगे शौचालय, खुद बनी रानी मिस्त्री और पूरे गांव में बना दिया
    जोहार ब्रेकिंग

    जोहार शक्ति श्रृंखला भाग 5: मर्दों ने कहा नहीं बनायेंगे शौचालय, खुद बनी रानी मिस्त्री और पूरे गांव में बना दिया

    joharlive NetworkBy joharlive NetworkOctober 15, 2026No Comments10 Mins Read5
    Share Facebook Twitter Telegram WhatsApp Email Copy Link
    Share
    Facebook Twitter Telegram WhatsApp Email Copy Link

    विजय उराँव, जोहार लाइव संवाददाता

    दिन 8 मार्च 2019, अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस का दिन, जब पहली बार नारी शक्ति पुरस्कार का गौरव राष्ट्रपति के हाथों मिल रहा था, मेनका गांधी के साथ डिनर और प्रधानमंत्री के साथ फोटो सेसन हो रहा था. तो यह सम्मान सुनिता देवी के लिए बस कोई एक सपने जैसा था.

    वह लड़की जब स्कूल के दिनों में किताबों के लिए कोयला चुना करती थी, जिन्दगी में बहुत मुश्किलें देखी. यह सोच से भी परे थी. लेकिन सब पूरा हुआ उस काम से जिससे उन्होंने महिलाओं की जिंदगीं बदल दी. अब हजारों महिलाएं शौच के लिए जंगल, झाड़ नहीं जाती, उन्हें सांप, बिच्छु या जानवर का डर नहीं है. तो यह देन सुनिता देवी की है. जब मर्दों ने शौचाललय बनाने से मना कर दिया तो सुनिता ने स्वयं रानी मिस्त्री बनकर करणी उठाया और ईट जोड़ना शुरू किया. 1500 महिलाओं को रानी मिस्त्री बनाया.

    ये कहानी है झारखंड के लातेहार जिले की जालिम खुर्द पंचायत की मुखिया सुनीता देवी का. आज नवरात्र के अवसर पर ‘जोहार शक्ति’ शृंखला की पांचवीं कड़ी में प्रस्तुत है उनकी पूरी और विस्तृत कहानी.

    सुनीता देवी का जन्म 3 जनवरी 1989 लातेहार जिले के बसिया गांव के तैतरिया टोला में हुआ. उनके पिता का नाम बिरसू उरांव और मां का नाम अंबो देवी है. पांच भाई-बहनों वाले इस परिवार का बचपन भीषण आर्थिक तंगी के साए में बीता. उनके पिता अक्सर गंभीर रूप से बीमार रहते थे और बिस्तर पर ही रहते थे, जिसके कारण घर चलाना बहुत मुश्किल हो गया था. बड़ी बहन की कम उम्र में ही शादी कर दी गई थी, और ऐसे हालातों में सुनीता को बहुत कम उम्र से ही मजदूरी करनी पड़ी.

    गांव में जब स्कूल खुला, तो पढ़ाई के लिए कलम और कॉपी खरीदने तक के पैसे जुटाना उनके लिए आसान नहीं था. इसके लिए वे ज्यादा मेहनत करती थीं. वह कोयला चुनने जाती थीं और उसे बेचकर मिलने वाले 10-20 रुपये से अपनी पढ़ाई का सामान जुटाती थीं. बचपन की उम्र में उन्हें ट्रकों पर कोयला लादने जैसे बेहद कठिन और भारी शारीरिक श्रम वाले काम भी करने पड़े. इसके बावजूद उन्हें वयस्क मजदूरों के मुकाबले बहुत कम मजदूरी मिलती थी.

    एक समय ऐसा आया जब लगातार संघर्षों से तंग आकर सुनीता का पढ़ाई से मन उठ चुका था. पिता की बीमारी और घर के हालात देखकर उन्होंने साफ कह दिया कि अब वह पढ़ाई छोड़कर पूरी तरह मजदूरी करना चाहती हैं, ताकि परिवार की आर्थिक मदद कर सकें.

