सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाई कोर्ट के उस फैसले पर स्वतः संज्ञान लिया है, जिसमें महिला की सलवार उतारने की कोशिश और उसकी छाती दबाने जैसे आरोपों को परिस्थितियों के आधार पर ‘रेप की कोशिश’ का अपराध नहीं माना गया था. चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने हाई कोर्ट के फैसले में की गई कुछ टिप्पणियों को पहली नज़र में आपत्तिजनक बताया है.
CJI सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान बिहार के एडवोकेट जनरल एसडी संजय से कहा कि हाई कोर्ट के आदेश में कुछ टिप्पणियां ऐसी हैं, जिन पर अदालत को गौर करने की जरूरत है. CJI ने कहा, “कुछ टिप्पणियाँ आपत्तिजनक हैं.”
आरोपी को नोटिस मिलने की पुष्टि के निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामले में आगे बढ़ने से पहले आरोपी का पक्ष भी सुना जाना जरूरी है. CJI सूर्य कांत ने कहा, “हम आरोपी की बात सुनने के बाद ही इसे रद्द कर पाएँगे.” अदालत ने बिहार के एडवोकेट जनरल से स्थानीय पुलिस के माध्यम से यह सुनिश्चित करने को कहा कि संबंधित आरोपी को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस मिल जाए.
यह मामला IN RE: ORDER DATED 09.07.2026 PASSED BY THE HIGH COURT OF JUDICATURE AT PATNA IN CRIMINAL APPEAL (SJ) NO. 775/2013 से जुड़ा है और इसे SMW(Crl) No. 5/2026 के साथ जोड़ा गया है.
क्या था पटना हाई कोर्ट का फैसला?
पटना हाई कोर्ट के 9 जुलाई 2026 के आदेश में एक आपराधिक मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने आरोपी को IPC की धारा 376 और 511 के तहत मिली सजा को रद्द कर दिया था.
हाई कोर्ट के सामने आरोप था कि आरोपी ने एक महिला की सलवार उतारने की कोशिश की और उसकी छाती दबाकर उसके साथ शारीरिक छेड़छाड़ की. हालांकि अदालत ने माना कि मामले में पेनिट्रेशन का कोई सबूत नहीं था और न ही रेप करने के इरादे को साबित करने वाली कोई स्पष्ट हरकत सामने आई थी.

अदालत ने इन परिस्थितियों में आरोपों को ‘रेप की कोशिश’ के बजाय अधिकतम IPC की धारा 354 के तहत महिला की गरिमा भंग करने वाले अपराध की श्रेणी में माना. इसी आधार पर IPC धारा 376 और 511 के तहत दी गई सजा को रद्द कर दिया गया था.
क्या है पूरा मामला ?
सुप्रीम कोर्ट के सामने यह मामला जुलाई में उस समय आया था, जब अदालत इलाहाबाद हाई कोर्ट के एक फैसले पर स्वतः संज्ञान लेकर सुनवाई कर रही थी. उस मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक नाबालिग लड़की के स्तन पकड़ने, उसके पजामे का नाड़ा तोड़ने और उसे पुलिया के नीचे खींचने की कोशिश जैसे आरोपों को ‘रेप की कोशिश’ के अपराध के लिए पर्याप्त नहीं माना था.
सुप्रीम कोर्ट ने बाद में इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस विवादित आदेश को रद्द कर दिया था. साथ ही यौन अपराधों से जुड़े मामलों की सुनवाई के दौरान न्यायिक संवेदनशीलता को लेकर दिशा-निर्देश भी जारी किए थे.
पटना हाई कोर्ट के आदेश पर उठे सवाल
पटना हाई कोर्ट के फैसले की जानकारी सुप्रीम कोर्ट को इसी सुनवाई के दौरान दी गई. सीनियर एडवोकेट शोभा गुप्ता और एचएस फूलका ने अदालत के सामने दलील रखी कि इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट द्वारा रद्द किए जाने के बावजूद पटना हाई कोर्ट ने मिलते-जुलते तथ्यों वाले मामले में समान तरह की टिप्पणियां की हैं.
इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाई कोर्ट के 9 जुलाई 2026 के आदेश का स्वतः संज्ञान लिया. अब सुप्रीम कोर्ट इस मामले में आरोपी का पक्ष सुनने के बाद आगे की कार्रवाई पर विचार करेगा. फिलहाल अदालत ने पटना हाई कोर्ट के फैसले में की गई उन टिप्पणियों पर सवाल उठाया है, जिन्हें प्रथम दृष्टया आपत्तिजनक माना गया है.
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