मुस्कान चौधरी, जोहार लाइव संवाददाता
रांची की साक्षी गुप्ता की वह तस्वीर शायद आपको याद होगी. एक बेटी शादी के बाद अपने ससुराल से वापस मायके लौट रही थी, लेकिन इस बार न तो घर के बाहर मायूसी थी और न ही परिवार के चेहरे पर हार का भाव. बेटी को घर वापस लाने के लिए बैंड-बाजा बज रहा था, आतिशबाजी हो रही थी और माहौल किसी बारात जैसा था. यह कोई नई शादी नहीं थी. यह एक पिता की ओर से अपनी बेटी को सम्मान के साथ घर वापस लाने की कोशिश थी.
अक्टूबर 2023 में साक्षी के पिता प्रेम गुप्ता ने जब अपनी बेटी को इस तरह घर वापस लाया, तो यह घटना देशभर में चर्चा का विषय बन गई. इस घटना ने उस सोच पर सवाल खड़ा किया, जिसमें शादी टूटने के बाद अक्सर लड़की को ही सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया जाता है. प्रेम गुप्ता का संदेश साफ था कि रिश्ता टूटने से बेटी की इज्जत कम नहीं हो जाती.
लेकिन बैंड-बाजे के साथ हुई उस घर वापसी के पीछे आखिर क्या कहानी थी? शादी के बाद ऐसा क्या हुआ कि एक पिता को अपनी बेटी को इस तरह ससुराल से वापस लाने का फैसला करना पड़ा? साक्षी ने अब बातचीत में अपनी शादी, ससुराल में कथित प्रताड़ना, पैसे की मांग, पति की पिछली शादियों के बारे में जानकारी मिलने और पुलिस-कचहरी के चक्कर लगाने से जुड़े अपने अनुभव साझा किए हैं.
उनकी बातों में एक ऐसी लड़की की कहानी सामने आती है, जिसने शादी को बचाने की कोशिश की, परिवार और समाज के दबाव का सामना किया, कानूनी लड़ाई लड़ी और आखिरकार अपनी जिंदगी को नए सिरे से शुरू करने का फैसला किया.
बुने सपने बिखरने लगे
साक्षी गुप्ता की शादी 28 अप्रैल 2022 को सज्जन कुमार (बदला हुआ नाम) से हुई थी. साक्षी के मुताबिक, यह अरेंज मैरिज थी. शादी के समय उनकी उम्र करीब 22 साल थी. उन्होंने बताया कि सचिन की उम्र उन्हें 28 साल बताई गई थी. साक्षी के अनुसार, सज्जन झारखंड के बिजली विभाग में अधिकारी के पद पर कार्यरत थे और उनकी पोस्टिंग रांची में थी.
शादी के समय साक्षी और उनके परिवार ने इस रिश्ते से नई जिंदगी की उम्मीदें जोड़ी थीं. परिवार ने शादी में काफी खर्च किया था. साक्षी के अनुसार, उनके पिता ने शादी में करीब 25 लाख रुपये खर्च किए और लगभग 16 लाख रुपये का सोना दिया. एक बेटी के विवाह के लिए परिवार ने जो तैयारियां की थीं, उनके पीछे यही उम्मीद थी कि वह अपने नए घर में सम्मान और सुरक्षा के साथ जीवन बिताएगी.
लेकिन साक्षी का दावा है कि शादी के कुछ ही दिनों बाद परिस्थितियां बदलने लगीं.
साक्षी कहती हैं, शादी के करीब 20 दिन बाद उनसे मायके से 4 लाख रुपये लाने की मांग की गई. उन्होंने बताया कि ससुराल की तरफ से पैसे की जरूरत बताई गई थी. उनके पिता ने यह रकम दे भी दी. लेकिन साक्षी के अनुसार, पैसे देने के बाद भी उनके साथ व्यवहार में कोई खास बदलाव नहीं आया.
इसी बीच परिवार पर एक और मुश्किल आ गई. साक्षी बताती हैं कि शादी के करीब 28 दिन बाद उनके पिता को मुंह के कैंसर की जानकारी मिली. जिस समय उनके पिता को इलाज और परिवार के सहारे की जरूरत थी, उसी दौरान साक्षी खुद भी ससुराल में परेशानियों का सामना करने का दावा कर रही थीं.