    ये भी पढ़ें : जोहार शक्ति शृंखला भाग-1: 14 साल की थी, शादी तय हुई, सैलून पहुंच कर लड़कों की तरह बाल कटवाया और तोड़ दिया रिश्ता

    पिता की दूरदर्शी सीख जो जीवन का आधार बनी

    उस मुश्किल मोड़ पर उनके पिता ने उन्हें जो समझाया, वह सुनीता के जीवन का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ. उनके पिता ने उन्हें समझाया कि जिस जमीन पर वह मजदूरी कर रही हैं, वह उनकी अपनी नहीं है, और जिस घर में वे रह रहे हैं, वहां भी भविष्य में उनका कोई कानूनी अधिकार सुरक्षित नहीं है. पिता ने कहा कि केवल शिक्षा ही एकमात्र ऐसा जरिया है जो उन्हें आत्मनिर्भर बना सकती है.

    पिता ने उन्हें समझाया था कि अगर उनकी बेटी पढ़-लिख जाएगी, तो कोई उससे जबरन मिट्टी कटवाने को कहेगा, तो वह अपना रास्ता खुद चुन सकेगी; अगर उसे लिखने को कहा जाएगा, तो वह लिख सकेगी और यदि मंच पर बोलने को कहा जाएगा, तो वह निडर होकर बोल सकेगी. शिक्षा ही उसे हर परिस्थिति में अपने पैरों पर खड़ा होने की असली ताकत देगी.

    पिता की यही प्रेरणा सुनीता के जीवन की सबसे बड़ी पूंजी बन गई. उन्होंने मजदूरी करते हुए भी अपनी पढ़ाई जारी रखी और बाद में राजनीतिक विज्ञान से स्नातक (ग्रेजुएशन) और फिर एमए तक की उच्च शिक्षा प्राप्त की.

    ये भी पढ़ें : जोहार शक्ति शृंखला भाग-2: लोग क्या कहेंगे को दिखाया ठेंगा और जिल्लत भरी शादी को छोड़ बैंड-बाजे के साथ आई मायके, देश भर में हुई चर्चा

    शादी के बाद का जीवन

    वर्ष 2010 में विवाह के बाद सुनीता देवी उदयपुरा गांव आईं. उनके मुताबिक, जिस ससुराल में उनका विवाह हुआ था, वह आर्थिक रूप से अपेक्षाकृत ठीक-ठाक था, लेकिन उनके पति कोई नियमित नौकरी या काम नहीं करते थे. जब उन्होंने गांव की अन्य गरीब महिलाओं को रोजमर्रा की जिंदगी के लिए संघर्ष करते देखा, तो उन्हें अपने बचपन के दिन याद आ गए.

    उन्हें गहराई से महसूस हुआ कि महिलाओं की समस्याओं को दूर करने के लिए केवल संवेदनाएं जताना काफी नहीं है, बल्कि उन्हें एक मंच पर लाना होगा ताकि वे अपनी आवाज उठा सकें और संकट के समय एक-दूसरे का संबल बन सकें.

    इसी सोच के साथ उन्होंने सबसे पहले गांव की 12 महिलाओं को संगठित करके एक छोटा स्वयं सहायता समूह बनाया. महिलाएं नियमित रूप से बैठकों में मिलने लगीं, छोटी बचत करने लगीं और अपने सुख-दुख आपस में बांटने लगीं. समूहों का लेखा-जोखा रखना और महिलाओं को जोड़े रखना सुनीता की जिम्मेदारी बन गया. धीरे-धीरे गांव में महिला समूहों की संख्या बढ़कर 12 तक पहुंच गई. आंध्र प्रदेश से आई टीम और जेएसएलपीएस से जुड़ी पहलों के माध्यम से इन समूहों को और अधिक मजबूती मिली. सुनीता इन समूहों की एक सक्रिय कड़ी के रूप में जानी जाने लगीं और महिलाओं को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए प्रखंड कार्यालयों तक दौड़ लगाने लगीं.

