देशभर में करीब 45,000 करोड़ रुपये के ई-चालान की रकम बकाया है. इनमें झारखंड में भी बड़ी संख्या में चालान की राशि वसूल नहीं हो सकी है. केंद्र सरकार के 2024 के आंकड़ों के मुताबिक, झारखंड में जारी 7.18 लाख से अधिक ई-चालानों में 78.42 करोड़ रुपये की रकम unpaid थी. अब बकाया ट्रैफिक चालानों की वसूली के लिए सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को बिजली बिल से जोड़ने जैसे विकल्प पर विचार करने का सुझाव दिया है. कोर्ट ने कहा कि सिर्फ ई-चालान जारी करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि जुर्माने की वसूली भी सुनिश्चित करनी होगी.
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ सड़क सुरक्षा से जुड़े मामले की सुनवाई कर रही थी. सुनवाई के दौरान कोर्ट के सामने ई-चालानों से जुड़ी बड़ी रकम की वसूली लंबित होने का मुद्दा आया. इसी पर कोर्ट ने बकाया राशि की वसूली के लिए बिजली बिल से लिंक करने समेत दूसरे विकल्पों पर विचार करने की बात कही.
करीब 45 हजार करोड़ के ई-चालान की रकम का आंकड़ा
सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में करीब 45,000 करोड़ रुपये के ई-चालान की राशि वसूल की जानी है, जबकि करीब 25,000 करोड़ रुपये की वसूली हो चुकी है. कोर्ट का जोर इस बात पर था कि इलेक्ट्रॉनिक तरीके से चालान काटने के बाद उनकी वसूली की प्रभावी व्यवस्था भी हो.
पीठ ने बकाया चालान की वसूली के लिए अलग-अलग विकल्पों पर विचार किया. इनमें वाहन के रजिस्ट्रेशन के नवीनीकरण, स्वामित्व हस्तांतरण, फिटनेस और प्रदूषण प्रमाणपत्र से जुड़ी सेवाओं पर रोक लगाने जैसे उपाय शामिल हैं. ड्राइविंग लाइसेंस के नवीनीकरण को बकाया चालान से जोड़ने का विकल्प भी चर्चा में आया.
कोर्ट ने संकेत दिया कि ई-चालान व्यवस्था का उद्देश्य केवल ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों का रिकॉर्ड तैयार करना नहीं होना चाहिए. जुर्माने की रकम की वसूली भी enforcement का अहम हिस्सा है. इसी संदर्भ में बिजली बिल में बकाया चालान जोड़ने जैसे विकल्प पर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को विचार करने का सुझाव दिया गया.
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में बकाया ट्रैफिक चालान को बिजली बिल में जोड़ने का कोई आदेश नहीं दिया है. यह राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सामने रखा गया एक संभावित recovery mechanism है.
राज्यों में कितना बकाया?
केंद्र सरकार ने दिसंबर 2025 में लोकसभा में 2024 के राज्यवार ई-चालान का आंकड़ा दिया था. इसके मुताबिक, 2024 में देशभर में 8.19 करोड़ ई-चालान जारी हुए. इनमें 3,834.85 करोड़ रुपये की वसूली हुई, जबकि 9,097.89 करोड़ रुपये के ई-चालान unpaid रहे. यह 2024 में जारी चालानों का आंकड़ा है, जबकि सुप्रीम कोर्ट की 28 सितंबर 2026 की सुनवाई में करीब 45,000 करोड़ रुपये का मौजूदा कुल बकाया आंकड़ा बताया गया.
2024 में सबसे अधिक unpaid e-challan राशि उत्तर प्रदेश में 2,386.10 करोड़ रुपये और दिल्ली में 2,247.26 करोड़ रुपये थी. तमिलनाडु में 1,010.51 करोड़, केरल में 472.20 करोड़, ओडिशा में 379.27 करोड़, महाराष्ट्र में 353.37 करोड़ और बिहार में 331.01 करोड़ रुपये के ई-चालान unpaid थे.
