रांची: झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) से जुड़े मामलों की सुनवाई के दौरान झारखंड हाईकोर्ट ने बुधवार को बेहद सख्त रुख अपनाया. अदालत ने परीक्षा में गड़बड़ी, जांच की सुस्त गति और इन सबसे प्रभावित होने वाले अभ्यर्थियों के भविष्य को लेकर तीखी टिप्पणियां कीं. कोर्ट ने दो-टूक शब्दों में कहा कि “व्यवस्था इस तरह नहीं चल सकती.” इस मामले की अगली सुनवाई अब कल यानी गुरुवार, 8 अक्टूबर को सुबह 11 बजे से फिर शुरू होगी.
व्यवस्था इस तरह नहीं चल सकती
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पूरे घटनाक्रम पर मौखिक रूप से चिंता जताते हुए कहा कि वह मामले से जुड़े दस्तावेजों का बारीकी से अध्ययन करेगी ताकि यह समझा जा सके कि इस पूरे प्रकरण में किस स्तर पर ‘सिस्टेमैटिक फेलियर’ (Systematic Failure) हुआ है. कोर्ट ने याद दिलाया कि करीब 10-15 साल पहले लोक सेवा की परीक्षाओं और लगभग 20 साल पहले रांची व हजारीबाग में भी गिरफ्तारियां हुई थीं, जहां गड़बड़ी करने वालों और सफल अभ्यर्थियों को अलग कर कड़ी कार्रवाई की गई थी.
नौकरी जाने के खतरे से मानसिक तनाव और मानवीय पहलू
अदालत ने इस मामले के सबसे संवेदनशील और मानवीय पहलू पर गहरी चिंता व्यक्त की. कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी में कहा कि कई अभ्यर्थी पहले से ही, भले ही अनुबंध (कंट्रैक्ट) नौकरियों में कार्यरत हैं.
कोर्ट ने चेतावनी देते हुए कहा, “ऐसे में कोई व्यक्ति एक दिन अचानक अखबार खोलकर देखे कि उसका नाम मामले में आ गया है या उसकी नौकरी चली गई है, तो इसका उस पर गंभीर असर पड़ सकता है. ऐसी स्थिति में कई लोग मानसिक रूप से टूट सकते हैं और कुछ युवा आत्महत्या जैसा गंभीर कदम भी उठा सकते हैं.” अदालत ने माना कि प्रशासनिक लापरवाही और गड़बड़ियों का खामियाजा मानसिक रूप से युवाओं को भुगतना पड़ रहा है.
जांच की गति पर 1983 के विश्व कप का तंज
जांच एजेंसियों की कार्यशैली पर कटाक्ष करते हुए हाईकोर्ट ने 1983 के क्रिकेट विश्व कप का दिलचस्प उदाहरण दिया. कोर्ट ने कहा कि उस समय किसी को उम्मीद नहीं थी कि कपिल देव की भारतीय टीम सेमीफाइनल तक पहुंचेगी, लेकिन टीम फाइनल में पहुंची और उसके बाद लोग नेट प्रैक्टिस करने लगे.
इसी तर्ज पर कोर्ट ने कहा कि शुरुआती एक-दो साल तक इस मामले में कोई खास हलचल नहीं हुई, लेकिन अब जब मामला पूरी तरह सामने आ गया है, तो ऐसा प्रतीत होता है कि बड़े पैमाने पर कार्रवाई और जांच दिखाने के लिए अचानक पूरी ताकत झोंक दी गई है.

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से कुछ नए दस्तावेज अदालत के समक्ष रखे गए. कोर्ट ने दस्तावेजों के बिंदु संख्या 5 का हवाला देते हुए सवाल किया कि आखिर किस आधार पर कुछ चुनिंदा लोगों को अलग (चिह्नित) किया गया है? इन तमाम बिंदुओं और पक्षों की दलीलों पर अब कल सुबह 11 बजे से फिर से सुनवाई आगे बढ़ाई जाएगी.