    महिलाओं के साथ काम करने के दौरान सुनीता स्वच्छ भारत मिशन से जुड़ गईं. उनके गांव में शौचालय निर्माण की योजना आई, तो उन्होंने इसे महिलाओं की सुरक्षा, अस्मिता और सम्मान का सबसे बड़ा प्रश्न माना.

    गांव की महिलाओं की दिनचर्या का एक बेहद पीड़ादायक पहलू यह था कि उन्हें सुबह अंधेरे में शौच के लिए जंगल या झाड़ियों की तरफ जाना पड़ता था. कई महिलाएं सुरक्षा और गोपनीयता के डर से सुबह चार बजे ही उठ जाती थीं. जहरीले सांपों, जंगली जानवरों और असामाजिक तत्वों का डर हमेशा बना रहता था. सुनीता ने गरीब परिवारों की महिलाओं की सूची तैयार कर उसे जिला स्तर तक पहुंचाया.

    अपने गाँव में सुनीता देवी

    लेकिन सबसे बड़ी व्यावहारिक बाधा यह थी कि गांव में शौचालय बनाने के लिए कोई राजमिस्त्री तैयार नहीं हो रहा था. पारंपरिक राजमिस्त्री बड़े भवनों में महीनों का काम छोड़कर छोटे शौचालय बनाने में रुचि नहीं लेते थे क्योंकि इसमें केवल 3-4 दिन का काम होता था.

    अधिकारियों की बैठकों में सुनीता से सवाल पूछे जाते थे कि काम पूरा क्यों नहीं हुआ और चेतावनी दी जाती थी कि काम न होने पर फंड वापस करना पड़ेगा.

    जब कोई पुरुष राजमिस्त्री आगे नहीं आया, तो सुनीता ने खुद पहल की और अधिकारियों के सामने प्रस्ताव रखा कि महिलाओं को ही राजमिस्त्री का तकनीकी प्रशिक्षण दिया जाए. इसके बाद आयोजित तीन दिवसीय प्रशिक्षण में सुनीता और उनके गांव की कुछ अन्य महिलाओं ने हिस्सा लिया. यहीं से उनके ‘रानी मिस्त्री’ बनने की ऐतिहासिक शुरुआत हुई.

    ये भी पढ़ें : जोहार शक्ति शृंखला भाग-3: दिहाड़ी मजदूर मां की एशियन चैंपियन बेटी, कहानी दीपिका सोरेंग की

    जब ताने मिले, बनाई दीवार तक गिरा दी गई

    महिलाओं के लिए ईंट-साहुल और करणी उठाना और निर्माण कार्य करना आसान नहीं था. समाज की रूढ़िवादी सोच ने हर कदम पर उनका रास्ता रोकने की कोशिश की. लोगों ने उन्हें ताने मारे कि महिलाएं अब “मर्द” बन गई हैं और पुरुषों वाला काम कर रही हैं.

    विरोध सिर्फ तानों तक सीमित नहीं था. कई बार महिलाएं दिनभर मेहनत करके दीवार खड़ी करतीं, लेकिन रात में कुछ लोग उसे गिरा देते, गड्ढों को भर देते या बालू-ईंटें बिखेर देते. इस भारी मानसिक दबाव और सामाजिक विरोध के कारण शुरुआती दौर में साथ आईं कई महिलाएं पीछे हट गईं और उनके परिवारों ने भी उन पर दबाव बनाया.

    लेकिन सुनीता ने हिम्मत नहीं हारी. उन्होंने बची हुई महिलाओं को ढांढस बंधाया और समझाया कि यह संघर्ष किसी व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि गांव की बहु-बेटियों की इज्जत और सुरक्षा के लिए है. धीरे-धीरे उनकी मेहनत रंग लाई. उन्होंने और उनकी टीम ने अपने गांव में लगभग 100 शौचालय खुद अपने हाथों से बनाए.

