बोकारो : झारखंड के बोकारो जिले में वेदांता समूह की कंपनी ईएसएल स्टील लिमिटेड के प्लांट में गैस की चपेट में आने से दो कर्मचारियों की मौत हो गई. घटना 11 अक्टूबर 2026 को चंदनकियारी के सियालजोरी स्थित प्लांट के ब्लास्ट फर्नेस-1 में हुई. मृतकों की पहचान सोहन महतो और समीर अंसारी के रूप में हुई है. प्रारंभिक जांच में कार्बन मोनोऑक्साइड गैस की चपेट में आने की आशंका जताई गई है.
सोहन महतो कंपनी में एग्जीक्यूटिव ऑफिसर के पद पर कार्यरत थे, जबकि समीर अंसारी कंपनी के एक बिजनेस पार्टनर के यहां इंजीनियर थे. घटना के बाद जिला प्रशासन और फैक्ट्री निरीक्षण विभाग ने जांच शुरू कर दी है. कंपनी ने भी घटना की स्वतंत्र जांच कराने और प्रभावित परिवारों को सहयोग देने की बात कही है.
घटना के बाद सोहन महतो के परिवार को 60 लाख रुपये मुआवजा देने और परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने पर सहमति बनी है. इसमें अंतिम संस्कार के लिए तत्काल दो लाख रुपये दिए गए. शेष 58 लाख रुपये तीन महीने के भीतर परिवार के बैंक खाते में जमा किए जाने हैं.
समीर अंसारी के परिवार के लिए मुआवजे और नौकरी को लेकर उपलब्ध जानकारी में कोई स्पष्ट विवरण सामने नहीं आया है.
72 घंटे में जांच रिपोर्ट देने का निर्देश
बोकारो के उपायुक्त अजय नाथ झा के अनुसार, चास के अनुमंडल पदाधिकारी प्रांजल दंडा ने कार्यपालक दंडाधिकारी जया कुमारी और फैक्ट्री इंस्पेक्टर शिवानंद लागुरी को घटनास्थल का निरीक्षण कर 72 घंटे के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है.
मुख्य कारखाना निरीक्षक मनीष कुमार सिन्हा ने प्रारंभिक तौर पर कार्बन मोनोऑक्साइड गैस की आशंका जताई है. हालांकि, हादसे की वास्तविक वजह जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद स्पष्ट होगी.
वेदांता के प्लांट में पहले भी हो चुके हैं हादसे
इंडिया टुडे हिंदी के रिपोर्ट के अनुसार, वेदांता समूह की इकाइयों में इससे पहले भी जानलेवा औद्योगिक हादसे हो चुके हैं. 23 सितंबर 2009 को छत्तीसगढ़ के कोरबा स्थित बाल्को के कैप्टिव पावर प्लांट में निर्माणाधीन करीब 240 मीटर ऊंची चिमनी ढह गई थी. इस हादसे में 45 मजदूरों की मौत हुई थी और 50 से अधिक लोग घायल हुए थे.
28 सितंबर 2021 को बोकारो के इसी ईएसएल स्टील प्लांट में बंद ब्लास्ट फर्नेस की मरम्मत के दौरान ऊंचाई से गिरने के कारण तीन मजदूरों की मौत हुई थी. मृतकों की पहचान शाहनवाज आलम, मोहम्मद ओसामा और मोहम्मद सुल्तान के रूप में हुई थी.
14 अप्रैल 2026 को छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले के सिंहितराई स्थित वेदांता पावर प्लांट में बॉयलर ट्यूब फटने से बड़ा हादसा हुआ था.
पत्रकार आनंद दत्त की 16 अप्रैल की रिपोर्ट में उस समय 17 मौतों का उल्लेख था. बाद में मृतकों की संख्या बढ़कर 25 हो गई.
सुरक्षा व्यवस्था पर फिर उठे सवाल
प्रकाशित रिपोर्ट में वेदांता की वित्त वर्ष 2020 की वार्षिक रिपोर्ट के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया था कि काम से जुड़े हादसों में कंपनी के सात कर्मचारियों की जान गई थी. रिपोर्ट के अनुसार, सुरक्षा से जुड़ी 70 प्रतिशत घटनाएं दोबारा हुई घटनाएं थीं और 90 प्रतिशत से अधिक घटनाओं का असर बिजनेस पार्टनर तथा ठेका कर्मचारियों पर पड़ा था.
बोकारो के ईएसएल प्लांट में दो कर्मचारियों की मौत के बाद एक बार फिर औद्योगिक इकाइयों में गैस सुरक्षा, कार्यस्थल पर निगरानी और कर्मचारियों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हुए हैं. जांच रिपोर्ट से स्पष्ट होगा कि हादसा किन परिस्थितियों में हुआ और सुरक्षा व्यवस्था में कहीं चूक हुई थी या नहीं.