साक्षी के मुताबिक, उन्हें अपने मायके वालों से मिलने में परेशानी होने लगी. वो कहती हैं, कभी मुझे कमरे में बंद कर दिया जाता था, तो कभी छत पर जाने के बाद वहीं बंद रखा जाता था. यहां तक कि कई बार बारिश के दौरान भी मुझे छत पर बंद रखा गया. ऐसी स्थिति में उन्हें मदद के लिए आवाज लगानी पड़ती थी. आसपास के लोग मेरी आवाज सुनकर मदद के लिए आते थे. मेरी सास मुझे डंडे से मारती थी. हालात ऐसे हो गए थे कि वह खुद को असहाय महसूस करने लगी थीं.
साक्षी बताती हैं कि शादी के करीब एक महीने बाद उनके साथ मारपीट की घटना हुई. जब उनके पिता को इस बारे में जानकारी मिली, तो उन्होंने बेटी को समझाने के साथ यह भी कहा कि अगर शादी में इस तरह की परिस्थितियां हैं, तो इसे आगे चलाना मुश्किल है.
हालांकि मेरे माता-पिता ने उन्हें कभी यह नहीं कहा कि समाज के डर से हर हाल में ससुराल में रहना ही होगा. उनके परिवार ने उनकी परेशानी को गंभीरता से लिया. इसके बावजूद साक्षी के लिए शादी से बाहर निकलने का फैसला आसान नहीं था.
क्या कहेंगे लोग
एक तरफ वह अपने वैवाहिक जीवन को लेकर परेशान थीं, तो दूसरी तरफ समाज की प्रतिक्रिया का डर भी था. तलाक या शादी टूटने के बाद लोग क्या कहेंगे, परिवार की प्रतिष्ठा पर क्या असर पड़ेगा और आगे जिंदगी कैसे चलेगी, ऐसे सवाल उनके मन में थे.
साक्षी के मुताबिक, आसपास के लोगों की ओर से उन्हें समझौता करने और एडजस्ट करने की सलाह भी दी जाती थी. लेकिन उनके माता-पिता का रुख अलग था. उनका मानना था कि बेटी की जिंदगी और सुरक्षा किसी भी सामाजिक धारणा से ज्यादा महत्वपूर्ण है.
इस मुश्किल दौर में साक्षी के बड़े भाई और दादी ने भी उनका साथ दिया. साक्षी ने दादी से जुड़ी एक भावुक बात साझा की. उनके मुताबिक, दादी ने भरोसा दिलाया था कि जिस सम्मान के साथ बेटी को घर से विदा किया गया था, उसी सम्मान के साथ उसे वापस लाया जाएगा. यह भरोसा साक्षी के लिए मुश्किल समय में सहारा बना.
साक्षी ने शादी में हुए खर्च और उसके बाद की कथित मांगों का भी जिक्र किया. उनके मुताबिक, पिता ने विवाह में करीब 25 लाख रुपये खर्च किए थे और लगभग 16 लाख रुपये का सोना दिया था. इसके बावजूद उनसे और पैसे की मांग की जा रही थी. साक्षी ने फ्लैट की मांग किए जाने का भी आरोप लगाया है. उन्होंने दावा किया कि उनके पैसे और गहने भी गायब हुए थे.

पुलिस और अदालत के चक्कर लगाने में बीता समय
मुश्किलें अभी खत्म नहीं हुई थी. साक्षी बताती हैं, शिकायत करने से लेकर कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाने तक उन्हें करीब डेढ़ साल तक संघर्ष करना पड़ा. जब वह पुलिस के पास जाती थीं, तो उन्हें अपने पति और ससुराल पक्ष की ओर से पहले से अदालत में आवेदन दिए जाने की बात सुनने को मिलती थी. तलाक के दौरान ससुराल पक्ष की ओर से कुछ दस्तावेजों में उन्हें मानसिक रूप से अस्वस्थ बताने की कोशिश की गई थी. उनके मुताबिक, ऐसी बातों से उनकी परेशानी और बढ़ गई. वह एक तरफ अपने साथ हुई कथित घटनाओं को सामने लाना चाहती थीं, दूसरी तरफ उन्हें अपनी बात साबित करने और कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था.