    उनकी इस सफलता को देखते हुए उन्हें राज्य स्तर पर विशेष प्रशिक्षण मिला, जिसमें कम जमीन पर और दिव्यांगजनों की सुविधानुसार शौचालय बनाने की तकनीक सिखाई गई. इसके बाद उन्होंने लातेहार जिले भर में अभियान चलाया और लगभग 1500 महिलाओं को ‘रानी मिस्त्री’ के रूप में प्रशिक्षित किया. गांवों में रात्रि चौपाल लगाने, सुबह तड़के सीटी बजाकर लोगों को खुले में शौच से रोकने और फूलों से समझाने के अनूठे तरीकों से उन्होंने अपने पूरे क्षेत्र को ओडीएफ (खुले में शौच मुक्त) बनाने में अहम भूमिका निभाई.

    सुनिता बताती हैं कि जब लोग खुले में शौच जाते थे तो उन्हें गुलाब का फूल दिया जाता था, विरोध के रूप में.

    गांव में खुद करणी पकड़ शौचालय बनाती रानी मिस्त्री महिलाएं

    राष्ट्रपति सम्मान का सफर

    सुनीता देवी के कार्यों का दायरा केवल उनके अपने गांव तक सीमित नहीं रहा. मनिका क्षेत्र के एक जंगल सरकार (नक्सल प्रभावित) गांव में जब शौचालय निर्माण और फंड वितरण को लेकर गतिरोध उत्पन्न हुआ, तो उनके परिवार ने वहां जाने से मना किया क्योंकि वहां सुरक्षा का गंभीर खतरा था. लेकिन सुनीता ने स्पष्ट कहा कि महिलाओं के सम्मान से बढ़कर उनके लिए कुछ नहीं है. जान जाए तो भी फिक्र नहीं है. वह उस क्षेत्र में गईं, लोगों से संवाद किया और अंततः वहां भी निर्माण कार्य सुचारू रूप से पूरा करवाया.

    उनके इन अतीव साहसिक और परिवर्तनकारी कार्यों को राष्ट्रीय पटल पर पहचान मिली. राजस्थान के उदयपुर में आयोजित स्वच्छता सम्मेलन में उन्हें झारखंड का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला, जहां उन्होंने पहली बार हवाई जहाज (एयर इंडिया) की यात्रा की और राष्ट्रीय स्तर के मंच पर अपने अनुभव साझा किए.

    सुनिता देवी बताती हैं कि वहीं से उनका नाम राष्ट्रपति के पुरस्कार के लिए सुझाया गया.
    अंततः, उनके संघर्ष का सबसे गौरवशाली क्षण 8 मार्च 2019 (अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस) को आया, जब तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने नई दिल्ली में उन्हें प्रतिष्ठित ‘नारी शक्ति पुरस्कार’ से सम्मानित किया. मेनका गांधी से डिनर करने का मौका मिला और प्रधानमंत्री के साथ मन की बात औऱ फोटो सेसन का भी मौका मिला. इसके साथ उनके कार्यों पर विशेष वीडियो भी प्रसारित किया गया था और उन्हें राष्ट्रपति भवन में विशिष्ट अतिथियों के साथ समय बिताने का अवसर मिला.

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ सामूहिक फ़ोटो में सुनीता देवी

    मुखिया बनी, अब आगे क्या

    राष्ट्रपति सम्मान मिलने के बाद जब सुनीता देवी अपने क्षेत्र में लौटीं, तो उनकी लोकप्रियता और जनसमर्थन और अधिक मजबूत हो गया. जनता के भारी आग्रह पर उन्होंने पंचायत चुनाव लड़ा और जालिम खुर्द पंचायत की मुखिया चुनी गईं.

    मुखिया बनने के बाद उन्होंने अपने पद का उपयोग केवल औपचारिकता के लिए नहीं किया, बल्कि ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन (SLRM) जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रमों को जमीन पर उतारकर गांव को स्वच्छ और स्वस्थ बनाने का बीड़ा उठाया. हालांकि चुनाव से जुड़े प्रशासनिक कारणों से कुछ समय के लिए यह काम रुका है, लेकिन उनका संकल्प अडिग है.
    सुनीता देवी मानती हैं कि पद आए या जाए, जनता की सेवा करने का उनका रास्ता कभी नहीं रुकेगा. उनके परिवार में उनके पति, बेटी और पुत्र हैं, जो उनकी इस सामाजिक यात्रा में उनके साथ हैं.

