रांची : राजधानी रांची के खेलगांव स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IIIT) में फर्स्ट ईयर के छात्र आदित्य की मौत के बाद विद्यार्थियों का आक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा है. सोमवार को भी छात्र कैंपस के बाहर लगातार विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं. छात्र की मौत के साथ-साथ संस्थान में बुनियादी सुविधाओं और आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं.
बिहार के पूर्णिया निवासी आदित्य का शव शनिवार रात हॉस्टल के कमरे में मिला था. बताया गया कि रात करीब 11:30 बजे तक कमरे का दरवाजा नहीं खुलने पर उसके दोस्तों ने दरवाजा खोला, तो वह अंदर मृत मिला. उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया. घटना के बाद से ही हॉस्टल में रहने वाले विद्यार्थियों में नाराजगी है.
एंबुलेंस और इलाज में देरी को लेकर सवाल
प्रदर्शन कर रहे छात्रों का आरोप है कि आदित्य को समय पर चिकित्सा सहायता नहीं मिल सकी. विद्यार्थियों ने संस्थान की एंबुलेंस में ड्राइवर और ऑक्सीजन जैसी जरूरी सुविधाओं की उपलब्धता पर सवाल उठाए हैं. छात्रों का दावा है कि समय पर एंबुलेंस और उचित चिकित्सा सहायता मिलती, तो आदित्य की जान बच सकती थी.
एक छात्र ने यह भी आरोप लगाया कि आदित्य की हालत बिगड़ने के दौरान मदद के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी और वार्डन ने छात्रों को सीपीआर देने से रोका. छात्र संस्थान प्रबंधन की जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं.
प्रदर्शन कर रहे छात्रों का आरोप है कि कल लाठीचार्ज के दौरान फर्स्ट ईयर के एक छात्र के सिर पर चोट लगी और खून भी निकला. छात्रों का कहना है कि कल उन्हें आश्वासन दिया गया था कि उन पर लाठीचार्ज नहीं होगा, लेकिन आज पुलिस पूरी तैयारी के साथ आई है. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर संस्थान के निदेशक और प्रशासन का रवैया नहीं बदला, तो उनका करियर पहले ही बर्बाद हो रहा है और वे अपना विरोध जारी रखेंगे. छात्रों ने निदेशक को हटाने की मांग करते हुए आरोप लगाया कि हॉस्टल में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है. उनके मुताबिक, संस्थान की एंबुलेंस में न तो ऑक्सीजन की व्यवस्था है और न ही जरूरी मेडिकल सुविधाएं. छात्रों का दावा है कि आदित्य की हालत बिगड़ने के दौरान वह सांस ले रहा था और अगर समय पर ऑक्सीजन, सीपीआर और दूसरी जरूरी चिकित्सा सहायता मिल जाती, तो शायद उसकी जान बच सकती थी. उन्होंने कैंपस में लिफ्ट खराब होने समेत अन्य सुविधाओं की कमी का भी आरोप लगाया.
खेलगांव थाना प्रभारी निर्भय कुमार के अनुसार, शुरुआती जांच में परीक्षा के दबाव के कारण आत्महत्या की आशंका जताई गई है. संस्थान में 8 अक्टूबर से परीक्षाएं शुरू हुई थीं. पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए रिम्स भेजा है. हालांकि, मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही हो सकेगी.
संस्थान के निदेशक डॉ. राजीव श्रीवास्तव ने कहा था कि छात्र की मौत किन परिस्थितियों में हुई, इसकी जानकारी फिलहाल नहीं है और पुलिस मामले की जांच कर रही है. मृतक के परिजनों को भी सूचना दे दी गई है.
फिलहाल, कैंपस के बाहर छात्रों का प्रदर्शन जारी है. अब सबकी नजर इस बात पर है कि संस्थान प्रबंधन छात्रों की मांगों पर क्या कदम उठाता है और पुलिस की जांच में मौत को लेकर क्या तथ्य सामने आते हैं.