झारखंड में 2024 के दौरान 7,18,621 ई-चालान जारी हुए. इनमें 27.17 करोड़ रुपये की वसूली हुई, जबकि 78.42 करोड़ रुपये की राशि unpaid रही.
2024 में unpaid ई-चालान की राशि
(करोड़ रुपये में)
| राज्य/UT | राशि |
|---|---|
| उत्तर प्रदेश | 2,386.10 |
| दिल्ली | 2,247.26 |
| तमिलनाडु | 1,010.51 |
| केरल | 472.20 |
| ओडिशा | 379.27 |
| महाराष्ट्र | 353.37 |
| बिहार | 331.01 |
| हरियाणा | 310.36 |
| गुजरात | 302.11 |
| राजस्थान | 173.56 |
| झारखंड | 78.42 |
स्रोत : सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, लोकसभा में दिए गए राज्यवार और वर्षवार जवाब.
2025 में 9.78 करोड़ से ज्यादा चालान
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के फरवरी 2026 के लोकसभा जवाब के अनुसार, 2025 में देशभर में 9,78,57,086 ट्रैफिक चालान दर्ज किए गए और इनसे करीब 37,614.14 करोड़ रुपये की वसूली हुई. यह आंकड़ा कुल ट्रैफिक चालानों और वसूली का है, केवल unpaid e-challan का नहीं.
राज्यों की स्थिति देखें तो 2025 में झारखंड में 11,64,884 चालान दर्ज किए गए और 261.05 करोड़ रुपये की वसूली हुई. वहीं बिहार में 31,70,844 चालान दर्ज हुए और 239.22 करोड़ रुपये की वसूली हुई.
मंत्रालय के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 2026 में 8 फरवरी तक देशभर में 1,03,31,950 ट्रैफिक चालान दर्ज किए गए और 2,566.11 करोड़ रुपये की वसूली हुई. यह पूरे 2026 या वित्त वर्ष 2026-27 का आंकड़ा नहीं है, बल्कि 8 फरवरी 2026 तक उपलब्ध आंकड़ा है.
इसी अवधि में झारखंड में 26,105 चालान दर्ज हुए और 2.61 करोड़ रुपये की वसूली हुई. बिहार में 3,17,084 चालान दर्ज हुए और 23.92 करोड़ रुपये की वसूली हुई.
उपलब्ध सरकारी आंकड़ों से साफ है कि ई-चालान और डिजिटल enforcement का दायरा बड़ा हुआ है. वहीं सुप्रीम कोर्ट के सामने रखा गया करीब 45,000 करोड़ रुपये का बकाया यह सवाल भी खड़ा करता है कि चालान जारी होने के बाद जुर्माने की रकम की वसूली कैसे सुनिश्चित की जाए.
सुप्रीम कोर्ट में यह सुनवाई सड़क सुरक्षा से जुड़े 2012 के मामले एस. राजसीकरण बनाम भारत संघ में हुई. इस मामले में सड़क दुर्घटनाओं में मौत और गंभीर चोटों को कम करने तथा सड़क सुरक्षा के उपायों को प्रभावी तरीके से लागू करने की मांग की गई थी.
मामले में कोर्ट समय-समय पर राज्यों को सड़क सुरक्षा और ट्रैफिक नियमों के enforcement से जुड़े निर्देश देता रहा है. अब कोर्ट यह भी देख रहा है कि उसके पुराने निर्देशों का राज्यों में कितना पालन हुआ है. कोर्ट ने अमिकस क्यूरी से अब तक दिए गए निर्देशों, उनकी तय समयसीमा और उनके अनुपालन की स्थिति का एक चार्ट तैयार करने को कहा है.
इस मामले में बकाया ई-चालानों की वसूली को लेकर कोर्ट का मौजूदा रुख यही है कि चालान जारी करने के साथ उसकी वसूली की प्रभावी व्यवस्था भी होनी चाहिए.
Also Read : झारखंड: रांची में ट्रैफिक पुलिस की बड़ी कार्रवाई, एक महीने में 1.20 लाख चालान, 7.80 करोड़ रुपये का जुर्माना