    Also Read : जोहार शक्ति शृंखला – 4 : मां दुर्गा जैसी हिम्मत लेकर रेड लाइट नेटवर्क में पहुंचीं महिमा सिंह, 400-500 लड़कियों को दिया नया जीवन

    Johar @8 AM सुनीता देवी सुनीता रानीमिस्त्री
    Follow on Facebook Follow on X (Twitter) Follow on Instagram Follow on YouTube Follow on WhatsApp Follow on Telegram
    Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Telegram WhatsApp Email Copy Link
    Previous Articleनवरात्रि के छठे दिन करें मां कात्यायनी की पूजा, विवाह की बाधाओं से मुक्ति के लिए जानें विधि और मंत्र
    Next Article फिर क्यों उठा अंकिता भंडारी हत्याकांड का मामला, कौन हैं दुष्यंत कुमार गौतम जिनकी राज्यपाल नियुक्ति का हो रहा विरोध

    Related Posts

    जोहार ब्रेकिंग

    फिर क्यों उठा अंकिता भंडारी हत्याकांड का मामला, कौन हैं दुष्यंत कुमार गौतम जिनकी राज्यपाल नियुक्ति का हो रहा विरोध

    October 15, 2026
    जोहार ब्रेकिंग

    नवरात्रि के छठे दिन करें मां कात्यायनी की पूजा, विवाह की बाधाओं से मुक्ति के लिए जानें विधि और मंत्र

    October 15, 2026
    क्राइम

    झारखंड : जेल में 26 साल रहने के बाद भी गैंगस्टर अनिल शर्मा की नहीं होगी रिहाई, हाईकोर्ट ने सरकार के फैसले को किया रद्द

    October 14, 2026
    जोहार ब्रेकिंग

    प्रखंड स्तर पर बनेंगे कस्टम हायरिंग सेंटर, गांवों में बनेंगे पक्के थ्रेसिंग फ्लोर : शिल्पी नेहा तिर्की

    October 14, 2026
    झारखंड

    झारखंड : दुर्गा पूजा में रोशनी के लिए रांची नगर निगम ने 927 स्ट्रीट लाइटें की दुरुस्त, यहां करें खराब स्ट्रीट लाइट की शिकायत

    October 14, 2026
    जोहार ब्रेकिंग

    प्रधानमंत्री बनने के बाद भी बेटे का रिपोर्ट कार्ड लेने गए थे स्कूल लाल बहादूर शास्त्री, बेटे अनिल शास्त्री ने खोले राज

    October 14, 2026
    Latest Posts

    फिर क्यों उठा अंकिता भंडारी हत्याकांड का मामला, कौन हैं दुष्यंत कुमार गौतम जिनकी राज्यपाल नियुक्ति का हो रहा विरोध

    October 15, 2026

    जोहार शक्ति श्रृंखला भाग 5: मर्दों ने कहा नहीं बनायेंगे शौचालय, खुद बनी रानी मिस्त्री और पूरे गांव में बना दिया

    October 15, 2026

    नवरात्रि के छठे दिन करें मां कात्यायनी की पूजा, विवाह की बाधाओं से मुक्ति के लिए जानें विधि और मंत्र

    October 15, 2026

    झारखंड : दुर्गा पूजा को लेकर राँची पुलिस अलर्ट, रूट प्लान और सुरक्षा व्यवस्था का लिया जायजा

    October 14, 2026

    झारखंड : जेल में 26 साल रहने के बाद भी गैंगस्टर अनिल शर्मा की नहीं होगी रिहाई, हाईकोर्ट ने सरकार के फैसले को किया रद्द

    October 14, 2026
    Facebook X (Twitter) Instagram
    © 2026 Johar LIVE. | About Us | AdSense Policy | Privacy Policy | Terms and Conditions | Contact Us.

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.