गुजरात के समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी मिल गई है. राष्ट्रपति ने गुजरात यूनिफॉर्म सिविल कोड बिल, 2026 को 17 सितंबर को मंजूरी दी. गुजरात विधानसभा ने 24 मार्च को बिल पारित किया था. इसके साथ गुजरात उत्तराखंड के बाद यूसीसी कानून पारित करने वाला दूसरा राज्य बना था.
गुजरात के यूसीसी में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने और लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े मामलों के लिए समान कानूनी प्रावधान किए गए हैं. विवाह का पंजीकरण अनिवार्य किया गया है और बहुविवाह पर रोक का प्रावधान है. लिव-इन रिलेशनशिप के पंजीकरण और उससे जुड़े अधिकारों के लिए भी प्रावधान किए गए हैं.
गुजरात के यूसीसी में अनुसूचित जनजातियों (ST) को इसके दायरे से बाहर रखा गया है. बिल में ST समुदायों के साथ कुछ अन्य संरक्षित समूहों के लिए भी अपवाद दिया गया है.
तीन राज्यों को राष्ट्रपति की मंजूरी
देश में अब तक चार राज्यों की विधानसभाएं यूसीसी बिल पारित कर चुकी हैं. इनमें उत्तराखंड, गुजरात, असम और मध्य प्रदेश शामिल हैं. उत्तराखंड विधानसभा ने 7 फरवरी 2024 को यूसीसी बिल पारित किया था. राष्ट्रपति ने 11 मार्च 2024 को इसे मंजूरी दी और नियम अधिसूचित होने के बाद 27 जनवरी 2025 से उत्तराखंड में यूसीसी लागू हो गया. उत्तराखंड फिलहाल देश का एकमात्र राज्य है जहां यूसीसी प्रभावी है.
गुजरात विधानसभा ने 24 मार्च 2026 को यूसीसी बिल पारित किया और राष्ट्रपति ने 17 सितंबर को इसे मंजूरी दी. असम विधानसभा ने 27 मई 2026 को यूसीसी पारित किया था. राष्ट्रपति ने असम के यूसीसी को 29 सितंबर को मंजूरी दी. राष्ट्रपति भवन के आधिकारिक रिकॉर्ड में दोनों राज्यों के बिलों की मंजूरी दर्ज है.
मध्य प्रदेश विधानसभा ने 21 जुलाई 2026 को यूसीसी बिल पारित किया था. बिल को राज्यपाल के माध्यम से राष्ट्रपति के पास भेजा गया है, लेकिन 2 अक्टूबर तक राष्ट्रपति की मंजूरी नहीं मिली है.

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