इस पूरे दौर में साक्षी के लिए मानसिक दबाव लगातार बना रहा. उन्हें अपने भविष्य, परिवार और समाज की प्रतिक्रिया को लेकर चिंता थी. लेकिन उनके मुताबिक, माता-पिता और दादी ने उन्हें यह समझाया कि किसी भी रिश्ते को बचाने की जिम्मेदारी केवल लड़की की नहीं होती और गलत परिस्थितियों में जिंदगी को रोक देना जरूरी नहीं है.
साक्षी ने बातचीत में बताया कि उनका तलाक जुलाई 2024 के आसपास हुआ था.
तलाक के बाद जीवन को आगे बढ़ाने की चुनौती
शादी टूटने के बाद साक्षी के सामने एक नई चुनौती थी. उन्हें उस जीवन से बाहर निकलना था, जिसकी शुरुआत उन्होंने कई उम्मीदों के साथ की थी. अब सवाल था कि वह अपने भविष्य को किस तरह आगे बढ़ाएंगी.
साक्षी के मुताबिक, 2024 में वह दिल्ली चली गईं. उन्होंने रांची से बाहर जाकर अपनी जिंदगी नए सिरे से शुरू करने का फैसला किया. अब वह दिल्ली के रमेश नगर इलाके में बुटीक चलाती हैं. उन्होंने यह भी बताया कि अपने भाई के साथ मिलकर आईटी सेक्टर में स्टार्टअप शुरू किया था.

साक्षी के लिए यह बदलाव केवल शहर बदलने या काम शुरू करने तक सीमित नहीं था. यह उस दौर से बाहर निकलने की कोशिश भी थी, जिसमें शादी, पारिवारिक विवाद और कानूनी प्रक्रिया उनके जीवन का बड़ा हिस्सा बन गए थे.
उनकी कहानी में परिवार की भूमिका खास है. जहां साक्षी अपने ससुराल में कथित प्रताड़ना और कानूनी संघर्ष की बात करती हैं, वहीं अपने मायके को ऐसे स्थान के रूप में याद करती हैं, जहां उन्हें वापस आने पर सवालों के बजाय सहारा मिला.
बैंड-बाजे वाली घर वापसी का असली संदेश
फिर भी, इस कहानी का एक सामाजिक पहलू ऐसा है, जो साक्षी के व्यक्तिगत विवाद से आगे जाता है. हमारे समाज में शादी टूटने पर अक्सर लड़की को ही सफाई देनी पड़ती है. उसे समझौता करने, चुप रहने या समाज की इज्जत के लिए रिश्ता निभाते रहने की सलाह दी जाती है. ऐसे माहौल में प्रेम गुप्ता का अपनी बेटी को सम्मान के साथ घर वापस लाने का फैसला एक अलग संदेश देता है.
साक्षी की कहानी यह भी दिखाती है कि किसी रिश्ते से बाहर निकलना एक दिन में लिया गया फैसला नहीं होता. इसके पीछे डर, परिवार की चिंता, सामाजिक दबाव, आर्थिक सवाल और लंबी कानूनी प्रक्रिया हो सकती है. किसी के लिए नई शुरुआत का मतलब अपना काम शुरू करना है, तो किसी के लिए फिर से अपने फैसलों पर भरोसा करना.
बैंड-बाजे के साथ हुई साक्षी की घर वापसी की तस्वीर लोगों को इसलिए याद रह गई, क्योंकि उसमें एक पिता अपनी बेटी के साथ खड़ा दिखाई दिया था. अब साक्षी के बताए अनुभव उस तस्वीर के पीछे की कहानी को और विस्तार देते हैं. उनकी जिंदगी का अगला अध्याय दिल्ली में काम और नई शुरुआत के साथ आगे बढ़ रहा है.
(नोट : साक्षी के लगाए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और उनके पूर्व पति का पक्ष जानना भी जरूरी है. इसलिए इस कहानी में उन बातों को साक्षी के दावों और अनुभवों के रूप में ही समझा जाना चाहिए.)

