मुस्कान चौधरी
फोटो – राहुल
जोहार लाइव एक बार फिर कहानियों की नई ऋंखला के साथ आ रहा है. दुर्गापूजा के अवसर पर हम झारखंड की दस ऐसी बच्चियों, महिलाओं की कहानी लेकर आ रहे हैं, जिन्होंने शक्ति को नए सिरे से परिभाषित किया है. सबकी कहानी में शक्ति की एक गाथा लिख रही है. पहली कड़ी में खूंटी जिले के उस बच्ची की कहानी, जिसने महज 14 साल की उम्र में शादी से बचने के लिए अपने बाल लड़कों की तरह कटवा लिए. पूरी रिपोर्ट़
सात साल की उम्र थी. स्कूल जाना शुरू ही किया था. लेकिन घर के सारे काम करना जानती थी. बर्तन धोती थी, आंगन में झाड़ू लगाती थी. किसी गांव के आम बच्चियों की तरह. बिना किसी खास सपने के बस कदम बढ़ाए जा रही थी. एक भाई तीन बहन. पिता बीमार पड़े और उनकी मृत्यु हो गई. मां ने आगे की जीवन जीने के लिए किसी के साथ होना चुन लिया. बच्ची है, सो इस घट रही घटनाओं को शब्दों में पिरो नहीं पा रही.
भाई ने पालना शुरू किया. एक बार फिर जीवन पटरी पर आने लगी. साल 2023 में वो कक्षा सात में थी. भाई और भाभी को उसे पालना अखर रहा था. ये अखरन दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही थी. तय किया कि उसे दूसरे के आंगन झाड़ू लगाने भेज देना चाहिए. शादी के लिए लड़का देख लिया गया.
लड़कों के परिजन उसे देखने उसके घर आनेवाले थे. बच्ची को इसकी भनक लग गई.
सर मुझे फुटबॉल खेलना था. मैं अपने कुछ दोस्तों के घर गई. किसी से 20 तो किसी से 50 रुपया मांगा. जोड़ा, तो 200 रुपए हो गए. मैं गांव के ही सैलून गई और सैलून वाले भैया से सीधे बोला कि मेरा बाल लड़का लोग की तरह काट दीजिये.
तुम का करेगी रे ऐसा बाल काट के. सैलून वाले भैया ने पूछा. मैं कुछ बोली नहीं, सब कहा कि काट दीजिये.
अब वो खुद को आइने में देख रही थी. उसे खुद के चेहरे से वो शक्ति नजर आ रही थी, जिससे वो अपनी दुनिया बदलने जा रही थी. सैलून से निकलने वाला एक-एक कदम साहस की पहाड़ चढ़ती दिख रही थी.
पहाड़ भले ही सासस का हो, चढ़ाई में पैर और शरीर कराहते जरूर हैं.
जैसे ही घर पहुंची, भैया-भाभी से मार तो पहले भी खाती थी, लेकिन उस दिन जैसा नहीं. परिवार में हंगामा मच गया. रिश्तेदारों तक बात पहुंची. जहां शादी होनी थी, उस परिवार तक भी बात पहुंची.
शक्ति मुंडा (बदला हुआ नाम) फफक पड़ी. जबकि जिस वक्त वो ये बात बता रही थी, रांची के भुसुर गांव में, जहां वो इस वक्त आशा नाम की संस्था में रह रही है, वहां से सौ मीटर दूर एक फुटबॉल टुर्नामेंट में बतौर गोलकीपर खेल कर तुरंत वापस आई थी, वो बोल गई …सर शादी रुक गई. इतना कहते-कहते वो फफक पड़ी.
बाकी थी लड़ाई
लड़ाई अभी बाकी थी. हर दिन पिटाई से परेशान होकर एक दिन पास के एक सामाजिक संस्था पहुंच गई. साफ कह दिया कि यहीं रहूंगी. लेकिन वहां उस वक्त बच्चियों के रहने की व्यवस्था का अभाव था. संस्थान की केयरटेकर ने कहा कि ये 200 रुपए लो और उसे रांची जानेवाली बस में बिठा दिया.
शक्ति अकेले निकल पड़ी. रांची के लालखटंगा इलाके के भुसुक गांव स्थित आशा संस्था पहुंच गई. संस्था के निदेशक अजय जायसवाल कहते हैं, जब से ये आई है इसके परिवार के किसी ने इससे संपर्क तक करने की कोशिश नहीं की है.
क्या तुम्हारा मन नहीं होता मां से मिलने का, दीदी से बात करने का.
किसी को मुझसे मतलब नहीं है. मैं भी अब धीरे-धीरे चीजों को समझने लगी हूं. मुझे पता है अब मेरी जिंदगी यही है, अब मैं आगे बढ़ना चाहती हूं.
थोड़ी चुप्पी के बाद. तुम क्या करना चाहती हो.
जिस हाथ से चार गोल बचाकर वो आई थी, उसी से आंसू पोछते हुए…सर मैं पहले तो बढ़िया गोलकीपर बनना चाहती हूं. टीम इंडिया में शामिल होना है मुझे. मुझे आर्मी में भी जाने की इच्छा है.
झारखंड के खूंटी जिले की रहने वाली शक्ति मुंडा फिलहाल कस्तूरबा प्लस टू हाई स्कूल में दसवीं कक्षा में पढ़ाई कर रही हैं. बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रही है. लेकिन अपने सपने को साथ लेकर. वो इस वक्त स्टेट अंडर-16 और अंडर-17 फुटबॉल के लिए तैयारी कर रही हैं. उन्होंने बताया कि बड़ी दीदियां उन्हें खेल के बारे में बताती हैं और वह उनके निर्देशों को दोहराकर अभ्यास करती हैं.
संस्था में रह रही बाकि बच्चियां ही अब उसके सुख-दुःख के साथी हैं.
लड़ने, पढ़ने और जीतने की सैंकड़ों मिशाल दुनिया भर में हैं. मिशाल की उन कड़ियों में शक्ति मुंडा का सैलून जाना, उसकी कुर्सी पर बैढ़ना, लड़कों की तरह बाल कटवाना और पूरे आत्मविश्वास के साथ अपने जीवन को 360 डिग्री पर मोड़ देना, एक स्टेटमेंट है.
एक साक्षात्कार के दौरान पूर्व क्रिकेटर मो. कैफ ने कहा था. संघर्ष सबका बराबर होता है. लेकिन वो चढ़कर तब बोलता है, जब संघर्ष करनेवाला सफल होता है. संघर्ष मैंने भी किया, धोनी ने भी किया. लेकिन मेरे मुकाबले धोनी अधिक सफल हैं, ऐसे में उनका संघर्ष भी अधिक है.
शक्ति मुंडा शायद भारतीय टीम की गोलकीपर बन जाए. ये सपना न पूरा हो, तो आर्मी में चली जाए. लेकिन जिस दिन वो अपने जीवन में बड़े कैनवास पर दूसरी बार सफलता को उकेरेगी, उसका सैलून पहुंचना उसे मुस्कुराने का कारण देगी.

