जोहार लाइव ब्यूरो
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने आतंकवाद के खिलाफ अपने कड़े रुख को जारी रखते हुए एक बड़ी कार्रवाई की है. एनआईए ने प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े एक क्रॉस-सीमा आतंकी साजिश मामले में श्रीनगर के हजरतबल स्थित दानीहामा इलाके में एक आवासीय संपत्ति को कुर्क कर लिया है.
यह संपत्ति गुलाम मोहम्मद मीर उर्फ ‘मामा गैस’ की है. इस संपत्ति को गैरकानूनी गतिविधियां (निवारण) अधिनियम [UA (P) Act, 1967] की धारा 25 के तहत, एनआईए के महानिदेशक की पूर्व अनुमति प्राप्त करने के बाद कुर्क किया गया है.
जानकारी के अनुसार जांच में यह स्थापित हुआ है कि इस आवासीय परिसर का इस्तेमाल पाकिस्तानी आतंकवादियों को पनाह देने और आतंकी नेटवर्क से जुड़ी आपत्तिजनक सामग्री को छिपाने के लिए किया जा रहा था.
एनआइए के अनुसार यह मामला मूल रूप से 31 मार्च 2026 को श्रीनगर के जकूरा पुलिस स्टेशन में एफआईआर संख्या 24/2026 के रूप में दर्ज किया गया था, जिसे बाद में एनआईए ने अपने हाथ में ले लिया.
छापेमारी और हथियारों की बरामदगी
जांच एजेंसी के अनुसार, इस साल 6 अप्रैल 2026 को गुलाम मोहम्मद मीर के श्रीनगर के दानीहामा स्थित घर पर एक तलाशी अभियान चलाया गया था. इस दौरान वहां लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े दो संदिग्ध पाकिस्तानी आतंकवादी अबू हुराइन (Abu Huraira) और खुबैब (Khubaib) छिपे हुए मिले थे. परिसर की तलाशी के दौरान सुरक्षा बलों ने वहां से एक विस्फोटक जैसी सामग्री, डिजिटल डिवाइस सहित अन्य आपत्तिजनक और संवेदनशील दस्तावेज बरामद किए थे.
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी गुलाम मोहम्मद मीर ने पूरी जानकारी होते हुए भी अपनी संपत्ति को आतंकवादियों के लिए एक ‘सुरक्षित ठिकाना’ (Safe Haven) के रूप में इस्तेमाल करने की अनुमति दी थी.
ओवर ग्राउंड वर्कर्स (OGWs) के नेटवर्क का खुलासा
एनआईए की अब तक की जांच से यह बात सामने आई है कि स्थानीय ओवर ग्राउंड वर्कर्स (OGWs) का एक बड़ा नेटवर्क पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा के आकाओं के संपर्क में था. यह नेटवर्क पाकिस्तान से आने वाले आतंकवादियों की घुसपैठ, आवाजाही, उनके ठहरने की व्यवस्था और साजो-सामान (लॉजिस्टिकल सपोर्ट) उपलब्ध कराने का काम करता था.
इन आतंकवादियों का मुख्य उद्देश्य सरकारी प्रतिष्ठानों, सुरक्षा बलों और आम नागरिकों को निशाना बनाकर हमलों को अंजाम देना था.
एनआईए इस पूरे टेरर-सपोर्ट नेटवर्क की तह तक जाने के लिए लगातार छापेमारी कर रही है और इसमें शामिल अन्य OGWs, मददगारों और पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स के संपर्क में आए लोगों की पहचान की जा रही है.

