जोहार लाइव ब्यूरो
मध्यप्रदेश में बीजेपी की अंदरूनी कलह हर दिन बढ़ती जा रही है. मामला राज्य के दो कद्दावर नेताओं के बीच टकराव को लेकर है. राज्य के तीन बार सीएम और अब केंद्रीय मंत्री बने शिवराज सिंह चौहान और वर्तमान सीएम मोहन यादव के बीच राजनीतिक अदावत अब खुलकर सामने आ गई है.
दरअसल, शिवराज सिंह चौहान के संसदीय क्षेत्र विदिशा के बुधनी विधानसभा के कुसमी गांव में वन विभाग ने वर्षों से वहां रह रहे आदिवासी परिवारों के घरों को बुलडोजर से तोड़ दिया.
यह पहली बार नहीं है जब शिवराज सिंह चौहान के लोकसभा क्षेत्र में मोहन यादव की सरकार ने गरीब आदिवासियों के घर तोड़े हैं. दूसरी बार जब यही घटना दोहराई गई, तो शिवराज खुद धरने पर बैठ गए.
लोगों की आपबीती सुनने के बाद केंद्रीय कृषि मंत्री भड़क गए. मीडिया से बात करते हुए उन्होंन कहा, ‘मेरे क्षेत्र में जुल्म की पराकाष्ठा हुई है. अन्याय की इंतहा हुई है. सवेरे तक जो घर आबाद थे, जहां बच्चों की किलकारियां गूंजती थीं, वहां बच्चों की चीखें गूंज रही हैं. महिलाएं छातियां पीट-पीटकर रो रही हैं. उनके घर गिरा दिए गए.
वो आगे कहते हैं, उनके घर के नीचे ही उनकी फसल दबा दी गई. उनकी मेहनत कुचल दी गई. बरसों पुराने घर थे उनके, आज चौपट और तबाह कर दिए गए और जिन्होंने किए, वे इतने हृदयहीन हैं, संवेदन शून्य हैं. मैं तो उनसे कहता हूं कि तुम्हारे बच्चे बिलखेंगे, तो तुमको कैसा लगेगा. तुम्हारे बच्चे नहीं हैं क्या, तुम्हारी पत्नियां नहीं हैं क्या, तुम्हारी माताएं नहीं हैं क्या.’
शिवराज यहीं नहीं रुके. उन्होंने कहा, ये वो भाई – बहन हैं जो यहां वर्षों से जमीन पर खेती कर रहे हैं. इसी से इनकी रोजी रोटी चलती है. जब मैं एमएलए-एमपी नहीं था, तब भी इनके बीच आता था. आज वन विकास निगम वालों ने इनके सारे अरमान उजाड़ दिए. मेहनत से बोई फसल कुचल दी. घरों को खंडहरों में तब्दील कर दिया.
शिवराज सिंह चौहान ने कहा, चूल्हे चक्की कुछ भी नहीं बचे. बच्चे सबेरे से भूखे बैठे हैं. ये सब हमारा परिवार है. इस अन्याय की जानकारी मुख्यमंत्री मोहन यादव को देना है. सिसकती हुई इनकी सिसिकियां, इनके आंखों के आंसू, इनके कुचले हुए खेत, उनका चौपट किया हुआ भविष्य , सब माननीय मुख्यमंत्री को बताउंगा. ये वो लोग हैं जो हमेशा बीजेपी को ही वोट देते थे.

